दुष्कर्म, आत्महत्या और हिंसा... व्हाट्सएप ग्रुप की 'आग' से आधी रात कैसे सुलग उठा कैंपस? LPU बवाल की Inside Story
जालंधर की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में छात्रा से दुष्कर्म और आत्महत्या की अफवाहों के बाद छात्रों ने देर रात जमकर ...और पढ़ें
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LPU बवाल की Inside Story। फोटो जागरण
HighLights
छात्रा से दुष्कर्म-आत्महत्या की अफवाहों पर छात्रों का प्रदर्शन।
कैंपस में तोड़फोड़, आगजनी और वाहनों को पहुंचाया नुकसान।
छात्रों ने जालंधर-फगवाड़ा हाईवे जाम कर यातायात रोका।
जागरण संवाददाता, जालंधर। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में शनिवार देर रात इंटरनेट मीडिया पर एक छात्रा से दुष्कर्म और उसके बाद आत्महत्या की सूचना फैलने के बाद शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते बड़े बवाल में बदल गया। पुलिस और प्रबंधन ने पहले दावा किया कि ना कोई रेप हुआ है, ना ही कोई आत्महत्या लेकिन बाद में दुष्कर्म की एफआइआर दर्ज की गई।
हालांकि आत्महत्या के मामले की पुष्टि नहीं हुई। रात करीब 3.30 बजे कैंपस में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में छात्र हास्टलों से निकलकर सड़कों पर आ गए। पहले नारेबाजी और प्रदर्शन हुआ, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति बिगड़ गई। छात्रों के एक समूह ने यूनिवर्सिटी परिसर में तोड़फोड़ शुरू कर दी। कई जगहों पर शीशे तोड़े गए, ईंट-पत्थर और गमले फेंके गए।
कुछ स्थानों पर आगजनी भी की गई। हंगामा बढ़ने पर पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति संभालने का प्रयास किया। प्रदर्शन लंबा खिंचता देख पुलिस आंसू गैस के गोले लेकर भी मौके पर पहुंची। बताया जा रहा है कि हंगामे के दौरान कई वाहन क्षतिग्रस्त किए गए और कुछ वाहनों में आग लगा दी गई। पुलिस की एक गाड़ी को भी नुकसान पहुंचाए जाने की सूचना है।

इंटरनेट मीडिया पर फैली सूचना से भड़का गुस्सा
हंगामे की शुरुआत इंटरनेट मीडिया पर तेजी से फैली एक सूचना से हुई। छात्रों के बीच यह बात पहुंची कि गर्ल्स हास्टल 3 में कमरा नंबर 502 में रहने वाली एक छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ है और बाद में उसने आत्महत्या कर ली। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि घटना में किसी बाहरी व्यक्ति या निर्माण कार्य से जुड़े कर्मचारी की भूमिका थी।
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छात्रों की ओर से यह भी आरोप लगाए गए कि हास्टल वार्डन को मामले की जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की और छात्रा को उसके घर भेज दिया। छात्रों का आरोप था कि वार्डन और प्रबंधन ने उनकी बात गंभीरता से नहीं सुनी, जिससे आक्रोश बढ़ता गया।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। शुरुआती घंटों में पुलिस अधिकारियों की ओर से कहा गया कि उनके पास दुष्कर्म के संबंध में कोई औपचारिक शिकायत नहीं आई है। बाद में छात्र की ओर से दिए गए बयान के आधार पर मामले की जांच शुरू करने की बात पुलिस ने कही।
गर्ल्स हास्टल की सुरक्षा पर उठाए सवाल
हंगामे के दौरान छात्रों ने गर्ल्स हास्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप था कि छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चूक हुई है और विशेष रूप से गर्ल्स हास्टल में बाहरी या पुरुष स्टाफ की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए गए।
