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पंजाब में मिलावटखोरों पर कसेगा शिकंजा! मुख्यमंत्री को भेजा गया विधेयक का मसौदा, जाने क्या होंगे बदलाव

Published: Wed, 21 Oct 2026 05:57 PM (IST)

पंजाब में मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए नया विधेयक तैयार किया गया है। पूर्व अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को मसौदा भेजकर सख्त सजा की मांग की है।

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. मिलावट रोकने को नया प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव।

  2. दोषियों को 3-7 साल जेल, भारी जुर्माना संभव।

  3. छोटे कारोबारियों को पंजीकरण में मिलेगी छूट।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब में खाद्य पदार्थों, दवाइयों और कृषि उत्पादों में मिलावट करने वालों पर सख्त कार्रवाई के लिए अलग प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव है। पंजाब सरकार के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू (सेवानिवृत्त) और लुधियाना के पर्यावरण कार्यकर्ता कर्नल जसजीत सिंह गिल (सेवानिवृत्त) ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को पंजाब फूड, फार्मा और कृषि सुरक्षा प्राधिकरण विधेयक, 2026 का मसौदा भेजा है।

उन्होंने इसे विधानसभा के आगामी सत्र में पेश करने का आग्रह किया है। मसौदे में औद्योगिक स्तर पर और संगठित तरीके से मिलावट करने वालों के लिए तीन से सात साल तक जेल और एक करोड़ रुपये या संबंधित माल के मूल्य के तीन गुना तक जुर्माने का प्रावधान है। दोषियों की संपत्ति कुर्क और जब्त करने का प्रस्ताव भी है। ऐसे अपराधों को गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाने तथा उनकी सुनवाई विशेष न्यायालयों में कराने की सिफारिश की गई है।

केबीएस सिद्धू और कर्नल गिल ने नकली पनीर, कृत्रिम घी, रसायनों से तैयार दूध, एफ्लाटॉक्सिन युक्त पशु आहार, नकली कीटनाशक और बीज तथा घटिया दवाइयों को स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया। उनके अनुसार, मिलावट अब छोटी-मोटी धोखाधड़ी नहीं, बल्कि कारखानों और राज्यों तक फैली आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़ी संगठित समस्या है।

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मौजूदा व्यवस्था बिखरी हुई

उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को बिखरा हुआ बताया। स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन और ड्रग्स कंट्रोल विभाग अलग-अलग काम करते हैं; नमूनों की जांच में देरी होती है और दोषियों को सजा मिलने के मामले कम हैं। उनके मुताबिक, बड़ी मछलियां बच निकलती हैं, जबकि ढाबा संचालकों, हलवाइयों और किराना दुकानदारों को निरीक्षण और आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ता है।

मसौदे में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव है। इसे जिला स्तर के फैसले निलंबित करने और सुनवाई के बाद रद्द करने का अधिकार होगा। जिला स्तर पर उपायुक्त-सह-जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में प्राधिकरण बनेगा, जो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों, ड्रग इंस्पेक्टरों और कृषि निरीक्षकों के बीच समन्वय करेगा।

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जानें क्या है इस मसौदे में

  • छोटे कारोबारियों के लिए निशुल्क पंजीकरण, 60 दिन की मोहलत और जांच पर 70 प्रतिशत सब्सिडी का प्रस्ताव है।
  • माल असुरक्षित न हो, वहां जुर्माने की अधिकतम सीमा 20 हजार रुपये रखने की बात कही गई है।
  • निरीक्षण की वीडियो रिकॉर्डिंग, स्वतंत्र गवाह, प्रयोगशाला रिपोर्ट की समय-सीमा का प्रस्ताव है।
  • गलत जब्ती पर मुआवजा, स्वतंत्र अपीलीय न्यायाधिकरण और लोकपाल की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
  • मसौदा तैयार करने वालों ने नागरिकों, व्यापारियों, किसानों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं।

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