IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले के मास्टरमाइंड रिभव को नहीं मिली जमानत, विदेश भागने के मंसूबों पर फिरा पानी
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट घोटालों के मास्टरमाइंड रिभव ऋषि को सीबीआई कोर्ट ने जमानत ...और पढ़ें

करोड़ों के बैंक घोटाले का मास्टरमाइंड रिभव ऋषि।
HighLights
स्मार्ट सिटी, क्रेस्ट घोटालों में जमानत नहीं मिली।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने भी किया जमानत का विरोध।
रिभव के पास यूएई का अस्थायी रेजिडेंट कार्ड मिला।
विदेश भागने की फिराक में था रिभव ऋषि, उसके पास था यूएई का रेजिडेंट कार्ड
- स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट घोटालों में आरोपित है आइडीएफसी बैंक का पूर्व ब्रांच मैनेजर
- कोर्ट ने दोनों मामलों में जमानत देने से किया इनकार
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम के सरकारी खातों से करीब 200 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मास्टरमाइंड रिभव ऋषि को सीबीआई कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। इससे रिभव के विदेश भागने के मंसूबों पर पानी फिर गया है।
आईडीएफसी बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव की जमानत अर्जी का बैंक ने भी विरोध किया है और कहा कि अगर उसे जमानत मिली तो वह विदेश भाग सकता है। सीबीआई को जांच के दौरान उसके पास से यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) का एक टेम्परेरी रेजिडेंट आइकार्ड मिला है जोकि उसे इन्वेस्टर के तौर पर जारी किया गया था।
यह कार्ड 27 जनवरी 2026 से 26 जनवरी 2028 तक वैध है। इस आधार पर बैंक ने उसकी जमानत अर्जी खारिज करने की मांग की। अदालत ने भी इन दलीलों को गंभीरता से लिया और जमानत अर्जी रद कर दी।
339.89 करोड़ के लेनदेन, 77.91 करोड़ का नुकसान
सीबीआई के मामले के अनुसार क्रेस्ट घोटाले में सरकारी खातों से कुल करीब 339.89 करोड़ रुपये के अनधिकृत लेनदेन हुए थे। इनमें से करीब 287.27 करोड़ रुपये वापस खातों में जमा हुए, जबकि करीब 77.91 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
अदालत ने कहा कि जांच में रकम की आगे की लेयरिंग और अंतिम लाभार्थियों का पता लगाने की कार्रवाई अभी जारी है। ऐसे में जमानत पर बाहर आने के बाद आरोपित जांच को प्रभावित कर सकता है।
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शेल कंपनियां बनाकर किया घोटाला
सीबीआई के सरकारी वकील नरेंद्र सिंह ने भी जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि आरोपित ने कई शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों का घोटाला किया। यह शेल कंपनियां उसने अपने जानकार और परिवार के लोगों के नाम पर बनाई थीं। इन शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों का ट्रांजक्शन हुआ। आरोपित के निजी खातों में भी काफी बड़ी रकम आई थीं।
