जागरण संवाददाता, पठानकोट। सिविल अस्पताल के फीमेल वार्ड में भर्ती 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला पिछले पांच माह से हर शख्श में अपनों को ढूंढने की कोशिश कर रही है। उसे आशा है कि उसका बेटा एक दिन उसे लेने यहां जरूर आएंगे। दरअसल, पांच महीने पहले पटेल चौक निवासी ज्ञानो देवी को इकलौता बेटा सोनू इलाज के बहाने यहां लेकर आया था। मां को भर्ती करवाने के बाद वह कभी लौटकर नहीं आया। न ही किसी रिश्तेदार ने उनकी सुध ली। फिर भी ज्ञानो देवी टकटकी लगाकर उसे ढूंढती रहती हैं। प्रशासन ने भी इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है, अधिकारियों को अभी भी शिकायत का इंतजार है।

ज्ञानो देवी (62) काफी कमजोर हैं। बोलते-बोलते हांफने लगती हैं। पंजाबी में बात करती हैं। चिकित्सकों के अनुसार कमजोरी की वजह से ऐसा हो रहा है। समय पर खाने पीने से वह पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगी। ज्ञानो देवी बताती हैं कि पांच माह पहले उनका बेटा सोनू इलाज के लिए उन्हें यहां लेकर आया था। उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। डाक्टरों ने कहा है कि अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं और घर जा सकती हैं, लेकिन घर से कोई लेने के लिए नहीं आ रहा है। ज्ञानो देवी को घर का रास्ता पता नहीं है। केवल यह याद है कि उनका घर पटेल चौक के आसपास है। ज्ञानो देवी बताती हैं कि उसे अस्पताल में रहने के लिए एक बेड दिया गया है। वे यहां पर बहुत दुखी हैं। उनका गुजारा भी बहुत मुश्किल से होता है। खाना वे गुरुद्वारा या उन्हें कोई दे जाए तो खा लेती हैं। उनका कहना है कि बेटा उन्हें यहां छोड़कर अपने ससुराल चला गया है।

सीएमओ बोले- मुझे जानकारी नहीं, पता करते हैं

मामले के बारे में सीएमओ डा. हरविंदर सिंह ने कहा है कि 5 माह से बुजुर्ग महिला भर्ती है, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। इसका पता करते हैं। इसके बाद अगली कार्रवाई करेंगे। वहीं, सीटी थाना प्रभारी कुलवंत सिंह ने बताया कि 4 दिन पहले उन्होंने चार्ज लिया है। अभी कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में लगे हुए हैं। उन्हें इस बारे में कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

मां का भी बेटे की कमाई पर हक: एड. अशोक परासर

इस बारे में बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट अशोक पराशर का कहना है कि किसी भी महिला का उसके पति की पुश्तैनी जायदाद पर हक है। बेटा या बहू उसे घर से बाहर नहीं निकाल सकते। यहां तक कि कोई मां अगर चाहे तो अपने बच्चे से जीवन निर्वाह के लिए राशि की मांग कर सकती है। यह पुलिस ओर प्रशासन का काम है कि महिला के घर का पता लगाए। आज के दौर में यह काफी आसान है। आधार कार्ड से इसकी जानकारी मिल सकती है। अस्पताल में भर्ती करवाते समय पता लिखाया गया होगा। मोबाइल नंबर भी होगा। अगर गलत लिखाया गया होगा तो यह भी जुर्म है। इसके लिए किसी न किसी को आगे आना होगा।

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Edited By: Pankaj Dwivedi