पंजाब रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल का असर, सरकार हरकत में आई; परिवहन मंत्री ने यूनियन नेताओं को चंडीगढ़ बुलाया
पंजाब में रोडवेज और पनबस कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बसों का चक्का जाम हो गया है। सरकार ने हरकत में आते हुए नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया है।

जालंधर बस स्टैंड पर बसों का इंतजार करते हुए लोग।
HighLights
पंजाब रोडवेज, पनबस, पीआरटीसी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर।
परिवहन मंत्री ने यूनियन नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें: नियमितीकरण और सेवा संबंधी समाधान।
डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़। पंजाब में रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के बाद आखिरकार राज्य सरकार हरकत में आ गई है। अपनी मांगों को लेकर बुधवार को पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के संविदा कर्मचारियों ने सभी डिपो में विरोध प्रदर्शन करते हुए बसों का चक्का जाम कर दिया। प्रदेश में हजारों बसों के चक्का जाम के बाद लोगों को काफी परेशानी का सामना उठाना पड़ रहा है।
इसके बाद परिवहन मंत्री ने कर्मचारी यूनियन के नेताओं को बातचीत के लिए चंडीगढ़ बुलाया है। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। फिलहाल कर्मचारी नेताओं और सरकार के बीच बैठक चल रही है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि बातचीत के दौरान उनकी लंबित मांगों पर कोई ठोस फैसला हो सकता है।
पंजाब रोडवेज, पनबस/पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब की ओर से पहले ही 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का एलान किया गया था। यूनियन का कहना है कि लंबे समय से मांगें उठाने के बावजूद सरकार की ओर से समाधान नहीं किया जा रहा था। इसी कारण कर्मचारियों को हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
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कर्मचारियों की यह हैं प्रमुख मांगें?
यूनियन की प्रमुख मांगों में संविदा कर्मचारियों को नियमित करना, आउटसोर्स कर्मचारियों को ठेके पर लाना और कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द करना शामिल है। इसके अलावा कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं।
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15 अक्टूबर को भी होनी थी बैठक
यूनियन नेताओं के अनुसार, कर्मचारियों की मांगों को लेकर 15 अक्टूबर को भी बैठक प्रस्तावित थी। इसमें प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ होने वाली बैठकों का भी हवाला दिया गया था, लेकिन पंजाब बंद के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद यूनियन ने 21 अक्टूबर से हड़ताल शुरू करने का फैसला किया। यूनियन नेताओं ने पहले ही चेतावनी दी थी कि मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।
अब सभी की नजरें चंडीगढ़ में चल रही बैठक पर टिकी हैं। यदि सरकार और कर्मचारी नेताओं के बीच सहमति बनती है तो बस सेवाएं बहाल होने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, अभी बैठक के नतीजे का इंतजार है। उधर रोडवेज कर्मचारी पहले ऐलान कर चुके हैं कि अगर उनकी बातें नहीं मानी गई तो 22 अक्टूबर से विधानसभा सत्र के दौरान सभी मंत्रियों के खिलाफ उनकी कोठियों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा और सरकार के खिलाफ नारेबाजी होगी।
