विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

रमा एकादशी और देवउठनी एकादशी में क्या है अंतर? पढ़ें दोनों व्रतों का धार्मिक महत्व

Published: Wed, 04 Nov 2026 07:00 PM (IST)

रमा एकादशी और देवउठनी एकादशी कार्तिक मास की दो महत्वपूर्ण एकादशियां हैं, जिनके नाम, तिथि और धार्मिक महत्व में अंतर ...और पढ़ें

रमा एकादशी और देवउठनी एकादशी के बीच का अंतर

रमा एकादशी और देवउठनी एकादशी के बीच का अंतर

HighLights

  1. रमा एकादशी कृष्ण पक्ष में, देवउठनी शुक्ल पक्ष में आती है।

  2. रमा एकादशी भगवान विष्णु की पूजा, पाप मुक्ति के लिए है।

  3. देवउठनी एकादशी से शुभ कार्य, तुलसी विवाह की शुरुआत होती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म से जुड़े लोगों के लिए एकादशी व्रत का काफी खास महत्व है। एकादशी से जुड़े सभी व्रत भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। हिंदू पंचांग के हिसाब से प्रत्येक महीन में 2 एकादशी आती है, ठीक उसी तरह कार्तिक मास (नवंबर) में भी दो सबसे खास एकादशी आती है। इसमें एक 'रमा एकादशी' और दूसरी 'देवउठनी एकादशी' है।

ये दोनों ही एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन दोनों के नाम से लेकर तिथि और धार्मिक महत्व में काफी अंतर देखने को मिलता है। बहुत से लोग इन दोनों एकादशी को एक समान समझ लेते हैं, जबकि दोनों के पीछे की धार्मिक मान्यताएं काफी अलग हैं। आइए जानते हैं रमा एकादशी (Rama Ekadashi 2026) और देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi 2026) के बीच का अंतर?

कब मनाई जाती हैं रमा और देवउठनी एकादशी?

हिंदू पंचांग के हिसाब से कार्तिक मास में आने वाली रमा एकादशी कृष्ण पक्ष में आती है, जबकि देवउठनी एकादशी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आती है। इन दोनों ही एकादशियों के बीच करीब 15 दिनों का अंतराल होता है।

इस साल रमा एकादशी 5 नवंबर 2026, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी, जबकि देवउठनी एकादशी का व्रत 20 नवंबर 2026, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा। भले ही ये दोनों एकादशी एक ही महीने में आते हों, लेकिन दोनों का चंद्र पक्ष अलग होता है।

रमा एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व

रमा एकादशी व्रत भगवान श्रीविष्णु की पूजा करने के लिए बेहद खास दिन है। पद्म पुराण के उत्तरखंड अध्याय में इस एकादशी का वर्णन देखने को मिलता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को रमा एकादशी का धार्मिक महत्व समझाते हैं।

राजा मुचुकुंद, उनकी बेटी और दामाद शोभन का संबंध रमा एकादशी की पौराणिक कथा से है। कथा कहती है कि, एक बार शोभन ने रमा एकादशी का व्रत रखा था। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उन्हें दिव्य नगरी मिली। इसके बाद चंद्रभागा ने भी अपने व्रत के तपोबल से उस नगरी को स्थायी बनाने में मदद की थी।

माना जाता है कि रमा एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की पुण्य कृपा मिलने के साथ व्यक्ति को पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

देवउठनी एकादशी क्यों है खास?

देवउठनी एकादशी जिसे देवोत्थान और प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु 4 महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद चार महीने तक चलने वाले चातुर्मास का समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर होता है।

माना जाता है कि देवउठनी एकादशी पर करीब 4 महीने के बाद भगवान विष्णु नींद से जागते हैं। इसी कारण से इसका नाम देवउठनी एकादशी पड़ है। देवउठनी एकादशी से ही शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है।

देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु को कई स्थानों पर नींद से जगाने की परंपरा निभाई जाती है। इस एकादशी के साथ एक बार फिर से शादी जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह की परंपरा भी निभाई जाती है।

रमा और देवउठनी एकादशी के बीच का अंतर?

रमा एकादशी और देवउठनी एकादशी के बीच सबस बड़ा अंतर इनकी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। जहां रमा एकादशी का संबंध भगवान विष्णु की पूजा, आराधना, व्रत और राजा मुचुकुंद से जुड़ी है, वहीं देवउठनी एकादशी भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने और चातुर्मास के खत्म होने का प्रतीक माना जाता है।

यह भी पढ़ें- रमा एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना व्यर्थ चला जाएगा पूरे व्रत का पुण्य

यह भी पढ़ें- 4 महीने बाद जागेंगे श्री हरि, देवउठनी एकादशी पर बन रहा 'रवि योग' का महासंयोग, नोट करें सही डेट और शुभ मुहूर्त

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।