'₹1000 प्रति गज मिलेगी जमीन...', ऑपरेशन ब्लू स्टार के पीड़ितों को 42 साल बाद न्याय, HC ने मुआवजा देने का दिया आदेश
ऑपरेशन ब्लू स्टार के 42 साल बाद, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अमृतसर के 133 प्रभावित दुकानदारों को बड़ी राहत दी है।

दाएं- जरनैल सिंह भिंडरावाला (फाइल)
HighLights
ऑपरेशन ब्लू स्टार के 133 पीड़ितों को 42 साल बाद राहत
हाईकोर्ट ने मालमंडी में 1988 के रेट पर जमीन देने का आदेश
पंजाब सरकार द्वारा बढ़ाए गए जमीन के रेट रद्द किए गए
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान अमृतसर में दुकानें और कारोबार उजड़ने के 42 साल बाद 133 पीड़ितों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
वर्षों से अपने हक के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे इन प्रभावित लोगों को अब मालमंडी में वैकल्पिक जगह देने का रास्ता साफ हो गया है।
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि प्रभावितों को 1988 में गलियारा परियोजना के तहत तय किए गए 1000 रुपये प्रति गज के आधार पर जगह उपलब्ध कराई जाए।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की ओर से जमीन के बढ़ाए गए रेट को लेकर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि ये लोग करीब 42 वर्षों से विस्थापन का दंश झेल रहे हैं और सरकार को इनके मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए था। अदालत ने पुराने तय रेट के आधार पर ही वैकल्पिक जगह देने के निर्देश जारी किए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिला हक
पीड़ितों के मुताबिक, लंबे समय तक मामला अलग-अलग स्तरों पर चलता रहा। वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित लोगों को 10 हजार रुपये प्रति गज के आधार पर राशि जमा करवाने का निर्देश देते हुए मामला वापस हाईकोर्ट भेजा था। इसके बाद जनवरी 2020 में 14,450 रुपये प्रति गज के हिसाब से आवंटन का फैसला किया गया।
हालांकि जुलाई 2022 में पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने जमीन का रेट बढ़ाकर 38,400 रुपये प्रति गज कर दिया। इससे 133 पीड़ितों के सामने दोबारा बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई। उन्होंने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर इस बढ़े हुए रेट को कम करने और पुराने आधार पर राहत देने की मांग की।
38,400 रुपये के रेट पर अदालत ने लगाई रोक
पीड़ितों की ओर से अधिवक्ता सौरव खुराना और अन्य वकीलों ने अदालत के समक्ष दलील दी कि इतने लंबे समय से विस्थापित लोगों पर लगातार बढ़ते जमीन के रेट का बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है।
अदालत ने मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए पीड़ितों की मांग स्वीकार कर ली और पुराने निर्धारित रेट के आधार पर वैकल्पिक जगह देने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले से उन 133 परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जो वर्ष 1984 की घटनाओं के बाद से अपने पुनर्वास और संपत्ति से जुड़े अधिकार के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
अब अमृतसर की मालमंडी में वैकल्पिक जगह मिलने की उम्मीद जगी है। 42 वर्षों से लंबित इस विवाद में अदालत का आदेश प्रभावित परिवारों के लिए लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत के रूप में सामने आया है।
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