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आप था कि दुष्कर्म किसी टेक्नीशियन ने दिया है लेकिन वह कौन था इसकी पुष्टि नहीं हुई। छात्रों का कहना था कि यदि किसी बाहरी व्यक्ति की हास्टल तक पहुंच हुई है तो इसकी जांच होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन से सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

छात्रों ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान छात्रों की ओर से पांच प्रमुख मांगें सामने आईं। छात्रों का कहना था कि राज्यसभा सदस्य और एलपीयू के चांसलर अशोक मित्तल मौके पर बुलाया जाए। घटना के आरोपित को सबूतों के साथ गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाए।
इसके अलावा दुष्कर्म और आत्महत्याओं से जुड़े मामलों की जवाबदेही तय करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई। छात्रों ने छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और गर्ल्स हास्टल में किसी भी पुरुष स्टाफ की तैनाती नहीं करने की मांग रखी।
उनकी एक मांग यह भी थी कि वार्डन छात्रों के सामने आकर माफी मांगें और अपने पद से इस्तीफा दें। इसके साथ ही छात्रों ने यूनिवर्सिटी में एक स्टूडेंट प्रेसिडेंट नियुक्त किए जाने की मांग भी रखी।
कैंपस में शीशे टूटे, ईंट-पत्थर चले, आगजनी
रात करीब 3.30 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र होता गया। कैंपस में जगह-जगह छात्र समूहों में जमा हो गए। नारेबाजी के बीच कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी की संपत्ति में तोड़फोड़ शुरू कर दी। कई जगहों पर शीशे टूटे और ईंट-पत्थर फेंके गए।
कुछ स्थानों पर आगजनी के कारण धुआं उठता दिखाई दिया। हंगामे के दौरान कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए। कुछ वाहनों में आग लगाए जाने की बात सामने आई है। पुलिस की एक गाड़ी को भी प्रदर्शनकारियों की ओर से नुकसान पहुंचाया गया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को कैंपस में तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों की संख्या अधिक होने और लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए।

सुबह चार बजे हाइवे पर बैठ गए छात्र
कैंपस में कई घंटे तक चले हंगामे के बाद छात्र सुबह करीब चार बजे मुख्य गेट से बाहर निकलकर जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे पर पहुंच गए। छात्रों ने हाईवे पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके कारण जालंधर और फगवाड़ा दोनों तरफ यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। कुछ ही देर में हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
जालंधर से फगवाड़ा, लुधियाना और चंडीगढ़ की तरफ जाने वाले वाहन फंस गए। दूसरी ओर फगवाड़ा की तरफ से जालंधर आने वाले यातायात पर भी इसका असर पड़ा। धरने के दौरान एक एंबुलेंस भी जाम में फंस गई। बाद में पुलिस ने रास्ता बनाकर एंबुलेंस को वहां से निकलवाया। यात्रियों और वाहन चालकों को कई घंटे तक परेशानी का सामना करना पड़ा।
जालंधर और फगवाड़ा की तरफ से आने वाले वाहनों को डायवर्ट किया
हाइवे पर छात्रों के प्रदर्शन के कारण पुलिस को यातायात डायवर्ट करना पड़ा। अमृतसर-जालंधर की तरफ से आने वाले यातायात को जालंधर के पास रामा मंडी से डायवर्ट किया गया। वहीं लुधियाना-चंडीगढ़ की तरफ से आने वाले वाहनों को फगवाड़ा बाईपास की ओर से वैकल्पिक रूट पर भेजा गया।
करीब 13 घंटे तक हाईवे पर प्रदर्शन और यातायात अवरोध का असर रहा। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर उन्हें सड़क से हटाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद सुबह करीब 8.30 बजे के बाद यातायात सामान्य होने की सूचना मिली। लेकिन बाद में फिर से हालात बेकाबू हो गए और छात्र सड़क पर आ गए।
