कैंसिल चेक से निकाले 10 करोड़, बिना खाते 30 फर्जी ट्रांजेक्शन...हरियाणा के छह IAS अफसरों के खिलाफ चार्जशीट में खुलासा
सीबीआई की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। छह आईएएस अधिकारियों सहित कई लोगों पर ...और पढ़ें

आईएएस अफसरों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट में बड़ा खुलासा। (एआई जनरेटेड फोटो)
HighLights
18.46 करोड़ की फर्जी एफडी भी निकाली गई।
सीबीआई की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में खुलासा।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े बैंक खातों में खेल।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। हरियाणा के सरकारी विभागों के बैंक खातों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर निकासी के मामले में सीबीआई की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में बैंकिंग प्रक्रिया और सरकारी धन की निगरानी से जुड़े कई चौका देने वाले खुलासे हुए हैं।
छह आइएएस अधिकारियों मोहम्मद शाईन, साकेत कुमार, आरके सिंह, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग, पंकज अग्रवाल पर विभिन्न धाराओं के तहत दाखिल चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ है।
चार्जशीट के मुताबिक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एक निजी बैंक में रखे सरकारी खातों से करीब 160.85 करोड़ रुपये की 30 कथित फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शन की गईं। जबकि संबंधित शाखाओं में सरकारी खाते थे ही नहीं। यही नहीं कैंसिल चेक को लगाकर 10 करोड़ रुपये निकाल लिए गए।
फर्जी चेक, जाली हस्ताक्षरों से भुगतान
सीबीआई के मुताबिक जांच के दौरान फर्जी चेक, कथित जाली हस्ताक्षर, फर्जी डेबिट नोट, गलत बैंकिंग रिकॉर्ड और रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं।
चार्जशीट में एयू स्माल फाइनेंस बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक चरनजीत सिंह रंधावा को 37वें आरोपित के तौर पर नामजद किया है। निदेशक पंचायत एमएमजीएवाई 2.0 के खाते से हुई 14 कथित फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शन में जाली चेक और डेबिट नोट इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
8 से 25 करोड़ तक के भुगतान का जिक्र
चार्जशीट के अनुसार 16 अक्टूबर 2025 को 8 करोड़ रुपये, 4 नवंबर को 25 करोड़ रुपये और 15 नवंबर को 2.25 करोड़ रुपये कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ट्रांसफर किए गए।
सीबीआई ने बैंक की एसओपी का हवाला देते हुए कहा है कि बड़े लेनदेन में हस्ताक्षर, चेक की वैधता, यूवी फीचर समेत निर्धारित जांच प्रक्रिया पूरी की जानी थी।
जांच एजेंसी के अनुसार एयू बैंक खाते से निकाली गई रकम का एक हिस्सा स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स समेत अन्य खातों में पहुंचा। चार्जशीट में 15 जनवरी 2026 को करीब 25.33 करोड़ रुपये स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से आगे एक अन्य खाते में ट्रांसफर किए जाने का उल्लेख है।
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18.46 करोड़ की फर्जी एफडी
मामले में सरकारी विभाग को 18.46 करोड़ रुपये की ऐसी एफडी से संबंधित दस्तावेज भेजे जाने का भी आरोप है, जो आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में बनाई ही नहीं गई थी। चार्जशीट के अनुसार 23 जनवरी 2026 के एक पत्र में 11 एफडी के फर्जी विवरण तैयार कर विभाग को भेजे गए।
सीबीआई का आरोप है कि बैंक के एक कर्मचारी ने तत्कालीन बैंक अधिकारियों के निर्देश पर यह पत्र ई-मेल के माध्यम से संबंधित विभाग को भेजा। जांच में बैंक अधिकारियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट और ई-मेल को भी अहम डिजिटल साक्ष्य बताया गया है।
प्रदूषण बोर्ड खाते से 187 करोड़ के फर्जी डेबिट
चार्जशीट के एक अन्य हिस्से में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खाते से कुल 47 फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शन में 187.26 करोड़ रुपये की निकासी और पांच क्रेडिट ट्रांजेक्शन में 17.90 करोड़ रुपये की राशि का उल्लेख है। फर्जीवाड़ा इतना था कि एक अन्य सरकारी खाते से कैंसिल चेक के जरिए ही 10 करोड़ रुपये निकाल लिए गए।
