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सोढल मेले में पार्क में झूले लगाने का मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जालंधर निवासियों ने लगाए आरोप; निगम से जवाब तलब

Published: Sat, 26 Sep 2026 03:01 PM (IST)

जालंधर के सोढल मेले में रामलीला पार्क के भीतर झूले लगाने के विवाद में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और ...और पढ़ें

जालंधर का सोढल मेला।

जालंधर का सोढल मेला।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने जालंधर नगर निगम को नोटिस जारी किया।

  2. निवासियों ने पार्क में झूलों की एनओसी पर सवाल उठाए।

  3. सुरक्षा और पर्यावरण क्षति का आरोप, अगली सुनवाई 16 नवंबर।

जागरण संवाददाता, जालंधर। जालंधर के प्रसिद्ध सोढल मेले के दौरान नेहरू चिल्ड्रन पार्क-रामलीला ग्राउंड में झूले लगाने के लिए नगर निगम द्वारा दी गई अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का मामला अब पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट की चौखट पर पहुंच गया है। स्थानीय निवासियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है और पंजाब सरकार सहित नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की है। यह याचिका मोहल्ला सोढल नगर के वासियों ने अधिवक्ता तनु बेदी के माध्यम से दायर की है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नगर निगम ने झूलों की एनओसी जारी करने में नियमों की अनदेखी की है।

निगम ने पहले 17 सितंबर को झूलों की अनुमति दी थी, लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा पेड़ कटाई और सुरक्षा संबंधी शिकायतें दर्ज कराने पर १७ सितंबर को एनओसी रद्द कर दी गई। हालांकि, इसके बाद 22 सितंबर को दोबारा 24 से 27 सितंबर तक के लिए नई एनओसी जारी कर दी गई, जो निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है।

 

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पार्क ग्रीन स्पेस के रूप में दर्ज

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह पार्क वर्ष 2001 से एक संरक्षित हरित क्षेत्र (ग्रीन स्पेस) के रूप में दर्ज है और पिछले 25 सालों में मेले के दौरान भी यहां कभी बड़े झूले नहीं लगाए गए। झूलों की स्थापना के लिए जेसीबी से की गई गहरी खुदाई और पेड़ों की अवैध कटाई से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, रिहायशी मकानों से महज 18 से 20 फीट की दूरी पर 40 से 52 फीट ऊंचे झूले लगाना क्षेत्रवासियों की सुरक्षा के साथ बड़ा खिलवाड़ है।

 

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याचिका में बैंगलोर मेडिकल ट्रस्ट का मामला

याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के बैंगलोर मेडिकल ट्रस्ट बनाम मुद्दपा (1991) के ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी पार्क की जमीन को व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों ने साफ किया है कि उन्हें मेले या धार्मिक आयोजनों से कोई एतराज नहीं है, बल्कि वे सार्वजनिक पार्क के अवैध व्यावसायिक दोहन और उससे होने वाले खतरे पर रोक लगाना चाहते हैं।

 

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