चंडीगढ़, जेएनएन। पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू सियासत की पिच पर फिर आउट हो गए हैं। यह दूसरा मौका है जब अपने समय के इस धाकड़ बल्‍लेबाज की राजनीति की इनिंग पर ब्रेक लगा है। पहले गुरु की भाजपा के साथ इनिंग समाप्‍त हुई और अब कांग्रेस में कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के कैबिनेट से वह आउट हुए हैं। टीम पंजाब (पंजाब की कांग्रेस सरकार) से सिद्धू के आउट हाेने के कई कारण हैं। इसकी भूमिका पिछले करीब एक-डेढ़ साल से चल रही थी। कैप्‍टन से उनका टकराव पार्टी के तमाम प्रयासों के बाद खत्‍म नहीं हुआ और जानकारों का कहना है कि इससे कांग्रेस को झटका लगा है। दूसरी ओर, सिद्धू की मंत्री की इनिंग समाप्‍त होने से शिअद और बादलों के संग-संग कांग्रेस में गुरु के विरोधी राहत व खुशी महसूस कर रहे हैं। 

शिअद और बादलों के संग-संग कांग्रेस में भी सिद्धू के विराेधी भी खुश

बता दें कि पिछले डेढ़ महीने से नवजोत सिंह सिद्धू के अपना विभाग बदलने जाने के बाद ऊर्जा विभाग का कार्यभार संभालने को लेकर जारी सस्‍पेंस शनिवार को खत्म हो गई। उनको मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी टीम से आउट कर दिया और उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इस पर कुछ ही देर में पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने भी मुहर लगा दी। कैप्टन अमरिंदर ने 6 जून को सिद्धू से स्थानीय निकाय विभाग वापस लेकर उन्हें ऊर्जा विभाग दिया था, लेकिन इससे नाराज सिद्धू ने विभाग नहीं संभाला। अब यह विभाग फिलहाल मुख्यमंत्री के पास ही रहेगा।

 

जानकारी के अनुसार, मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर को सिद्धू ने एक पंक्ति का अपना इस्तीफा भेजा था और इसमेंकोई भी स्पष्टीकरण या इस्‍तीफे का कारण नहीं बताया गया था। बता दें कि सिद्धू ने 10 जून को राहुल गांधी को अपना इस्तीफा भेजा था और 34 दिन बाद 14 जुलाई को इस बारे में ट्वीट कर खुलासा किया था। ट्वीट के साथ उन्होंने वह पत्र भी पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने अपना इस्तीफा राहुल गांधी को भेजा था। इसके बाद उन्होंने फिर से अपने ट्वीट में कहा था कि वह औपचारिक तौर पर अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भेज देंगे। 15 जुलाई को सिद्धू ने कैप्‍टन अमरिंदर को  अपना त्‍यागपत्र भेजा और इसे 20 जुलाई को स्‍वीकार किया गया।

राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल के साथ नवजोत सिंह सिद्धू।

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पांच मुख्य घटनाएं जिन्होंने तय की सिद्धू की विदाई
1. कैप्टन के मना करने के बावजूद सिद्धू पाकिस्तान गए। वहां पाक सेना प्रमुख को गले लगाया।

2. तेलांगना में विधानसभा चुनाव के दौरान प्रेस कॉन्फेंस में कहा था- मेरे कैप्टन तो राहुल गांधी हैं। अमरिंदर तो सेना में कैप्टन थे। इसके बाद भी राजस्‍थान में विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कैप्‍टन अमरिंदर सिंह पर हमले किए।

3. जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले के बाद पाकिस्‍तान को इस मामले में क्‍लीनचिट दिया, जबकि पंजाब विधानसभा में कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने पाकिस्‍तान को इसके लिए जिम्‍मेदार ठहराते हुए उसके खिलाफ केंद्र सरकार से एक्‍शन लेने की मांग की थी। पंजाब विधानसभा ने इस संबंध में प्रस्‍ताव भी पारित किया था। लेनिक, विधानसभा से बाहर आते ही सिद्धू ने पाकिेस्‍तान को क्‍लीनचिट देते हुए कहा कि कुछ लोगों की करतूत के लिए किसी देश को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसके साथ ही उन्‍होंने पाकिस्‍तान से शांति और बातचीत की पैरवी की। इसके लिए वह देशभर में लोगों के निशाने पर आ गए, लेकिन अपने रुख पर कायम रहे।

पत्‍नी के साथ नवजोत सिंह सिद्धू।

4. भारतीय वायुसेना द्वारा गुलाम कश्‍मीर में आतंकी ठिकानों पर किए गए एयर स्‍ट्राइक पर भी सवाल उठाकर सिद्धू लोगों के निशाने पर आ गए। वह इस स्‍ट्राइक में महज कुछ पेड़ों को नुकसान होने की बात कह कर विवाद में आ गए।

5. लोकसभा चुनाव के दौरान पहले तो पंजाब में प्रचार से दूर रहे। बाद में चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सक्रिय हुए तो बठिंडा में आयोजित रैली में कैप्‍टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साध दिया। सिद्धू ने अमरिंदर पर निशाना साधते हुए रैली में कहा, बादलों के साथ मिलीभगत करने वालों को ठोक दो। इससे कांग्रेस को नुकसान हुआ।

