फाजिल्का के 7 गांवों में नेताओं की नो एंट्री, विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का एलान; जमीन के उचित मुआवजे की मांग
फाजिल्का के सात गांवों की पंचायतों ने आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का एलान किया है। ग्रामीण 2700 एकड़ जमीन के मुद्दे पर उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

पंजाब के गांवों में लगाए जा रहे बोर्ड।
HighLights
फाजिल्का के सात गांवों ने विधानसभा चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया।
गांवों के प्रवेश द्वार पर नेताओं की नो एंट्री के बोर्ड लगाए।
ग्रामीण अपनी जमीन के लिए उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
राज नरूला जागरण, अबोहर। पंजाब के फाजिल्का जिले में सात गांवों की पंचायतों ने आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का एलान कर सियासी हलचल बढ़ा दी है। पंचायतों ने गांवों के प्रवेश द्वार पर नेताओं की नो एंट्री के बोर्ड लगा दिए हैं। शुक्रवार को सभी गांवों के सरपंच, ब्लाक समिति अध्यक्ष और गणमान्य लोग फिर सीड फार्म पुल के नीचे एकत्रित हुए और हाथों पर काली पट्टियां बांधकर रोष जताया।
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर वे कई बार सरकार के सामने आवाज उठा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण उन्हें चुनाव बहिष्कार जैसा कड़ा फैसला लेना पड़ा है।

पंचायत के बुलावे पर पहुंचे गांव वासी।
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जानें किन गांवों में हुआ बहिष्कार का एलान
चुनाव बहिष्कार का फैसला लेने वाले गांवों में सीड फार्म पक्का, सीड फार्म कच्चा, अजीत नगर, बाबा जीवन सिंह नगर, बाबा कर्म सिंह नगर, ढाणी कड़ाका सिंह और उधम सिंह नगर शामिल हैं। पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार इन गांवों के सरपंच आम आदमी पार्टी से जुड़े हैं, इसके बावजूद उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ।
शुक्रवार को सीड फार्म कच्चा में पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। गांवों में लगाए गए बोर्डों पर भी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का संदेश दिया गया है।
पाकिस्तान से उजड़कर आए थे बुजुर्ग
पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि उनके बुजुर्ग भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय पाकिस्तान से उजड़कर यहां पहुंचे थे। उन्होंने मेहनत करके 2700 एकड़ से अधिक जमीन को आबाद किया और यहीं अपने घर बसाए। अब ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार उन्हें इस जमीन से बेदखल करना चाहती है।
उनका कहना है कि वे पीढ़ियों से इस जमीन पर रह रहे हैं। जब तक उचित मुआवजा नहीं दिया जाता, वे अपने घर और जमीन छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
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अपील: गांवों में न करें कोई कार्यक्रम
ग्रामीणों ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से गांवों में कोई कार्यक्रम नहीं करने की अपील की है। उनका कहना है कि सभी पार्टियों के लिए बातचीत के दरवाजे खुले हैं। सातों सरपंचों को बुलाकर उनकी समस्या सुनी जाए और समाधान किया जाए। ग्रामीणों ने कहा कि जो राजनीतिक दल उनकी मांगों का समाधान करेगा, उसी के पक्ष में मतदान करने पर विचार किया जाएगा।
