मिड-डे मील पर नया नियम बना आफत, पंजाब के स्कूलों में नहीं मिल रहे GST वाले विक्रेता; तीन माह से भुगतान अटका
मिड-डे मील भुगतान के नए नियम से ग्रामीण स्कूलों के शिक्षक परेशान हैं। जीएसटी पंजीकृत विक्रेता नहीं मिलने और तीन महीने से भुगतान लंबित होने से मुश्किल बढ़ी है।

मिड डे मील की प्रतिकात्मक तस्वीर।
HighLights
नए नियमों से मिड-डे मील भुगतान में शिक्षकों को समस्या।
ग्रामीण स्कूलों में गैर-जीएसटी वेंडरों से खरीद मुश्किल।
तीन माह से लंबित भुगतान, शिक्षक जेब से कर रहे खर्च।
जागरण संवाददाता, पटियाला। पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील का प्रबंध करने वाले शिक्षकों को नए नियमों के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार की ओर से पोर्टल के माध्यम से लागू किए गए नए प्रावधानों के तहत बिना जीएसटी नंबर वाले वेंडरों को भुगतान के लिए जोड़ने में दिक्कत आ रही है।
इससे खासकर ग्रामीण स्कूलों में मिड-डे मील के लिए जरूरी सामान की खरीद और भुगतान का मामला उलझ गया है। शिक्षकों के अनुसार, गांवों के स्कूलों में किराना, सब्जियां, दूध, दही और ईंधन आदि सामान स्थानीय छोटे दुकानदारों से खरीदा जाता है। इनमें से कई दुकानदार जीएसटी पंजीकृत नहीं हैं।
ऐसे में शिक्षकों का सवाल है कि क्या अब बच्चों के भोजन के लिए स्थानीय बाजार छोड़कर शहरों में जीएसटी वाले वेंडर तलाशने पड़ेंगे। इससे स्कूलों पर अतिरिक्त समय और परिवहन खर्च का बोझ पड़ेगा।
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शिक्ष जेब से कर रहे खर्च
शिक्षकों ने बताया कि मिड-डे मील की अदायगी पिछले करीब तीन महीनों से लंबित है। बच्चों का भोजन बंद न हो, इसके लिए कई शिक्षक अपनी जेब से 30 से 50 हजार रुपये तक खर्च कर चुके हैं। पहले पीएफएमएस के माध्यम से सीधे भुगतान होता था, लेकिन अब बिल पहले बीपीईओ कार्यालय और फिर खजाना कार्यालय भेजने की बहु-स्तरीय प्रक्रिया के कारण भुगतान में देरी हो रही है।
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व्यावहारिक विकल्प देने की मांग
गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन पंजाब, जिला पटियाला के प्रधान जसविंदर सिंह समाना और सचिव परमजीत सिंह पटियाला ने रोष जताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को ध्यान में रखे बिना बनाए गए नियम शिक्षकों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि लंबित भुगतान तुरंत जारी किए जाएं, गैर-जीएसटी वेंडरों से सामान खरीदने और भुगतान के लिए व्यावहारिक विकल्प दिया जाए तथा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत दी जाए, ताकि वे बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
