मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

संगरूर/चंडीगढ़,जेएनएन। जिले के सुनाम के नजदीकी गांव भगवानपुरा में 140 फीट गहरे दस वर्ष पुराने बोरवेल में गिरे दो वर्षीय बच्चे फतेहवीर सिंह को नहीं बचाया जा सका। उसे मंगलवार सुबह करीब सवा पांच बजे 109 घंटे के बाद बाेरवेल से निकाल तो लिया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। बच्‍चे को बाेरवेल से निकालने के बाद तुरंत एंबुलेंस से डीएमसी अस्‍पताल ले जाया गया। वहां से उसे चंडीगढ़ पीजीआइ रेफर कर दिया गया। पीजीआइ में बच्‍चे काे मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद शव को हेलीकॉप्टर से सुनाम लाया गया, जहां गांव शेरों के शमशानघाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम क्रिया दौरान भारी गिनती में लोग उमड़े। दूसरी ओर बच्‍चे की मां बेहोशी हालत में है और परिवार का भी बुरा हाल है। पीजीआइ में अकाली नेता परमिंदर सिंह ढी़ंढसा सहित कई नेता भी पहुंचे हैं। पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने बच्‍चे की मौत पर दुख व्‍यक्‍त किया है।

कुछ दिन पहले हो गई थी फतेहवीर की मौत

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक फतेहवीर की मौत कुछ दिन पहले ही हो गई थी। पीजीआइ की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि जब बच्चे को लाया गया उसकी नाड़ी नहीं चल रही थी। हार्ट में कोई गतिविधि नहीं थी, इसलिए बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया था। पुलिस के कहने पर पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के पैनल में डॉ. वाईएस बंसल और डॉ सेंथिल कुमार थे। पोस्टमॉर्टम सुबह 11.15 बजे पूरा हुआ। बच्चे को सुबह 7.25 बजे पेडियाट्रिक इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था। शुरूआती निष्कर्ष यही है कि मौत कुछ दिनों पहले हुई है। डिटेल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट जांच अधिकारी को सौंप दी जाएगी। 

फूटा लोगों का गुस्‍सा, पीजीआइ में किया प्रदर्शन, संगरूर में भी सड़कों पर उतरे लोग

दूसरी ओर, लोगों का सरकार और प्रशासन के खिलाफ गुस्‍सा फूट पड़ा है। लोग सरकार और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। चंडीगढ़ पीजीआइ में काफी संख्‍या में लोग मौजूद हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों के विरोध को देखते हुए पोस्‍टमार्स्‍टम हाउस के बाहर कड़ी सुरक्षा की गई है।

लोगों ने मोर्चरी के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दूसरी ओर, फ़तेहवीर के शव का पोस्टमोर्टम हो गया है। भारी भीड़ को देखते हुए शव को पीछे की गेट से निकला गया है। पोस्‍टमार्टम लगभग दो घंटे में हुआ। अब डॉक्‍टरों की टीम रिपोर्ट बनाने में जुटी है। जांच के लिए विसरा भी लिया गया है।

आप नेता हरपाल चीमा पहुंचे तो किया विरोध, लोग बोले-पांच दिन से कहां थे, अब राजनीति चमकाने आ गए

पीजीआइ में शिरोमणि अकाली दल के नेता परमिंदर सिंह ढींढसा सहित कई नेता पहुंचे। आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल चीमा भी वहां पहुंचे। उनका लोगों ने काफी विरोध किया और वहां से जाने काे कहा। लोगों ने चीमा के खिलाफ नारेबाजी की और चीमा से पूछा कि  पिछले पांच दिनों से तो नजर नहीं आए और अब राजनीति चमकाने आ गए। लोगों ने चीमा वापस जाओ के नारे लगाए।

उधर, लोगों का प्रशासन और पंजाब सरकार पर गुस्‍सा फूट पड़ा है। गांव और संगरूर में भी लोग प्रदर्शन कर रहे हैं और धरना दे रहे हैं। लाेगों का आरोप है कि प्रशासन और सरकार की लापरवाही के कारण बच्‍चे को समय पर नहीं निकाला जा सका और उसकी जान चली गई। लोगों ने टेंट लगाकर धरना देना शुरू कर दिया है।

