बुध का स्वाति नक्षत्र में गोचर: बुद्धिमत्ता और व्यापार में होगी वृद्धि, नुकसान से बचने के लिए करें आसान उपाय
बुध ग्रह 1 अक्टूबर 2026 को स्वाति नक्षत्र में प्रवेश कर चुका है, जो 12 अक्टूबर तक रहेगा। यह गोचर ...और पढ़ें

स्वाति नक्षत्र में बुध का प्रभाव

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज 1 अक्टूबर 2026, गुरुवार को ग्रहों का राजकुमार माने जाने वाले बुध तुला राशि में रहते हुए स्वाति नक्षत्र 9 बजकर 33 मिनट पर प्रवेश कर चुके हैं। बुध राहु के नक्षत्र में करीब 12 अक्टूबर 2026, सोमवार तक यहां रहेंगे।
ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, वाणी, व्यापार, बातचीत और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष विद्या में रुचि रखने वाले जातकों को जानना चाहिए कि, बुध का स्वाती नक्षत्र में परिवर्तन जीवन पर क्या प्रभाव डालता है?
स्वाति नक्षत्र क्या है?
वैदिक ज्योतिष में स्वाति 15वां नक्षत्र है, जो स्वतंत्रता, लचीलेपन और आत्म-विकास के लिए जाना जाता है। स्वाति शब्द का असल मतलब है, 'स्वतंत्र' या 'खुद चलने वाला' है। इस नक्षत्र का स्वामी तुला राशि को माना जाता है।
इस नक्षत्र का मुख्य प्रतीक हवा में लहराता हुआ एक नन्हा पौधा है, जो लचीलेपन, विकास और स्वतंत्रता का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग अक्सर 'आत्मनिर्भर', अनुकूलनीय और अपने जीवन पथ पर चलने वाले माने जाते हैं।
स्वाति नक्षत्र में बुध के होने से क्या होता है?
स्वाति नक्षत्र में बु्ध की उपस्थिति होने से व्यक्ति जानकारी जुटाने और फौरन समाधान निकालने में माहिर हो जाता है। अनुसंधान, पत्रकारिता, कूटनीति और खरीद-फरोख्त के क्षेत्र में अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं। आपको अलग-अलग विषयों पर सोचने-समझने का पर्याप्त समय मिलता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, स्वाति नक्षत्र को चार भागों में विभाजित किया गया है, जिनमें से हर एक अलग-अलग ग्रहों और राशि चक्र की ऊर्जाओं द्वारा शासित होता है।
व्यापार जगत पर क्या असर पड़ता है?
बुध के स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करने पर व्यक्ति में लेन-देन की समझ बढ़ने के साथ सभ्य व्यवहार को अपनाता है। व्यापार जगत में लाभ के योग बनते हैं। प्रेम जीवन में प्यार अधिक गहराता जाता है। इस नक्षत्र में विवाह बेहद शुभ माना जाता है।
बुध, तुला और स्वाति नक्षत्र से जुड़ी एक सामान्य बात यह भी है कि, ये सभी व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में बुध का स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करने से व्यक्ति व्यापार की तरफ झुकाव और स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए प्रेरित होता है।
स्वाति नक्षत्र में बुध व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता को निखारने का काम करता है, जिससे वह तेजी से अनुकूल बदलाव कर अपनी संचार क्षमता को बेहतर कर पाता है।
बुध और राहु को प्रसन्न करने के उपाय
स्वाति नक्षत्र का स्वामी राहु होने के कारण बेचैनी और विदेशी चीजों के प्रति रुचि बढ़ सकती है। इसके अलावा मन एक विषय से दूसरे विषय पर काफी भटकता रहता है और व्यक्ति एक ही समय में कई कामों को करने की कोशिश कर सकता है। इस दौरान बुध को बेहतर करने के लिए व्यक्ति को प्राणायाम करना चाहिए।
इसके अलावा बुधवार को 'ऊं बुधाय नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके अलावा विष्णु की पूजा करने के साथ हरे रंग के कपड़े और मूंग दान करने से कुंडली में बुध की स्थिति बेहतर होती है। वहीं, राहु को प्रसन्न करने के लिए व्रत के दौरान मादक पदार्थों से दूर रहें और शनिवार को दुर्गा जी का पाठ जरूर करें।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
