पंजाब विधानसभा में डीएपी पर हंगामा, विपक्ष के विरोध के बीच स्पीकर बोले- 'इन्हें सिर्फ खबरें छपवानी हैं'
पंजाब विधानसभा में डीएपी खाद की उपलब्धता और टैगिंग पर भारी हंगामा हुआ। कृषि मंत्री ने सात लाख मीट्रिक टन ...और पढ़ें

हंगामे के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष को शांत करवाते हुए स्पीकर कुलतार सिंह संधवां।
HighLights
पंजाब विधानसभा में डीएपी खाद आपूर्ति पर सत्ता-विपक्ष में तीखी बहस।
कृषि मंत्री ने 7 लाख मीट्रिक टन मांग, 5.33 लाख आपूर्ति बताई।
स्पीकर ने विपक्ष पर 'खबरें छपवाने' का आरोप लगाया।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा में डीएपी खाद की उपलब्धता पर चर्चा के दौरान शुक्रवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच शोर-शराबा होता रहा। विधायक राणा इंद्र प्रताप ने किसानों को डीएपी की आपूर्ति और खाद के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग का मुद्दा उठाया तो कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां सरकार का पक्ष रखने लगे।
इसी दौरान विपक्षी विधायकों की नारेबाजी और सदन में व्यवधान के बीच स्पीकर को बार-बार सदस्यों को अपनी-अपनी सीटों पर बैठने के निर्देश देने पड़े। स्पीकर ने विपक्ष पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इन्हें खबरें छपवानी हैं। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के विधायकों से सदन की मर्यादा बनाए रखने और मंत्री का जवाब सुनने की अपील की।
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7 लाख मीट्रिक टन DAP की मांग का सवाल
राणा इंद्र प्रताप ने डीएपी की उपलब्धता का सवाल उठाया। इसके जवाब में कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए पंजाब में सात लाख मीट्रिक टन डीएपी की मांग का अनुमान लगाया गया है। सरकारी और निजी एजेंसियों के माध्यम से अब तक 5.33 लाख मीट्रिक टन डीएपी किसानों को उपलब्ध कराई गई है। मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
मंत्री के जवाब के दौरान सदन में शोर-शराबा जारी रहा। स्पीकर ने सदस्यों को टोकते हुए कहा कि पंजाब की खेती और किसानों से जुड़ा मुद्दा उठाया जा रहा है। उन्होंने विपक्षी विधायकों से सवाल-जवाब की प्रक्रिया में व्यवधान नहीं डालने और मंत्री को अपनी बात पूरी करने देने की अपील की। हंगामा बढ़ने पर उन्होंने बार-बार सभी सदस्यों को अपनी-अपनी जगह पर बैठने के लिए कहा।
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केंद्र से पत्राचार और कार्रवाई का दिया हवाला
खुड्डियां ने बताया कि डीएपी की आपूर्ति को लेकर केंद्र सरकार के उर्वरक मंत्री को पत्र लिखे गए हैं। मुख्यमंत्री की ओर से भी केंद्र के समक्ष यह मामला उठाया गया है। उन्होंने कहा कि खाद की बिक्री में अनियमितताओं की शिकायतों पर एफआइआर दर्ज की गई हैं और कुछ मामलों में लाइसेंस रद करने की कार्रवाई भी हुई है।
मंत्री ने विधायकों से कहा कि यदि उनके क्षेत्रों में खाद की उपलब्धता या बिक्री को लेकर कोई शिकायत है तो संबंधित कृषि अधिकारियों को इसकी जानकारी दें, ताकि कार्रवाई की जा सके।
बाकी खाद और टैगिंग पर भी मांगा जवाब
राणा इंद्र प्रताप ने पूरक सवाल में पूछा कि सात लाख मीट्रिक टन की अनुमानित मांग के मुकाबले बाकी डीएपी किसानों को कैसे उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने खाद के साथ नैनो यूरिया और यूरिया की टैगिंग का मुद्दा भी उठाया और इसकी मात्रा का ब्योरा मांगा। उन्होंने पोटाश घुलनशील बनाने वाले बैक्टीरिया सहित दूसरे विकल्पों का जिक्र करते हुए कहा कि इनके इस्तेमाल से डीएपी की खपत 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के अपनी-अपनी जगह से बोलने और शोर-शराबे के कारण कार्यवाही बाधित होती रही। स्पीकर ने दोनों पक्षों के सदस्यों को बैठने के निर्देश दिए और कहा कि किसानों से जुड़े सवाल पर चर्चा होने दी जाए। डीएपी की उपलब्धता के मुद्दे पर मंत्री ने सरकार की ओर से आपूर्ति सुनिश्चित करने और केंद्र के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की बात दोहराई।