प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ तो आंसू गैस लेकर पहुंची पुलिस
कैंपस और हाइवे पर छात्रों का प्रदर्शन लंबे समय तक जारी रहा। स्थिति को देखते हुए पुलिस पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंची। प्रदर्शन समाप्त नहीं होने की स्थिति में पुलिस आंसू गैस के गोले लेकर भी पहुंची। हालांकि, पुलिस की ओर से छात्रों को बातचीत के जरिए शांत करने और रास्ता खुलवाने का प्रयास किया गया। पुलिस के सामने एक तरफ हाइवे पर यातायात बहाल करवाने और दूसरी तरफ कैंपस में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रही।
पहले पुलिस ने कहा, शिकायत नहीं, बाद में जांच शुरू
मामले को लेकर शुरुआती दौर में पुलिस अधिकारियों ने कहा कि दुष्कर्म की कोई औपचारिक शिकायत उनके पास नहीं आई है। बाद में छात्रों की ओर से दिए गए बयान के आधार पर मामले की जांच शुरू करने की बात सामने आई। शिकायत में गर्ल्स हास्टल 3 की एक छात्रा के साथ कुछ दिन पहले कथित दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है।
अब जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन डाटा और फोरेंसिक साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि इंटरनेट मीडिया पर कथित घटना की सूचना सबसे पहले किसने प्रसारित की और उसमें किए गए दावों की वास्तविकता क्या है।
एलपीयू ने कहा, झूठी और मनगढ़ंत अफवाहें फैलाई जा रही हैं
वहीं, एलपीयू प्रबंधन ने दुष्कर्म और आत्महत्या से जुड़ी इंटरनेट मीडिया पर चल रही सूचनाओं को पूरी तरह खारिज किया है। यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार डा. मोनिका गुलाटी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से झूठी, बेबुनियाद और मनगढ़ंत अफवाहें फैला रहे हैं।
इन सूचनाओं से छात्रों के बीच भ्रम पैदा हो रहा है और शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। प्रबंधन ने कहा कि जिस तरह से यह जानकारी व्यवस्थित तरीके से फैलाई जा रही है, उससे यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा और छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश प्रतीत होती है।
यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है। छात्रों, अभिभावकों और आम जनता से अपील की गई कि वे अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें, उन्हें आगे न फैलाएं और केवल यूनिवर्सिटी के आधिकारिक माध्यमों से जारी जानकारी पर भरोसा करें।
पुलिस के सामने रही दोहरी चुनौती
पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस के सामने दो प्रमुख चुनौतियां रहीं। पहली, छात्रा से दुष्कर्म की सूचना की वास्तविकता सामने लाना और दूसरी, कैंपस में तोड़फोड़, आगजनी, वाहनों को नुकसान पहुंचाने तथा हाईवे जाम करने वालों की पहचान करना।
पुलिस कैंपस और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। हंगामे के दौरान बनाए गए वीडियो और अन्य उपलब्ध डिजिटल सबूतों की भी जांच की जा सकती है। साथ ही यूनिवर्सिटी परिसर में हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
लगभग 15 घंटे से जारी घटनाक्रम ने एलपीयू परिसर की सुरक्षा, छात्रों की शिकायतों के हल और इंटरनेट मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट सूचनाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल दुष्कर्म के आरोप की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। वहीं, पुलिस की जांच के साथ यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि हंगामे के दौरान हिंसा और आगजनी में कौन-कौन शामिल था।
कब क्या हुआ? पूरी टाइमलाइन
रात करीब 1:45 बजे पुलिस को मिली सूचना
