पठानकोट, [राज चौधरी]। पंजाब के पठानकोट की दसवीं में पढऩे वाली दो छात्राओं कृतिका और हर्षिता ने कमाल का उपकरण बनाया है। 'मेन्सयू बर्नर' नामक यह उपकरण उपयोग हो चुके सेनेटरी पैड का समुचित निस्तारण करता है। यह उपकरण इस्‍तेमाल किए जा चुके सेनेटरी पैड को खाद में बदल देता है। स्कूल की शिक्षिका के मार्गदर्शन में इन छात्राओं ने उपकरण का प्रारंभिक स्वरूप (प्रोटोटाइप) तैयार किया है, जिसे सराहा जा रहा है। इसके बाद इस्‍तेमाल के बाद सेनेटरी पैड के निस्‍तारण की समस्‍या दूर हो जाएगी और साथ ही इसका समुचित उपयोग हो सकेगा।

फेंकें नहीं, जलाएं: : उपयोग किए जा चुके सेनेटरी पैड को सुरक्षित तरीके से करता है नष्ट

कृतिका और हर्षिता कहती हैैं, उपयोग के बाद सेनेटरी नैपकिन का निस्तारण सबसे बड़ी समस्या बन गया है। अमूमन इसे पॉलीथिन या कागज में रख कूड़े में फेंक दिया जाता है, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। हमने जो उपकरण बनाया है, उसने इस समस्या का समाधान प्रस्तुत किया है। इससे अब खाद बनेगी, जो हरियाली बढ़ाने में इस्तेमाल होगी।

पठानकोट के क्राइस्ट द किंग कॉन्वेंट स्कूल की इन छात्राओं ने सेनेटरी नैपकिन डिस्पोजल यूनिट को मेन्सयू बर्नर नाम दिया है। नैपकिन जलाने के बाद, जो राख बनेगी, उसे घरों में भी गमलों में खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

छात्राओं द्वारा तैयार किया गया मेन्सयू बर्नर का माॅडल।

जलने पर बनने वाली राख का खाद के रूप में किया जा सकेगा इस्तेमाल

भारत सरकार की ओर से 27 से 31 दिसंबर 2019 तक केरल में आयोजित नेशनल चिल्ड्रन कांग्रेस में देशभर के स्कूलों से 685 टीमों ने हिस्सा लिया था। इन छात्राओं का यह मॉडल भी इस में पेश किया गया, जिसे सभी ने सराहा। अब इस प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेजने की तैयारी चल रही है।

गुड़, सहजन और नीम के पत्ते मिलाने पर बन जाएगी जैविक खाद

छात्राओं ने बताया कि उपकरण में थर्मोस्टेट के साथ 1500 वाट क्षमता का क्वाइल हीटर लगाया गया है। टीन की चादर से तैयार डिब्बे के अंदरूनी हिस्से में मिट्टïी की मोटी परत चढ़ाई है। सेनेटरी पैड को इसमें डाले जाने पर एक उचित तापमान पर यह जलने लगता है। इस प्रक्रिया के दौरान इससे सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती हैैं, जिन्हें चारकोल (कार्बन), पोटैशियम डाइक्रोमेट और फेरस सल्फेट के जार में रखे मिश्रण से गुजारा जाता है। इससे यह गैैसें निष्क्रिय हो जाती हैैं। नैपकिन जलने से बनी राख को खाद के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैैं। वहीं, इसमें गुड़, सहजन और नीम के पत्ते मिलाकर इसे जैविक खाद में तब्दील कर सकते हैैं।

मॉडल को तैयार करने में बायोलॉजी की अध्यापिका कंचन गुलेरिया छात्राओं की गाइड रहीं। उनके अनुसार, इस मॉडल पर कुल 800 रुपये खर्च आया है। मेन्सयू बर्नर तीन मिनट में एक नैपकिन को सुरक्षित तरीके से नष्ट कर सकता है। मॉडल में अभी और सुधार किया जाएगा। इसमें सेंसर लगाए जाएंगे, जिससे यह खुद एक-एक कर नैपकिन नष्ट करता रहे। फिलहाल इसमें एक-एक कर सेनेटरी नैपकिन डालने पड़ते हैं। छात्राएं कृतिका सिंह और हर्षिता कहती हैं कि अपने मॉडल को पहला स्थान मिलने से उत्साह बढ़ा है।

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'कराया जाएगा पेटेंट'

जिला शिक्षा अधिकारी बलवीर सिंह और जिला विज्ञान पर्यवेक्षक राजेश्वर सलारिया कहते हैं कि इस उपलब्धि के लिए छात्राओं और उनकी गाइड को गणतंत्र दिवस पर सम्मानित किया जाएगा। इस मॉडल का पेटेंट भी करवाया जाएगा।

 

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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