विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, CM ऑफिस में CBI जांच के खिलाफ याचिका की सुनवाई कल तक टली

Published: Thu, 08 Oct 2026 12:07 PM (IST)

पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुक्रवार तक टल गई है।

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई टली।

  2. सीएम कार्यालय में सीबीआई जांच के खिलाफ याचिका दायर।

  3. हाईकोर्ट ने ओएसडी राजबीर घुम्मन पर जांच का आदेश दिया।

रोहित कुमार,चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुक्रवार तक टल गई। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई कल की जाएगी, क्योंकि न्यायमूर्ति शील नागू को संबंधित फाइल देर से प्राप्त हुई है।

मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस दत्ता ने कहा कि मामले को कल लिया जाएगा। पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने सीबीआई की ओर से किसी भी तात्कालिक कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश की मांग की। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि जब दूसरे न्यायाधीश को फाइल देखने का अवसर ही नहीं मिला है तो अंतरिम आदेश कैसे पारित किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें- राजोआना को राहत देने के खिलाफ केंद्र, सुप्रीम कोर्ट में कहा- पंजाब के मौजूदा हालात में फैसला अनुकूल नहीं

हाई कोर्ट के आदेश को दी गई है चुनौती

पंजाब सरकार ने सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सीबीआई को आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।

हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस को भी निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। यह आदेश अधिवक्ता निखिल सराफ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

ED के खत को लेकर शुरू हुआ था विवाद

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पंजाब पुलिस को कथित भ्रष्टाचार के संबंध में सूचना दिए जाने के बावजूद पुलिस ने उचित कार्रवाई नहीं की। सुनवाई के दौरान सामने आया था कि ईडी ने नितिन गोहल नामक व्यक्ति से जुड़े आरोपों को भी चिह्नित किया था। आरोप है कि वह पंजाब सरकार से विभिन्न प्रकार के लाभ लेने के इच्छुक लोगों और संबंधित पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में काम करता था।

आरोपों में तबादलों में मदद, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच दिलाने, हथियार लाइसेंस हासिल कराने और अन्य लाभ दिलाने जैसी बातें शामिल हैं। हाई कोर्ट ने उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद सीबीआई को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच के निर्देश दिए थे।

यह भी पढ़ें- पंजाब CM के OSD के घर पर छापामारी, नेताओं ने फूल बरसाकर किया CBI टीम का स्वागत; मामले में भवानीगढ़ के SHO सस्पेंड

चुनाव से पहले राजनीतिक मोड़

मंगलवार को वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और राज्य में चुनाव नजदीक होने के कारण इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश पर भी आपत्ति जताते हुए कहा था कि राज्य पुलिस तभी कार्रवाई करने के लिए बाध्य है, जब उपलब्ध सूचना से संज्ञेय अपराध का खुलासा होता हो।

पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट के विजय मदनलाल चौधरी मामले में दिए गए फैसले के विपरीत बताते हुए चुनौती दी है। मुख्य न्यायाधीश ने मंगलवार को उसी दिन सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की थी, लेकिन गुरुवार को मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर कल सुनवाई होगी।

यह भी पढ़ें- Nana Patekar अलविदा! जब श्री हरिमंदिर साहिब में बर्तनों की सेवा कर बोले थे- 'रब का शुक्र है जीते जी दर्शन हो गए'