नेत्रहीन कर्मचारियों का पंजाब सचिवालय के सामने ढोल बजाकर प्रदर्शन, बोले- यह अधिकार हैं, रहम की भीख नहीं
नेत्रहीन और दिव्यांग संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर सचिवालय के बाहर ढोल बजाकर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने आरक्षित पदों को भरने और पेंशन बढ़ाने की प्रमुख मांग उठाई।
HighLights
पंजाब सचिवालय में नेत्रहीन और दिव्यांग संगठनों का प्रदर्शन।
प्रमुख मांगें: रिक्त पद भरना और सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाना।
संगठन बोले, मांगें संवैधानिक अधिकार हैं, रहम की भीख नहीं।
रमनजीत सिंह मणकू, चंडीगढ़। पंजाब के नेत्रहीन और दिव्यांग संगठन ने अपनी मांगें पूरी न होने पर आज, शुक्रवार फिर सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड पंजाब ब्रांच और भारत नेत्रहीन सेवक समाज लुधियाना के नेतृत्व में नेत्रहीन प्रदर्शनकारी आज पंजाब सचिवालय चंडीगढ़ पहुंचे और ढोल बजाकर सरकार के खिलाफ रोष जताया। ऐसा ही प्रदर्शन बीते 6 अक्तूबर को भी किया गया था।
संगठन कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र भेजकर छह अक्टूबर तक मांगें पूरी करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि मांगें न मानी गईं तो मुख्यमंत्री आवास, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर की सरकारी रिहायश सहित सचिवालय में ढोल बजाकर प्रदर्शन करेंगे।
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तय समय में कार्रवाई न होने पर आज वे फिर सचिवालय पहुंचे। संगठनों का आरोप है कि वे पिछले साढ़े चार साल से मांगपत्र दे रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
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कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
- नेत्रहीन वर्ग के लिए आरक्षित खाली पदों को विशेष भर्ती अभियान चलाकर भरना।
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 1500 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये करना।
- नेत्रहीन सरकारी कर्मचारियों को बिना भेदभाव समय पर पदोन्नति देना।
- दिवंगत नेत्रहीन संगीत शिक्षक जसपाल सिंह के नेत्रहीन बेटे को तरस के आधार पर नौकरी देना।
- लुधियाना के जमालपुर स्थित नेत्रहीनों के एकमात्र सरकारी स्कूल को 12वीं तक अपग्रेड कर शिक्षा विभाग के अधीन लाना और कैंपस में चल रहे दफ्तरों को शिफ्ट करना।
- सभी लंबित अर्जियों का निपटारा और पंजाब में स्थायी दिव्यांग कमिश्नर की नियुक्ति।
संगठनों ने कहा कि ये मांगें रहम की भीख नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार हैं और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
