यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 28, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Rajasthan Politics: शील धाभाई को बनाया गया जयपुर नगर निगम की कार्यवाहक महापौर, भाजपा के टिकट पर हुई थीं निर्वाचित
राजस्थान की राजधानी जयपुर नगर निगम (ग्रेटर) की महापौर सौम्या गुर्जर को बर्खास्त करने के बाद शील धाभाई को कार्यवाहक ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता,जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर नगर निगम (ग्रेटर) की महापौर सौम्या गुर्जर को बर्खास्त करने के बाद शील धाभाई को कार्यवाहक महापौर बनाया गया है। धाभाई जयपुर में भाजपा की वरिष्ठ नेता हैं। धाभाई ने बुधवार दोपहर पदभार ग्रहण किया। स्थानीय निकाय विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार धाभाई को साठ दिन के लिए कार्यवाहक महापौर बनाया गया है। निगम में भाजपा का बहुमत हैं। वे भाजपा के टिकट पर वार्ड नंबर 60 से निर्वाचित पार्षद हैं। 60 दिन की अवधि के भीतर सरकार महापौर का चुनाव करवाएगी । धाभाई के कार्यभार ग्रहण करने के मौके पर एकमात्र विधायक कालचरण सराफ पहुंचे । गुर्जर को मंगलवार को सरकार ने पद से बर्खास्त कर दिया था।
गुर्जर को इसलिए किया गया बर्खास्त
4 जून 2021 को निगम मुख्यालय में महापौर के कक्ष में एक बैठक के दौरान तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी यज्ञमित्र सिंह देव और तीन पार्षदों के बीच विवाद हुआ था। देव का आरोप था कि महापौर एवं पार्षदों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, धक्कामुक्की की। उन्होंने इसकी लिखित में शिकायत ज्योति नगर पुलिस थाने में की थी। पांच जून को सरकार ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए गुर्जर,पार्षद पारस जैन,अजय सिंह और शंकर शर्मा के खिलाफ शिकायत की जांच स्वायत्त शासन विभाग के क्षेत्रीय निदेशक को सौंपी थी। छह जून को रिपोर्ट में महापौर और पार्षदों को दोषी मानते हुए पद से निलंबित कर दिया था। सरकार ने इन सभी के खिलाफ न्यायिक जांच शुरू करवा दी।
शील धाभाई को बनाया गया कार्यवाहक महापौर
सरकार ने शील धाभाई को कार्यवाहक महापौर बना दिया। गुर्जर ने सरकार के इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने 28 जून को महापौर को निलंबन आदेश पर स्टे देने से मना कर दिया। जुलाई में गुर्जर ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर न्यायिक जांच रूकवाने और निलंबन आदेश स्टे करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था स्टे
सर्वोच्च न्यायालय ने एक फरवरी 2022 को निलंबन आदेश पर स्टे दे दिया। इसके अगले दिन गुर्जर फिर महापौर की कुर्सी पर बैठ गई। सरकार द्वारा शुरू की गई न्यायिक जांच की रिपोर्ट 11 अगस्त को आई,जिसमें गुर्जर व तीनों पार्षदों को दोषी माना गया। पार्षदों को सरकार ने इसी न्यायिक जांच के आधार पर पद से हटाया है। सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायिक जांच की रिपोर्ट पेश की । 23 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद सरकार को कार्यवाही के लिए स्वतंत्र करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।