जयपुर, जेेएनएन। Sambhar Lake. पिछले वर्ष सर्दी की शुरुआत में 20 हजार से ज्यादा प्रवासी पक्षियों की कब्रगाह बनी जयपुर की सांभर झील के प्रबंधन के लिए अब सरकार विस्तृत योजना बनाएगी और यहां अवैध रूप से चल रहे खनन, होटलों और अन्य गतिविधियों को बंद किया जाएगा।

सांभर झील से जुड़ा विषय राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड ने उठाया था। उन्होंने कहा कि इस झील में इतनी बड़ी पक्षी त्रासदी होने के बावजूद कोई विभाग इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है। विधानसभा में मामला उठने के साथ ही राजस्थान के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने मंगलवार को ही सांभर झील के प्रबंधन व विकास के लिए गठित स्थायी समिति की बैठक बुलाई। इस समिति का गठन 24 दिसंबर, 2019 को किया गया था और डेढ़ माह बाद मंगलवार को इसकी पहली बैठक हुई।

बैठक में मुख्य सचिव ने सांभर में हुई पक्षियों की मौत के संबंध में किए रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा व भविष्य की रणनीति पर चर्चाा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सांभर के संरक्षण एवं विकास के लिए विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए और कहा कि इस क्षेत्र की विस्तृत प्रबंध योजना तैयार की जाए। इसमे सभी आवश्यक कार्यों के साथ स्थान विशिष्ट योजना शामिल की जाए।

गौरतलब है कि सांभर झील में नवंबर, 2019 में 20 हजार से ज्यादा प्रवासी पक्षियों की मौत हुई थी। ये प्रवासी पक्षी हर वर्ष रूस और अन्य सर्द देशों से यहां आते हैं और मार्च तक यहां रहते हैं।

इस मामले को लेकर मंगलवार को विधानसभा में हुई चर्चा में सरकार ने पिछली सरकार को झील की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराया। सरकार के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री सुखराम विश्नोई ने कहा कि पिछली सरकार के समय वहां अवैध खनन और होटल चलाने की मंजूरी दी। उन्होंने बताया कि पिछले पांच साल में सांभर झील क्षेत्र में खोदे गए अवैध कुएं-ट्यूबवेल और होटल को बंद करने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि गत सरकार के समय एक निजी फर्म ने बिना वन एवं पर्यावरण अनुमति लिए होटल खोल लिया और मिनी ट्रेन चलाने सहित अन्य गतिविधियां चालू कर दी। इन्हें भी बंद करने की कार्रवाई भी की जा रही है।

मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में मुख्यतः केंद्र सरकार के उपक्रम सांभर साल्ट लिमिटेड का अधिकार है, जिनके द्वारा नमक उत्पादन के अतिरिक्त किसी निजी संस्था से करार कर पर्यटन गतिविधियां आरंभ की गई, जिसका दुष्प्रभाव यहां हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में नमक उत्पादन के लिए स्थानीय लोगों को बिना किसी योजना पट्टे जारी करने के संबंध में उद्योग विभाग से सूचना मंगाई जा रही है।

उन्होंने बताया कि पक्षियों की मृत्यु की रिपोर्ट मिलने पर राजस्व और पशु चिकित्सा अधिकारियों के एक दल ने गत वर्ष 10 नवंबर को क्षेत्र का दौरा किया और बर्ड फ्लू की जांच के लिए नमूने एकत्रित किए थे और सरकार ने सभी विभागों के साथ मिल कर तुरंत बचाव कार्य शुरू किया था। विश्नोई ने बताया कि राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग केंद्र, भोपाल सेे प्राप्त रिपोर्ट में पक्षियों में बर्ड फ्लू नहीं पाया गया है। इंडियन वेटरनरी रिसर्च संस्थान बरेली को पक्षियों में हुई बीमारी की पुष्टि के लिए नमूने भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट में एवियन बोट्यूलिज्म रोग की पुष्टि की गई। 

यह भी पढ़ेंः सांभर झील के बाद अब नावां में पांच हजार पक्षियों की मौत

Posted By: Sachin Kumar Mishra

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस