नरेन्द्र शर्मा, जयपुर। राजस्थान में अलवर जिले का एक गांव महाभारत काल से अपनी खास पहचान रखता है और अब पर्यटन के लिए इसके 800 घरों को रंग-बिरंगा पोता जा रहा है। अलवर जिले में सरहेटा गांव के घरों को एक दर्जन से अधिक रंगों में रंगा जा रहा है। शायद यह देश का पहला रंगीला गांव होगा। योजनाबद्ध ढंग से घरों पर रंग-बिरंगे रंग करने का मकसद इस गांव को पर्यटन की दृष्टि से विश्व पटल पर लाने का प्रयास है। स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने गांव को विश्व में अलग पहचान दिलाने का प्रयास शुरू किया है।

पिछले एक माह से इस गांव में दीपावली या विवाह उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि हमारा गांव जल्द ही रंगीला गांव के रूप में प्रसिद्धी प्राप्त हासिल कर लेगा। गांव में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। ग्राम पंचायत के संसाधनों के अतिरिक्त ग्रामीण अपने साधनों से भी गांव को साफ रखने में जुटे रहते हैं। गांव में ड्रेनेज सिस्टम बनाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हमारा प्रयास है कि भारत भ्रमण पर आने वाले पर्यटक रंगीला गांव को भी देखने आए, जिससे यहां के नौजवानों को रोजगार मिलेगा, शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के अनुसार महाभारत काल में तिजारा को त्रिगत रियासत के रूप में पहचाना जाता था और इसकी राजधानी सरहेटा गांव रही थी। अब महाभारत काल के 800 साल बाद गांव को विश्व पटल पर चमकाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि त्रिगत रियासत के राजा सुशर्मा राजा हुआ करते थे, उस यह रियासत सामाजिक समरसता और न्याय की भावना से देश की सभी रियासतों में पहचान रखती थी।

सरपंच ने कहा, हम दुनिया में बनाएंगे पहचान

सरहेटा गांव के सरपंच फतेह मोहम्मद का कहना है कि हमारे गांव के हिन्दू-मुस्लिम सभी धर्मों के लोग आपस में मिल जुलकर रहते हैं । घरों को अलग-अलग रगों से नया रूप देकर हम दुनिया में गांव की अलग-पहचान बनाएंगे। स्वयंसेवी संगठनों के साथ ही ग्रामीण मिलजुलकर रंगीला गांव बनाने में जुटे हैं। 

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Posted By: Sachin Mishra