संगरूर में लोग सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोगों ने संगरूर के नजदीकी गांव बड़रुखां के बाहरसंगरूर-बठिंडा मेन मेन रोड पर फतेहवीर की मौत के विरोध में प्रदर्शऩ किया और धरना देकर बैठ गए। लोगों ने डीसी व एसएसपी को सस्पेंड करने की मांग की। लोग कैबिनेट मंत्री विजयइंद्र सिंगला खिलाफ नारेबाजी की। लहरागगा में भी लोगों ने फतेहवीर सिंह की मौत के विरोध में प्रदर्शन किया।

सरकार और प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठे लोग।

दूसरी ओर, मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने फतेहवीर की मौत पर दुख जताया है। मुख्‍यमंत्री ने ट्वीट कर कहा, फतेहवीर की दुखद मौत के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ। मैं प्रार्थना करता हूं कि वाहेगुरु उनके परिवार को इस भारी नुकसान को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। राज्‍य सरकार ने खुले बोरवेलों के संबंध में सभी डीसी से रिपोर्ट मांगी है ताकि भविष्य में इस तरह की भयानक दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

फतेहवीर बोरवेल में 125 फीट की गहराई पर फंसा हुआ था। पिछले पांच दिनों से उसे निकालने की कोशिशें की जा रही थीं। इस दौरान रैसिक्यू ऑपरेशन में बार-बार दिक्‍कत आने के कारणा बच्‍चे को  बाहर निकालने में काफी देर हुई और इसी कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। बच्‍चे को  बाहर निकालनेकी कोशिशें में एनडीआरएफ, सेना की असॉल्ट इंजीनियरिंग रेजीमेंट की टीम जुटी रही। मौके पर मेडिकल टीमें भी तैनात थीं।

मंगलवार सुबह सवा पांच बजे फतेहवीर को निकालकर तुरंत एंबुलेंस के जरिये एंबुलेंस में डीएमसी अस्‍पताल ले जाया गया। वहां प्रारंभिक उपचार के बाद बच्‍चे को चंडीगढ़ पीजीआइ रेफर कर‍ दिया गया। इस दौरान फतेहवीर की स्थिति पर कोई भी प्रशासनिक अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था। दूसरी ओर परिवार का आरोप है कि फतेहवीर को निकालने में प्रशासन ने लापरवाही की है। बताया जा रहा है कि जिस बोरवेल से फतेहवीर गिरा था, उससे रस्‍सी के सहारे निकाला गया, टनल व सुरंग से निकालने में एनडीआरएफ टीम को कोई सफलता हाथ नहीं लगी। चंडीगढ़ पीजीआइ में बच्‍चे को मृत घोषित कर दिया गया। अब विशेषज्ञ टीम शव का पोस्‍टमार्टम करेगी।

गांव बड़रुखां के पास संगरूर-बठिंडा मेन मेन रोड में धरना देकर बैठे लोग।

छह दिन से रैस्क्यू आपरेशन चलता रहा, देसी जुगाड़ ही आया काम
 
वीरवार शाम साढ़े चार बजे भगवानपुरा गांव में दो वर्षीय फतेहवीर सिंह पुत्र सुखविंदर सिंह के नौ ईंच चौड़े व 140 फीट गहरे बोरवेल में गिरने के बाद से बेशक छठे दिन की सुबह तक रेस्क्यू आपरेशन लगातार जारी रहा, लेकिन अंत में फतेहवीर सिंह को बोरवेल के माध्यम से रस्सी से खींचकर ही बाहर निकाला जा सका। इसमें देसी जुगाड़ का अहम रोल रहा। गांव मंगवाल के गुरिंदर सिंह नामक व्यक्ति ने एक कुंडी नुमा सरिया का प्रयोग कर फतेहवीर सिंह के चारों तरफ फंसी बोरी को धीरे-धीरे हटाया और उसे बाहर निकालने में आ रही रुकावट को दूर किया गया।

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मात्र 15 मिनट के इस कार्य के बाद एनडीआरएफ की टीम को उसने सूचना दी कि वह फतेहवीर सिंह को अब खींचने का प्रयास करें। इसके बाद एनडीआरएफ की टीम ने फतेहवीर सिंह को खींचकर बोरवेल से बाहर निकाला। गौर हो कि गुरिंदर सिंह सबमर्सिबल पंप की बोरवेल से मोटरें निकालने का काम करता है व पहले दिन भी उसने मौके पर पहुंचकर प्रशासन से इस विधि का प्रयोग करने की अपील की थी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। मंगलवार सुबह उसने एक बार फिर प्रशासन से उसे मौका देने की फरियाद की, जिसके बाद उसे मौका दिया गया।