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी परिसर में छात्रों के जुटने और सड़क पर प्रदर्शन की सूचना पुलिस को मिली। कपूरथला के एसएसपी गौरव तूरा के मुताबिक पुलिस को करीब 1:45 बजे स्थिति की जानकारी मिली। मौके पर पहुंचने पर पुलिस को पता चला कि इंटरनेट मीडिया पर एक छात्रा से दुष्कर्म से संबंधित सूचना फैलने के बाद छात्र एकत्र हुए हैं।
रात करीब 2 बजे गर्ल्स हास्टल के पास प्रदर्शन तेज
अन्य रिपोर्टों के अनुसार करीब दो बजे गर्ल्स हास्टल के आसपास छात्रों का प्रदर्शन तेज हो गया। अलग-अलग हास्टलों से छात्र बाहर आने लगे। प्रदर्शन में नारेबाजी के साथ यूनिवर्सिटी प्रबंधन से जवाब मांगने की आवाज उठी।
रात 2 बजे के बाद प्रदर्शन ने लिया उग्र रूप
कुछ देर बाद स्थिति बिगड़ने लगी। छात्रों की भीड़ ने कैंपस में तोड़फोड़ शुरू कर दी। खिड़कियों के शीशे, गमले और कैंपस की अन्य संपत्ति क्षतिग्रस्त किए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ सामान में आग लगाई गई।
रात करीब 3:30 बजे कैंपस में बड़े स्तर पर बवाल
आपके मौके के इनपुट के अनुसार करीब 3:30 बजे छात्रों का गुस्सा और भड़क गया। बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में सड़कों पर उतर आए। ईंट-पत्थर चलने, शीशे टूटने और आगजनी की घटनाएं हुईं। कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया और कुछ वाहनों में आग लगाई गई। पुलिस वाहन को नुकसान पहुंचाए जाने की बात भी सामने आई है।
रात 3:30 से 4 बजे के बीच पुलिस ने संभाला मोर्चा
स्थिति लगातार बिगड़ने पर पुलिस बल को सक्रिय किया गया। प्रदर्शन लंबा खिंचने और भीड़ के उग्र होने के बीच पुलिस आंसू गैस के गोले लेकर भी पहुंची। पुलिस की प्राथमिकता कैंपस में कानून-व्यवस्था कायम करना और छात्रों को नियंत्रित करना रहा।
सुबह करीब 4 बजे छात्र हाईवे पर पहुंचे
कैंपस के अंदर प्रदर्शन के बाद छात्र मुख्य गेट से बाहर आए और जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाइवे पर बैठ गए। इसके साथ ही हाईवे पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई।
सुबह 4 बजे के बाद हाइवे पर लंबा जाम
छात्रों के सड़क पर बैठने के बाद दोनों दिशाओं में वाहनों की कतारें लगनी शुरू हो गईं। जालंधर से फगवाड़ा और आगे लुधियाना-चंडीगढ़ की तरफ जाने वाले तथा दूसरी ओर फगवाड़ा से जालंधर आने वाले वाहन प्रभावित हुए।
जाम में कितने लोग और वाहन फंसे?
हाइवे पर दोनों तरफ लंबी कतारें लगीं और यातायात को वैकल्पिक रास्तों से भेजना पड़ा।
दोपहर 3 बजे एंबुलेंस भी जाम में फंसी
प्रदर्शन के दौरान एक एंबुलेंस भी जाम में फंस गई। बाद में पुलिस ने रास्ता बनाकर उसे वहां से निकलवाया। इससे हाईवे जाम के कारण आवश्यक सेवाओं पर पड़े असर का भी पता चलता है।
सुबह 9 बजे ट्रैफिक डायवर्ट किया गया
हाईवे पर प्रदर्शन जारी रहने के कारण अमृतसर-जालंधर की तरफ से आने वाले यातायात को जालंधर के पास रामा मंडी से डायवर्ट किया गया। वहीं लुधियाना-चंडीगढ़ की तरफ से आने वाले वाहनों को फगवाड़ा बाईपास की ओर से वैकल्पिक मार्ग पर भेजा गया।
सुबह करीब 8.30 बजे जालंधर-फगवाड़ा हाईवे पर यातायात खुलना शुरू
आपके मौके के इनपुट के अनुसार करीब 8:30 बजे के बाद हाईवे पर यातायात सामान्य होना शुरू हुआ। इस हिसाब से करीब 4 बजे से 8.30 बजे तक लगभग साढ़े चार घंटे हाईवे पर प्रमुख अवरोध रहा। इसके बाद रात 6.30 बजे तक हाईवे जाम था।
सुबह 9 बजे के बाद पुलिस ने छात्रों से बातचीत शुरू की
पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की और उनकी शिकायतें सुनीं। एसएसपी गौरव तूरा ने पुलिस ने छात्रों की समस्याएं सुनीं और उन्हें हल करने का प्रयास किया। उन्होंने स्थिति को नियंत्रण में बताया।
