पंजाब की ममता को 5 साल बाद मिला परिवार, हिमाचल की महिला HAS अधिकारी की संवेदनशील पहल लाई रंग; अपनों को देख छलके आंसू
मंडी जिले के बल्ह उपमंडल प्रशासन ने एसडीएम स्मृतिका नेगी के नेतृत्व में पांच साल से बिछड़ी पंजाब की ममता उर्फ मंजु को उसके परिवार से मिलाया।

ममता की परिवार से बात करवातीं एसडीएम बल्ह।
HighLights
बल्ह प्रशासन ने पांच साल बाद ममता को परिवार से मिलाया।
एसडीएम स्मृतिका नेगी के नेतृत्व में अथक प्रयास रंग लाए।
कपूरथला में परिवार का पता चला, भावुक वीडियो कॉल हुई।
जागरण टीम, नेरचौक (मंडी)। अपनों से बिछड़ने का दर्द वही समझ सकता है, जिसने वर्षों तक परिवार की राह ताकी हो। लेकिन उम्मीद और मजबूत इरादे कभी व्यर्थ नहीं जाते। मंडी जिले के बल्ह उपमंडल प्रशासन की सराहनीय और संवेदनशील पहल से करीब 32 वर्षीय ममता उर्फ मंजु को पांच वर्ष बाद उनके परिवार का पता मिल गया है।
उपमंडलाधिकारी (एसडीएम) बल्ह समृतिका नेगी की अगुवाई में प्रशासनिक टीम ने अथक प्रयास कर पंजाब के कपूरथला में रह रहे ममता के स्वजन को ढूंढ निकाला और वीडियो कॉल के जरिये वर्षों बाद उनकी अपनों से बात करवाई।
ऊना से शुरू हुआ था सफर, मंडी में मिला सहारा
ममता 30 मई 2021 को ऊना जिले में लावारिस हालत में मिली थी। कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे महिला सुधार गृह, चलखा (लूणापानी) भेजा गया था, जहां सुरक्षित आश्रय और नियमित परामर्श दिया गया।
परिवार के बारे में दी थी कुछ जानकारी
काउंसिलिंग के दौरान ममता ने माता-पिता के नाम गुरनैल सिंह और परमजीत कौर बताए थे। साथ ही यह भी साझा किया था कि उनका परिवार पंजाब के कपूरथला जिले के नवा पिंड स्थित जम्मू पैलेस कुष्ठ आश्रम के पास रहता है और उनकी मातृभाषा पंजाबी है।
याददाश्त से जुड़ी समस्या के कारण हो रही थी मुश्किल
याददाश्त से जुड़ी समस्याओं और सीमित संचार माध्यमों के कारण ममता के परिवार तक पहुंचना आसान नहीं था। हालांकि, एसडीएम स्मृतिका नेगी के मार्गदर्शन में बाल विकास परियोजना अधिकारी जितेंद्र सैनी, सबिता चंदा (इंडिया केयर्स), डा. रुमा देवी और डा. परमिंदर सिंह की टीम ने हार नहीं मानी। लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार पंजाब में ममता के स्वजन की तलाश पूरी कर ली गई।
स्क्रीन पर अपनों को देख छलक पड़े आंसू
जब वर्षों से बिछड़ी ममता की वीडियो कॉल के माध्यम से उनके भाई-बहनों और माता-पिता से बात करवाई गई, तो वह भावनात्मक पल बेहद मार्मिक था। मोबाइल स्क्रीन पर अपनों का चेहरा देखते ही ममता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उनकी आंखें छलक पड़ीं। उधर, फोन के दूसरी ओर परिवार के सदस्यों का भी यही हाल था, जो इतने वर्षों बाद ममता की आवाज सुनकर भावुक हो उठे।
