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300-350 रुपये किलो का पनीर खरीद रहे हैं तो सावधान! फिरोजपुर में 11 सैंपल फेल, ऐसे करें असली-नकली की पहचान

Published: Fri, 11 Sep 2026 02:47 PM (IST)

फिरोजपुर में 2026 में अब तक पनीर के 25 सैंपल लिए गए, जिनमें 11 फेल मिले। सस्ते पनीर में मिलावट की आशंका के बीच घर में करें जांच।

ये एक प्रतीकात्मक तस्वीर है।

ये एक प्रतीकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. फिरोजपुर में 25 पनीर सैंपलों में से 11 फेल पाए गए।

  2. पंजाब ने एनालॉग पनीर के निर्माण पर एक साल की रोक लगाई।

  3. नकली पनीर में डिटर्जेंट, वनस्पति तेल जैसे हानिकारक पदार्थ मिले।

कपिल सेठी, फिरोजपुर। बाजार में 300 से 350 रुपये किलो बिक रहा पनीर अब सिर्फ सस्ता सौदा नहीं, बल्कि उपभोक्ता की सेहत के लिए बड़ा सवाल बन गया है। जब दूध, श्रम, प्रसंस्करण, भंडारण और परिवहन की लागत जुड़ती है तो सामान्य पनीर के मुकाबले बेहद कम कीमत पर बिकने वाला उत्पाद संदेह पैदा करता है।

सवाल यह है कि इतनी कम कीमत में पनीर आखिर बन कैसे रहा है? क्या इसमें दूध की जगह वनस्पति तेल या वसा जैसे गैर-डेयरी पदार्थ तो नहीं मिलाए जा रहे? पंजाब सरकार ने इसी गंभीरता को देखते हुए 20 अगस्त के आदेश के तहत एनालाग यानी गैर-डेयरी पनीर के निर्माण, प्रसंस्करण, पैकिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर पूरे राज्य में एक साल की रोक लगाई है।

आदेश में साफ किया गया है कि ऐसे उत्पाद को ‘पनीर’ के नाम से बाजार में बेचना कानून के दायरे में कार्रवाई को आमंत्रित करेगा। विभाग को डेयरी इकाइयों, पनीर निर्माण इकाइयों, थोक विक्रेताओं, वितरकों, खुदरा दुकानों, कोल्ड स्टोर और गोदामों की नियमित व औचक जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। पनीर ढोने वाले वाहनों तथा होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और कैटरिंग संस्थानों में पनीर की खरीद के रिकार्ड भी जांचने को कहा गया है।  

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सैंपल हो रहे फेल

वहीं जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से पनीर की जांच को लेकर लिए गए सैंपलों की बात करें तो वर्ष 2025 में जनवरी से अगस्त 2026 तक पनीर के कुल 56 सैंपल लिए गए जिसमें से 19 सैंपल फेल पाए गए । इसमें वर्ष 2025 में कुल 31 सैंपल लिए गए जिसमें से 8 सैंपल फेल पाए गए व 23 पास तो वर्ष 2026 में अब तक कुल 25 सैंपल लिए गए जिसमें से 11 फेल पाए गए तो 14 सैंपल सही पाए गए ।  

नमूना फेल, दुकानदार पर सिर्फ चेतावनी नहीं

खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा लिया गया नमूना प्रयोगशाला में भेजा जाता है। रिपोर्ट में पनीर घटिया मानक का पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 51 के तहत पांच लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। गलत लेबल या भ्रामक तरीके से बेचने पर अलग कार्रवाई का प्रावधान है।

यदि उत्पाद असुरक्षित पाया जाता है तो धारा 59 के तहत मामला और गंभीर हो जाता है । इसमें तीन महीने तक की सजा और तीन लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है ।

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सेहत विभाग ने चलाया अभियान

वहीं इस संबंध में बात करने पर फूड सेफ्टी अधिकारी अभिनव खोसला ने कहा कि जिलेभर में लोगों को अच्छे खाद्य पदार्थ मुहैया करवाने को लेकर लगाकार कार्रवाई की जा रही है । इसी कड़ी में दूध व दूध से बने पदार्थों को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है व लगातार चेकिंग की जा रही है।

जहां कहीं भी पनीर इत्यादि में किसी तरह की गड़बड़ की संभावना लगती है वहां से सैंपल लेकर जांच के लिए लैब में भेजे जा रहे हैं व रिपोर्ट आने पर उनके खिलाफ बनती कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है ।

असली दिखाने के लिए मिलाते हैं डिटर्जेंट

डिटर्जेंट पनीर में वनस्पति तेल, पाम आयल, सोया, मिल्क पाउडर, स्टार्च और अन्य पदार्थों के साथ डिटर्जेंट व अन्य रसायनों के इस्तेमाल किए जाते हैं। जिनका उद्देश्य पनीर को सफेद, मुलायम और असली जैसा दिखाना होता है।

स्वास्थ्य पर बुरा असर

  • डिटर्जेंट और अनधिकृत रसायनों से बने पनीर से पेट में जलन, उल्टी और दस्त
  • बार-बार सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा

ऐसे करें पहचान (How To Identify Fake Paneer)

  • पनीर में साबुन या रसायन जैसी गंध
  • असामान्य स्वाद या बहुत ज्यादा चिकनापन
  • बहुत ज्यादा सफेद, असामान्य रूप से मुलायम या रबर जैसा
  • पैकेट वाला पनीर खरीदते समय लेबल, सामग्री और निर्माता की जानकारी जरूर देखें

आयोडीन की जांच

आयोडीन से घर पर पनीर में स्टार्च की मिलावट की जांच की जा सकती है। पनीर को पानी में उबालकर ठंडा करने के बाद आयोडीन डालने पर नीला रंग आने पर स्टार्च होने की आशंका होती है। हालांकि यह जांच डिटर्जेंट की नहीं है। पर, इससे डिटर्जेंट की भी शंका का समाधान किया जा सकता है। डिटर्जेंट की पक्की पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही हो सकती है।

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