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खन्ना में डोप टेस्ट को लेकर हंगामा, मंत्री सौंध की रिपोर्ट नेगेटिव, सैंपलिंग प्रक्रिया पर विपक्ष ने उठाए सवाल

Published: Sun, 27 Sep 2026 05:16 PM (IST)

खन्ना में मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध का डोप टेस्ट निगेटिव आने के बाद सैंपलिंग प्रक्रिया पर सवाल उठे। अस्पताल में नेताओं के बीच विवाद बढ़ा, पुलिस ने स्थिति संभाली।

अपनी रिपोर्ट के साथ मंत्री तरुणप्रीत सौंध।

अपनी रिपोर्ट के साथ मंत्री तरुणप्रीत सौंध।

HighLights

  1. कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध का डोप टेस्ट नेगेटिव आया।

  2. विपक्षी दलों ने सैंपलिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।

  3. अस्पताल में नेताओं के बीच तीखी बहस, पुलिस ने संभाली स्थिति।

जागरण संवाददाता, खन्ना (लुधियाना)। नशे के मुद्दे पर शुरू हुआ डोप टेस्ट चैलेंज रविवार को खन्ना के सरकारी अस्पताल में राजनीतिक विवाद में बदल गया। कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध का डोप टेस्ट निगेटिव आने के बाद अकाली दल और कांग्रेस नेताओं ने सैंपलिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इस दौरान अस्पताल में नेताओं के बीच तीखी बहस हुई और एसएमओ के कमरे में हाथापाई की नौबत आ गई।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और मंत्री को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना की जानकारी रविवार को सामने आई। मिली जानकारी के अनुसार, मंत्री सौंध निर्धारित समय से करीब 10 मिनट पहले सरकारी अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह भसीन के कमरे में डोप टेस्ट के लिए सैंपल दिया। जांच के बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद अकाली नेता यादविंदर सिंह यादू और कांग्रेस नेता गुरकीरत सिंह कोटली भी अस्पताल पहुंचे।

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सिविल अस्पताल में एसएमओ के कमरे में हो रही बहस।

मंत्री के सैंपल पहले लिए जाने पर उठा सवाल

विपक्षी नेताओं ने मंत्री के सैंपल पहले लिए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने यह भी पूछा कि सैंपल लेने के लिए महिला कर्मचारी की ड्यूटी क्यों लगाई गई। इन सवालों को लेकर एसएमओ के कमरे में नेताओं के बीच बहस शुरू हो गई। मामला बढ़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने मंत्री को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला।

बाद में यादविंदर सिंह यादू और गुरकीरत सिंह कोटली ने भी डोप टेस्ट कराया। दोनों की रिपोर्ट भी निगेटिव आई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद डोप टेस्ट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।

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मंत्री सौंध ने आरोप खारिज किए

मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध ने सैंपलिंग प्रक्रिया पर लगाए गए सवालों को खारिज किया। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। दूसरी ओर, अकाली नेता यादविंदर सिंह यादू ने मंत्री को दोबारा जांच की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि दोनों साथ चलकर पीजीआइ या अंबाला में डोप टेस्ट करवा सकते हैं।

कांग्रेस नेता गुरकीरत सिंह कोटली ने भी जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि पूरी प्रक्रिया कैमरे के सामने होनी चाहिए थी, ताकि सैंपलिंग को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।

डोप टेस्ट पर शुरू हुई राजनीति

इससे पहले खन्ना में विकास कार्यों को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस डोप टेस्ट की चुनौती में बदल गई थी। मंत्री सौंध ने रविवार को सरकारी अस्पताल में डोप टेस्ट कराने पर सहमति जताई थी। इसके बाद अकाली नेता यादविंदर सिंह यादू और कांग्रेस के गुरकीरत सिंह कोटली भी इस प्रक्रिया में शामिल हुए।

रविवार को अस्पताल में हुए घटनाक्रम ने डोप टेस्ट को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और गरमा दिया। फिलहाल मंत्री सौंध, यादविंदर सिंह यादू और गुरकीरत सिंह कोटली, तीनों के टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आने की बात सामने आई है।

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