दूसरी ओर सीएम कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने सभी जिला उपायुक्‍तों से 24 घंटे के अंदर राज्‍य में खुले बोरवेलों के बारे में रिपोर्ट मांगी है। मुख्‍यमंत्री ने इस संबंध में तुरंत कदम उठाने का निर्देश दिया है। फतेहवीर को बचाने के ऑपरेशन पर भी मुख्‍यमंत्री और उनके कार्यालय की नजर है।

मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर ने ट्वीट कर कहा है कि सभी डीसी को यह सुनिश्चित करनेका निर्देश दिया गया है कि वे स‍‍ुनिश्‍चत करें कि उनके जिलों में कोई भी खुला बोरवेल मौजूद नहीं हो। उन्हें इस संबंध में 24 घंटे के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। आम लोग भी अपने क्षेत्र में किसी खुले बाेरवेल के बारे में जानकारी देने के लिए हमारे हेल्पलाइन नंबर 0172-2740397 पर कॉल कर सकते हैं

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बच्‍चे को बचाने के लिए वीरवार सायं से रैसिक्यू ऑपरेशन लगातार जारी रहा। यह ऑपेरशन शुक्रवार, शनिवार रविवार और सोमवार को दिन-रात जारी रहा। साेमवार सुबह भी खुदाई व पाइप डालने का काम चलता रहा। गौरतलब है कि शुक्रवार सुबह के बाद से बच्चे के शरीर में कोई हरकत नजर नहीं थी। एनडीआरएफ की टीम ने उसके हाथों को रस्सी के माध्यम से बांध रखा था, ताकि वह और नीचे न गिरे। बच्चे की लोकेशन 120-125 फीट तक बताई जा रही थी। बच्‍चे का शरीर नीला नहीं पड़ा था, जिससे अनुमान था कि फतेहवीर का दिल काम कर रहा है व रक्तसंचार जारी है। दूसरी तरफ बच्चे की कोई हरकत नहीं दिखाई दे रही थी , जिससे पूजा-पाठ व दुआओं का दौर भी शुरू हो गया। 

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 ऐसे गिरा बच्चा बोरवेल में   

फतेहवीर के परिजन खेतों में काम कर रहे थे और वह खेल रहा था। खेलते-खेलते खेत के बीच दस वर्ष पुराने बोरवेल जिसे परिवार वालों ने प्लास्टिक की बोरी से ढका हुआ था के पास जा पहुंचा। अचानक बच्चे का पांव बोर पर आ गया और बोर पर लगी बोरी कमजोर होने के कारण बच्चा सीधा बोल में नीचे चला गया। जब तक बच्चे के परिजन उसे बचाने के लिए भागे व गहराई तक जा चुका था।

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140 फीट गहरा बोर, 120 फीट पर अटका है बच्चा

बचाव कार्य में बठिंडा से आई एनडीआरएफ की 26 सदस्यों की टीम जुटी हुई है। टीम ने बोरवेल में कैमरा डाला तो यह एक सौ फीस फुट पर अटक गया। जब कैमरे से फोटो लिए गए तो बच्चे के हाथ हिलते हुए नजर आए। एनडीआरएफ के अधिकारियों का कहना है कि बोरवेल 140 फीट गहरा है जबकि एक सौ बीस फुट पर बच्चा अटका हुआ है।

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बोरवेल में इस साल घटी चर्चित घटनाएं

 - 21 फरवरी, 2019 : महाराष्ट्र के पुणे में 200 फुट गहरे बोरबेल के बीच 10 फुट की गहराई में फंसे 6 साल के बच्चे को 13 घंटे चले रेस्क्यू आपरेशन के बाद एनडीआरएफ ने सकुशल बाहर निकाल लिया।

- 21 मार्च, 2019 : हिसार के गांव बलसामंद में बोरबेल में 60 फीट नीचे गिरे डेढ़ साल के बच्चे नदीम को 47 घंटे बाद सुरक्षित निकाला।

- 13 अप्रैल, 2019 : मथुरा जिले के अगरयाला गांव में पांच साल के बच्चे को 100 फुट गहरे बोरबेल से एनडीआरएफ की टीम ने सुरक्षित निकाला गया।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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