पंजाब कांग्रेस में फिर 2021-22 वाला संकट ? राजा वड़िंग को हटाने का फैसला कहीं 2027 में न पड़ जाए भारी
राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पंजाब कांग्रेस के सामने नए अध्यक्ष का चयन ही नहीं, संगठन संभालने, गुटबाजी कम ...और पढ़ें

पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट और पूर्व पीपीसीसी अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग।
HighLights
राजा वड़िंग का इस्तीफा, 2027 चुनाव से पहले बड़ी चुनौती।
पार्टी में गुटबाजी और नेतृत्व परिवर्तन का इतिहास दोहराया।
नए अध्यक्ष को संगठन और विभिन्न गुटों को संभालना होगा।
डॉ सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पार्टी के सामने सिर्फ नए अध्यक्ष के चयन की चुनौती नहीं है, बल्कि चुनाव से कुछ महीने पहले संगठन को संभालने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की बड़ी परीक्षा भी शुरू हो गई है। हाईकमान ने वड़िंग को हटाने का फैसला ऐसे समय में किया है, जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है।
वड़िंग ने हाईकमान द्वारा बदलाव का फैसला बताए जाने के बाद इस्तीफा दिया है। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर 2021-22 की यादें भी ताजा कर दी हैं। सितंबर 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया और चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसी दौरान प्रदेश कांग्रेस की कमान नवजोत सिंह सिद्धू के पास थी और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर लगातार टकराव चलता रहा।
कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव हुए और कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। 2022 के चुनाव में कांग्रेस सिर्फ 18 सीटों पर सिमट गई, जबकि आम आदमी पार्टी ने 92 सीटें हासिल कीं। हालांकि 2022 की हार को केवल नेतृत्व परिवर्तन से जोड़ना सही नहीं होगा।
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खींचतान व राजनीतिक परिस्थितियां
पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान समेत कई राजनीतिक परिस्थितियां उस चुनाव के नतीजे को प्रभावित करने वाली थीं। फिर भी चुनाव से ठीक पहले नेतृत्व में बड़े बदलाव का अनुभव कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदर्भ जरूर है।
अब 2027 में भी लगभग वैसी ही चुनौती सामने है। वड़िंग करीब साढ़े चार साल तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे और पार्टी के संगठन को चुनावी मोड में ले जाने की कोशिश करते रहे। अब उनके हटने के बाद नए अध्यक्ष को न केवल संगठनात्मक ढांचा संभालना होगा, बल्कि वड़िंग समर्थक नेताओं, चन्नी खेमे और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन भी बनाना होगा।
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चुनौती: 2027 चुनाव और गुटबाजी
वड़िंग के इस्तीफे की खबर ऐसे समय आई है जब पार्टी में गुटबाजी को लेकर महीनों से चर्चा चल रही थी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नेतृत्व परिवर्तन से कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान खत्म होगी या नया विवाद शुरू होगा।
अगर नया नेतृत्व तुरंत संगठन को साथ लेकर चलने में सफल रहता है तो बदलाव का असर अलग हो सकता है, लेकिन यदि अध्यक्ष बदलने के बाद भी गुटों की खींचतान जारी रही तो चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने 2021-22 जैसी अस्थिरता की चर्चा और तेज हो सकती है।
यानी वड़िंग का इस्तीफा सिर्फ एक प्रदेश अध्यक्ष का बदलाव नहीं है। यह 2027 से पहले पंजाब कांग्रेस के लिए संगठन, नेतृत्व और एकजुटता की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है।
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