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ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट हुए पंजाब के 11 युवा, पूछताछ से खुलेंगे डंकी रूट के राज; फर्जी एजेंट्स पर कसेगा शिकंजा

Published: Thu, 30 Apr 2026 04:22 PM (IST)

आस्ट्रेलिया से लौटे युवाओं से पंजाब पुलिस पूछताछ कर रही है। डंकी रूट और एजेंट नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा ...और पढ़ें

डिपोर्ट युवाओं को लेने पहुंची पंजाब पुलिस।

डिपोर्ट युवाओं को लेने पहुंची पंजाब पुलिस।

HighLights

  1. ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट 15 युवाओं से पूछताछ जारी।

  2. अवैध ट्रैवल एजेंटों और 'डंकी रूट' की जांच।

  3. फर्जी पासपोर्ट, मानव तस्करी पर होगी कार्रवाई।

रोहित कुमार, चंडीगढ़। ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट होकर लौटे युवाओं के जरिए अब अवैध ट्रैवल नेटवर्क की परतें खोलने की तैयारी है। ऑस्ट्रेलिया से लौटे 15 भारतीयों, जिनमें 11 पंजाब के हैं, से पंजाब पुलिस सिलसिलेवार पूछताछ कर रही है। जांच का फोकस इस बात पर है कि ये लोग किन एजेंटों के संपर्क में आए, किस रास्ते (रूट) से विदेश पहुंचे और इसमें किन-किन राज्यों या देशों की कड़ियां जुड़ी हैं।

डिपोर्ट होकर लौटे लोगों में जसवंत सिंह (34), अंगेज सिंह (32), सतिंदरजीत सिंह शेरगिल (31), गुरप्रीत सिंह संधू (30), जगजीत सिंह (35), जसप्रीत सिंह (35), निर्मल सिंह (38), श्रुति शर्मा (35), रणजीत सिंह (35), हरप्रीत सिंह (41) और गगनदीप सिंह (25) शामिल हैं।

पुलिस इन सभी से अलग-अलग बैठाकर पूछताछ कर रही है, ताकि एजेंटों के नाम, भुगतान के तरीके और यात्रा के हर पड़ाव की सटीक जानकारी जुटाई जा सके।

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युवाओं से जानेंगे किसने कराई डील

जांच एजेंसियां खास तौर पर यह जानने में जुटी हैं कि क्या इन युवाओं ने ‘डंकी रूट’ का इस्तेमाल किया, किन देशों के जरिए ट्रांजिट हुआ और फर्जी दस्तावेज या वीजा का सहारा लिया गया या नहीं। सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में एक ही नेटवर्क अलग-अलग नामों से काम करता है, इसलिए पूछताछ के आधार पर कड़ियां जोड़कर बड़े गिरोह तक पहुंचने की कोशिश है।

अमेरिका डिपोर्ट केस बना आधार

फरवरी 2025 में अमेरिका (यूएसए) से डिपोर्ट किए गए भारतीयों के मामले में भी इसी तरह की रणनीति अपनाई गई थी। उस दौरान गठित एसआईटी ने डिपोर्ट होकर लौटे लोगों से मिली जानकारी के आधार पर ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई तेज की थी। 12 फरवरी 2025 तक 10 एफआईआर दर्ज की गई थीं, जो बाद में बढ़ीं।

अमृतसर में 40 एजेंटों के लाइसेंस रद्द किए गए और 1200 से ज्यादा इमीग्रेशन फर्मों पर छापेमारी हुई थी।

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एजेंट नेटवर्क पर कसेगा शिकंजा

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस बार भी रणनीति वही है—डिपोर्ट लोगों के बयान को आधार बनाकर एजेंटों तक पहुंचना। गांव-स्तर तक फैले नेटवर्क, सब-एजेंट्स और हवाला के जरिए होने वाले लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों की एजेंसियों से भी तालमेल किया जाएगा।

यदि जांच में फर्जी पासपोर्ट, धोखाधड़ी, मानव तस्करी या अवैध भुगतान के सबूत मिलते हैं, तो पासपोर्ट अधिनियम-1967, नागरिकता अधिनियम-1955, आयकर अधिनियम-1961 और इमिग्रेशन अधिनियम-1983 के तहत केस दर्ज किए जाएंगे। गंभीर मामलों में जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान है।

सरकार का संदेश साफ है कि डिपोर्ट होकर लौटे युवाओं को केवल पीड़ित मानकर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उनके जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर अवैध तरीके से विदेश भेजने वाले एजेंटों पर निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।

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