लुधियाना, जेएनएन। आजादी से पहले जब देश की शिक्षा प्रणाली जब ईसाई मिशनरियों का एकक्षत्र राज हो गया था उस दौर में आर्य समाज ने भारतीय परंपराओं को बचाने के लिए शिक्षा क्षेत्र में कदम रखा। समाज ने पहले ईसाई मिशनरियों के कांवेंट स्कूलों के सामांतर अपने विद्यालय स्थापित किए और लोगों को भारतीयता का पाठ पढ़ाना शुरू किया। आर्य समाज लुधियाना में जब स्कूल शिक्षा में अपना दबदबा बनाने में कामयाब हुआ तो उसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थान खोलने का फैसला किया। आजादी से पहले 1946 में सिविल लाइन में आर्य कालेज की स्थापना की।

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बड़ी चुनौतियों के बावजूद आर्य समाज ने इस कालेज को स्थापित किया। एक साल बाद ही देश आजाद हुआ। लेकिन उस दौर में उच्च शिक्षा हासिल करने वालों की गिनती काफी कम हुआ करती थी। लेकिन इसके बावजूद आर्य समाज ने गवर्नमेंट कालेज के समानांतर कालेज चलाया। देखते-देखते आर्य कालेज लुधियाना भी सूबे के प्रमुख कालेजों में अपना नाम बना चुका था। आजादी के बाद जैसे जैसे लोगों में शिक्षा के प्रति जागरूकता आने लगी और कालेज में लड़कियों की गिनती बढ़ने लगी तो आर्य समाज ने 1970 में महिला कालेज अलग खोल दिया। दोनों कालेज अब भी शहर के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल हैं।

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आर्य कालेज लुधियाना शुरू से ही खेल गतिविधियों में आगे रहा। खासकर हाकी व क्रिकेट को लेकर इस कालेज के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। क्रिकेटर यशपाल शर्मा, हाकी में ओलंपियन सुखबीर ग्रेवाल, हरदीप ग्रेवाल, वेट लिफ्टर प्रवेश कुमार जैसे बडे अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाफ अपना योगदान दे चुके हैं। इस कालेज को खेलों की नर्सरी भी कहा जाता रहा है। क्योंकि बड़े बड़े खिलाड़ी यहां आकर बच्चों को ट्रैनिंग देने के साथ साथ खुद भी प्रैक्टिस करते रहे हैं। आज भी क्रिकेट की कोचिंग के लिए आर्य कालेज का ग्राउंड अपना योगदान दे रहा है।

 

 

 

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