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राजस्थान पुलिस के सिस्टम में साइबर अटैक, हैकर ग्रुप ने 86.3 लाख ईमेल एक्सेस करने का किया दावा

Published: Sun, 25 Oct 2026 12:18 PM (IST)

हैकर ग्रुप स्कार्लेट ने राजस्थान पुलिस के केंद्रीय डेटाबेस में सेंधमारी का दावा किया है, जिसमें लाखों ईमेल और संवेदनशील जानकारी शामिल होने की बात कही गई है।

(यह तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है)

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डिजिटल डेस्क, जयपुर। स्कार्लेट ग्रुप नाम के एक हैकर ग्रुप ने दावा किया है कि उसने राजस्थान पुलिस के केंद्रीय डेटाबेस में एक बड़ी सेंध लगा दी है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि उनके सिस्टम में वास्तव में कोई सेंध लगी है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

हैकर्स का दावा है कि उनके हाथ राज्य के नागरिकों और पुलिस महकमे से जुड़ी बेहद संवेदनशील और गोपनीय जानकारी लग चुकी है, जिसे वे अब डार्क वेब पर खुलेआम बेचने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या है हैकर्स का दावा?

सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में हैकर समूह ने दावा किया है कि उसने राजस्थान पुलिस से जुड़े 5926 मेलबॉक्स, 86.3 लाख ईमेल, 78.3 लाख से अधिक विशिष्ट ईमेल पते, 70301 पहचान रिकॉर्ड और 59,460 मोबाइल नंबरों का डेटा हासिल कर लिया है।

इसके अलावा, समूह ने राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग (DoIT&C) से संबंधित डेटा होने का भी दावा किया है। इसमें 1065 मेलबॉक्स, 69 लॉगिन क्रेडेंशियल्स, 21 वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) लॉगिन और वरिष्ठ अधिकारियों के 64 वीपीएन प्रमाणपत्र शामिल बताए गए हैं।

हैकर्स ने कथित तौर पर एफआईआर की प्रतियां, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), ई-केवाईसी रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के आधिकारिक ईमेल खातों से गोपनीय जानकारी होने का दावा करते हुए कुछ दस्तावेज भी साझा किए हैं। इन दस्तावेजों की सत्यता और स्रोत की जांच जारी है।

राष्ट्रीय एजेंसियों ने संभाली कमान

साइबर क्राइम डीआईजी शांतनु कुमार ने बताया कि कई टीमें इस मामले की जांच कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इनपुट मिलने के बाद साइबर कमांडो टीम, इंसिडेंट रिस्पॉन्स टीम और DoIT का राजस्थान साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर सक्रिय रूप से काम में जुट गए हैं।

डीआईजी के अनुसार, अब तक सिस्टम में कोई तकनीकी खामी सामने नहीं आई है, लेकिन पुलिस इस दावे को पूरी तरह खारिज भी नहीं कर रही है।

मामले की सूचना कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) को दे दी गई है, जबकि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) भी इस कथित डेटा लीक की जानकारी जुटाने में सहयोग कर रहा है। जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि क्या पुलिस के सर्वर या नेटवर्क प्रभावित हुए हैं और हैकर्स तक ये दस्तावेज कैसे पहुंचे।

अधिकारियों के लिए क्या दिए सुरक्षा निर्देश

पुलिस सूत्रों के अनुसार, राज्य की साइबर टीम और आईटी विभाग के अधिकारियों ने समूह के दावों और मंशा को समझने के लिए टेलीग्राम के जरिए उनसे संपर्क किया था। बातचीत के दौरान 100 से 200 डॉलर के भुगतान को लेकर चर्चा हुई, लेकिन कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी।

घटना के मद्देनजर पूरे राजस्थान के पुलिस अधिकारियों को अपने आधिकारिक ईमेल के पासवर्ड तुरंत बदलने और लैपटॉप और मोबाइल फोन को अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी जिला अधिकारियों को साइबर सुरक्षा दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।

डीआईजी शांतनु कुमार ने स्पष्ट किया कि कुछ दस्तावेज किसी निजी ईमेल खाते या सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री से भी जुटाए गए हो सकते हैं, इसलिए तीनों टीमों की रिपोर्ट आने के बाद ही कोई ठोस निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। इस बीच, खबर लिखे जाने तक राजस्थान पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट भी तकनीकी कारणों से बंद थी।

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