यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 04, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Punjab News: ऑनलाइन बिक रही पुलिस की वर्दी, दांव पर लगी सुरक्षा; कमिश्नर ने जांच के दिए निर्देश
Punjab News पुलिस की वर्दी ऑनलाइन बिक रही है। समय-समय पर पुलिस की तरफ से निर्देश भी जारी किए जाते ...और पढ़ें

गगनदीप रत्न, लुधियाना। पुलिस की वर्दी बेचना अपराध है और इसके लिए समय-समय पर पुलिस की तरफ से निर्देश भी जारी किए जाते हैं। इन निर्देशों की ऑनलाइन प्लेटफार्म परवाह नहीं करते हैं। दो से तीन हजार में ऑनलाइन वर्दी से लेकर जूते, टोपी और बाकी की एसेसरी मंगवाई जा सकती है। इससे सुरक्षा दांव पर लग गई है।
लुधियाना में ही ऐसी कई वारदात हुई हैं, जिसमें पुलिस की वर्दी का गलत इस्तेमाल किया गया है। फिर चाहे वो नाके लगाकर लूटने के मामले हों या फिर पुलिस की वर्दी में कारोबारी के अपहरण करने का। इसके बावजूद पुलिस की चौकसी सिर्फ कागजों तक सीमित है।
कई मामलों में पर्दी पहनकर वारदात को दिया अंजाम
अगर पिछले दो वर्षों की बात करें तो 19 के करीब मामलों में पुलिस की वर्दी पहनकर वारदात को अंजाम दिया गया है। अधिकांश मामलों में आरोपितों ने इंटरनेट मीडिया पर ऑनलाइन बिकने वाले सामान का ही इस्तेमाल किया था। बता दें कि शरारती तत्वों ने इंटरनेट मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर फर्जी अकाउंट बनाकर इनका गलत इस्तेमाल किया है। यहां पर वो कहीं की भी लोकेशन भरें, कंपनी उन तक प्रोडक्ट पहुंचा देती है, जो वो भरते हैं।
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इनपर पुलिस की वर्दियां, अलग-अलग राज्यों की पुलिस के लोगो, स्टार, जूते, जुराबें, टोपी आसानी से मिल जाते हैं। इसके लिए आइडी प्रूफ देने की भी जरूरत नहीं है। इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद इनपर कोई कार्रवाई नहीं होती है। वर्दी 1999 रुपये, 350 रुपये में टोपी, 225 रुपये में बेल्ट और 650 रुपये में पुलिस के जूते मिल रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि जिस लाइट को लगाने की अनुमति सिर्फ पुलिस को है, वो भी 400 रुपये में आनलाइन बिक रही है। इस लाइट को लगाने पर आम लोगों के चालान हो सकते है या केस भी दर्ज किया जा सकता है।
कई पुलिस कर्मी किसी भी टेलर से सिलवाते हैं वर्दियां
कई मामलों में जब पुलिस ने वर्दियों के साथ आरोपितों को पकड़ा तो पता चला कि उन्होंने टेलर से सिलवाई थी। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि कई पुलिस कर्मचारी किसी भी टेलर से वर्दियां सिलवा लेते हैं। इसके बारे में विभाग को खबर तक नहीं होती।
इसी वजह से टेलर के भी हौसले बुलंद हैं और वो किसी के भी कहने पर पुलिस की वर्दी सिल देते हैं। नियमानुसार वर्दी सिलवाने वाले को अपना आइकार्ड और बेल्ट नंबर लिखवाना होता है। इसके बारे में विभाग को बताना भी जरूरी होता है।
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इन मामलों में हुआ पुलिस की वर्दी का गलत इस्तेमाल
-साहनेवाल इलाके में दो दिन पहले पुलिस की वर्दी पहनकर बदमाशों ने प्रापर्टी कारोबारी का अपहरण कर लिया। उसकी पिटाई करने के बाद कार से फेंक दिया।
-जगराओं स्थित जोधां इलाके में कुछ दिन पहले एक युवक को डीएसपी की वर्दी के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसने अपने परिवार को बताया था कि वो पुलिस भर्ती हो गया है।
-थाना सात की पुलिस ने कुछ समय पहले एक व्यक्ति को पकड़ा था, जोकि खुद को पुलिस मुलाजिम बनकर नाके लगाता था।
-थाना दो की पुलिस ने खुद को इंटरपोल का एजेंट बनाने वाले शख्स को फर्जी आइकार्ड के साथ पकड़ा था, जोकि उसने आनलाइन खरीदा था।
ये गंभीर मामला है। इसे लेकर साइबर सेल के अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएंगे कि वो इसकी जांच करें और इस तरह से बिक रही पुलिस की वर्दी और बाकी की एसेसरी को तुरंत प्रभाव से ऑनलाइन मीडिया प्लेटफार्म से हटाया जाए। -कुलदीप सिंह चहल, पुलिस कमिश्नर
