काम की खबर: पराली से मशरूम उगाकर किसान कर सकते हैं बंपर कमाई, पढ़ें कैसे होगा तगड़ा फायदा
किसान अब बेकार समझी जाने वाली धान की पराली का उपयोग मशरूम की खेती के लिए कर सकते हैं, जिससे वे अच्छी कमाई कर पाएंगे।

काम की खबर: पराली बनेगी कमाई का जरिया (फाइल फोटो)
HighLights
पराली का उपयोग मशरूम की खेती में करें किसान
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय दे रहा मशरूम खेती का प्रशिक्षण
कम लागत में मशरूम से अच्छा मुनाफा कमाएं किसान
जागरण संवाददाता, लुधियाना। बेकार समझे जाने वाली धान की पराली को किसान कमाई का जरिया बना सकते हैं। किसान पराली का इस्तेमाल मशरूम की खेती के लिए कर सकते हैं। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की ओर से पराली की खपत बढ़ाने के लिए किसानों को मशरूम की खेती करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय के विज्ञानियों के अनुसार गेहूं की तूड़ी के साथ-साथ पराली बराबर मात्रा में पराली मिलाकर कंपोस्ट बनाकर मशरूम की खेती की जा सकती है। मशरूम की खेती कम जगह और कम समय और सीमित संसाधनों में अच्छा मुनाफा देने वाला एक प्रमुख कृषि व्यवसाय है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बेरोजगारी कम होगी।
हर साल 20 टन धान पराली निकलत है
पंजाब में 19,500 टन मशरूम का उत्पादन हो रहा है। जबकि हर वर्ष करीब 20 मिलियन टन धान की पराली निकलती है। पीएयू के माइक्रोबायोलाजी डिपार्टमेंट की असिस्टेंट प्रो. शिवानी शर्मा के अनुसार पंजाब में मशरूम की खेती के प्रति रुझान बढ़ रहा है।
राज्य में लुधियाना, पटियाला, डेराबस्सी, संगरूर, अमृतसर और होशियारपुर में मशरूम की खेती प्रमुख रूप से की जा रही है। बटन व ढींगरी मशरूम की खेती के लिए पराली का इस्तेमाल किया जा सकता है। गर्मियों में पराली मशरूम भी उगाया जा सकता है। बटन मशरूम की बाजार में हर समय मांग बनी रहती है। डा. शिवानी के अनुसार पीएयू द्वारा मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष कई ट्रेनिंग करवाई जाती हैं। यह ट्रेनिंग तीन से पांच दिन की होती है।
देश में पराली जलाने के मामलों में आधे से अधिक मध्य प्रदेश में
देशभर में पराली जलाने की जितनी घटनाएं दर्ज की जा रही हैं, उनमें 50 प्रतिशत से अधिक मध्य प्रदेश की हैं। वर्ष 2025 में विभिन्न राज्यों में इसके कुल 33,028 मामले सामने आए, जिसमें 17,067 (51 प्रतिशत) मध्य प्रदेश के थे। वर्ष 2021 के पहले सालभर में पांच हजार मामले भी सामने नहीं आ रहे थे लेकिन इसके बाद लगातार बढ़े हैं।
वर्ष 2024 में प्रदेश में पराली जलाने के 16,074 और वर्ष 2025 में 17,067 मामले सामने आए जो देश में सर्वाधिक हैं। ये आंकड़े सैटेलाइट के हैं। पंजाब में 14 अक्टूबर तक पराली जलाने के 184 मामले सामने आ चुके हैं। अमृतसर और तरनतारन में सबसे अधिक मामले हैं।
