"पुराने जख्म न कुरेदें..." ‘सतलुज’ फिल्म और बंदी सिंहों की रिहाई पर रवनीत बिट्टू का हमला
बेअंत सिंह की पुण्यतिथि पर रवनीत सिंह बिट्टू ने ‘सतलुज’ फिल्म और बंदी सिंहों के मुद्दे पर बयान देते हुए पंजाब में फिर अशांति नहीं फैलाने की अपील की।

पूर्व सीएम व अपने दादा बेअंत सिंह को श्रद्धांजलि देने पहुंचे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू।
HighLights
रवनीत बिट्टू ने 'सतलुज' फिल्म का किया विरोध।
बंदी सिंहों की रिहाई पर उठाए गंभीर सवाल।
पंजाब को हिंसा के दौर में न धकेलने की चेतावनी।
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 31वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा के बाद केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब के पुराने दौर, बंदी सिंहों और फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पंजाब पहले ही हिंसा का दौर देख चुका है और अब ऐसा माहौल दोबारा नहीं बनना चाहिए।
‘सतलुज’ फिल्म को लेकर अपने पुराने रुख का जिक्र करते हुए बिट्टू ने कहा कि जब फिल्म को लेकर चर्चा चल रही थी, तब उन्होंने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि पुराने जख्मों को दोबारा नहीं कुरेदना चाहिए।
रवनीत बिट्टू ने कहा-
जब पूरा मीडिया उन्हें हीरो बना रहा है, तो हर कोई सब कुछ भूल जाता है क्योंकि कोई भी इतिहास को नहीं देखता। मैं ही था जिसने 'सतलुज' फिल्म का विरोध किया था। मैंने कहा था कि नहीं, पुरानी बातों को मत दिखाओ, इस जख्म को मत कुरेदों। लेकिन उस समय यह बात आगे बढ़ी। क्या आज किसी को वह फिल्म याद है? एक मिनट। हर किसी ने वह फिल्म देखी थी। क्या आज किसी को 'सतलुज' फिल्म याद है?... माहौल बिगड़ चुका है। मुझे लगता है कि पंजाब में माहौल फिर से वैसा ही राजनीतिक हो जाएगा जैसा 1989 में, 1992 से पहले था...
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बंदी सिंहों की रिहाई पर भी उठाए सवाल
बंदी सिंहों की रिहाई और पैरोल के मुद्दे पर भी बिट्टू ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पंजाब में ऐसे लोगों को लेकर चर्चा होती है, जिन पर गंभीर हिंसक घटनाओं में शामिल होने के आरोप रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब को यह भी देखना चाहिए कि हिंसा के दौर में कितने परिवारों ने अपनों को खोया।
बिट्टू ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले मानवीय आधार पर बंदी सिंह जगतार सिंह हवारा की पैरोल के लिए राज्यपाल से संपर्क किया था।
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दिल्ली में बम धमाका किसने किया
बिट्टू ने कहा कि सिर्फ इतना कहना चाहते हैं कि पंजाब को फिर से आग में न धकेला जाए। पहले ही सब कुछ खो चुके हैं। आज भी तैयार हैं, लेकिन हम क्या कर सकते हैं जब पंजाब खुद यही चाहता है?
पंजाब उन्हें चाहता है जो बड़े कातिल हैं, जो सुरंगे बनाकर भाग निकलते हैं, जो बाहर आकर यह दावा करते हुए फर्जी शादियां करते हैं कि वे कनाडा से आए हैं। दिल्ली में बम धमाका किसने किया था?
अगर आप कहते हैं कि सरदार बेअंत सिंह की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वह मुख्यमंत्री थे और बदला लिया गया था, तो जगतार सिंह हवारा से पूछिए कि दिल्ली बम धमाका क्यों किया गया था और वहां इतने सारे लोगों की जान क्यों ली गई थी?"
पंजाब को फिर आग में न झोंकें
बिट्टू ने कहा कि उनका मकसद केवल इतना है कि पंजाब को दोबारा आग में न झोंका जाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य ने पहले ही बहुत कुछ खोया है। उन्होंने मौजूदा माहौल को लेकर आशंका जताते हुए कहा कि यदि परिस्थितियां बिगड़ीं तो पंजाब फिर पुराने राजनीतिक और हिंसक दौर की तरफ जा सकता है।
उन्होंने ‘सतलुज’ के संदर्भ में कहा कि इतिहास को केवल एक नजरिये से देखने के बजाय उस दौर में मारे गए निर्दोष लोगों, पुलिसकर्मियों और अन्य परिवारों की पीड़ा को भी सामने रखा जाना चाहिए। जुलाई में भी बिट्टू ने फिल्म पर सवाल उठाते हुए कहा था कि पंजाब के उग्रवाद के दौर की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