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सिद्धू ने अपनी सरकारी कोठी भी खाली की
नवजोत सिंह सिद्धू ने शनिवार को मुख्यमंत्री की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद अपनी सरकारी कोठी भी खाली कर दी। सारा सामान ट्रकों में भर कर शिफ्ट कर दिया गया। वैसे सूत्रों का कहना है कि वह अपना काफी सामान पहले ही ले गए थे।

अकाली, कांग्रेसी च भाजपा नेता खुश
नवजोत सिंह सिद्धू की अपने विरोधियों के साथ-साथ अपनी पार्टी के कई नेताओं के साथ भी कभी नहीं बनी। तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, राणा गुरमीत सिंह सोढी, साधू सिंह धर्मसोत और सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे मंत्री तो उनका अकसर विरोध करते रहे हैं। अकाली दल के नेता भी  खुश हैं, क्योंकि सिद्धू ही एकमात्र नेता थे जो अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल, बिक्रम मजीठिया आदि को आड़े हाथों लेते रहे हैं। उनकी भाजपा से विदाई का बड़ा कारण भी यही रहा था।

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विवादों के गुरु: कांग्रेस में एंट्री से लेकर कैबिनेट से आउट होने तक का सफर

-15 जनवरी, 2017 को कांग्रेस में शामिल हुए। राहुल गांधी के जरिए सीधी एंट्री हुई। कई कांग्रेसी उनके आने से परेशान थे। यहां तक कि कैप्टन अमरिंदर सिंह भी खुश नहीं थे।
-7 मार्च 2017 को पंजाब विधानसभा के चुनाव होने थे। सिद्धू ने जोरदार रैलियों के जरिए अपना अभियान छेड़ा और सबसे ज्यादा मांग वाले प्रचारक बन गए। कांग्रेस 77 सीटें लेकर सत्ता में आई इसका बड़ा श्रेय सिद्धू को भी मिला।


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-कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में तीसरे नंबर पर रखा और स्थानीय निकाय विभाग के साथ पर्यटन व सांस्कृतिक मामले विभाग भी दिया।
-सबसे पहला विवाद 7 मई 2018 उस समय शुरू हुआ जब सिद्धू ने तेलंगाना के मॉडल को अपनाने की जिद की। वह खुद अफसरों के जाकर मिले।
-माइनिंग पॉलिसी बनाने की जिम्मेदारी कैबिनेट सब कमेटी की लगाई गई, लेकिन उनसे चर्चा किए बगैर सिद्घू ने मीडिया में जारी कर दी। इसका हश्र यह हुआ कि यह पॉलिसी आज तक लागू नहीं हो पाई। सिद्धू के इस व्यवहार पर ग्रामीण विकास मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने नाराजगी भी व्यक्त की
-18 अगस्त, 2018 को जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में उन्हें बुलाया तो नवजोत सिंह सिद्धू ने पाक आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा को गले लगाया। यह तस्वीरें मीडिया में वायरल होते ही सिद्धू निशाने पर आ गए। यही नहीं, इस समारोह में जाने के लिए सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की सलाह को भी नजरंदाज किया।
- कैप्टन के मना करने के बावजूद एक बार फिर नवजोत सिंह सिद्धू करतारपुर कॉरिडोर की नींव रखने के लिए पाकिस्तान के बुलावे पर वहां गए। वहां से लौटने के बाद जब मीडियाकर्मियों ने उनसे पूछा तो सिद्धू ने कहा था कि वह राहुल की इजाजत से ही पाकिस्तान गए थे। यहीं से कैप्टन और सिद्धू के रिश्तों में दूरियां बढऩे लगीं।
-30 अगस्त, 2018 को नवजोत सिंह सिद्धू ने कैप्टन के खिलाफ एक और बयान देकर कि उनके कैप्टन तो राहुल हैं, अमरिंदर सिंह तो सेना के कैप्टन रहे हैं।
-लोकसभा चुनाव के दौरान अप्रैल महीने से लेकर मई 2019 तक नवजोत सिद्धू ने पूरे देश में प्रचार किया, लेकिन वह पंजाब में केवल दो दिन के लिए आए। वह भी केवल बठिंडा और गुरदासपुर सीटों पर।
-बठिंडा में उन्होंने अपनी सरकार के खिलाफ ही बयान देकर हवा दे दी और स्टेज से सीधा कहा कि जिन लोगों की अकालियों के साथ मिलीभगत है, उन्हें जनता हराकर बाहर भेजे।
-लोकसभा चुनाव के दौरान सिद्धू ने अपनी पत्नी के लिए टिकट मांगा था, जो उन्हें नहीं मिला। वहीं अमरिंदर सिंह की पत्नी को लोकसभा चुनाव के लिए टिकट मिल गया था। इसको लेकर भी सिद्धू में नाराजगी थी।
-मई 2019 में जब पूरे देश में कांग्रेस हारी और पंजाब में आठ सीटें आईं तो पहली बार कैप्टन अमरिंदर सिंह सिद्धू के खिलाफ खुलकर आए और उन्हें 'नॉन परफॉर्मर मिनिस्टर' कहा। यह भी संकेत दिए कि उनका महकमा बदला जाएगा।
-6 जून 2019 को उन्होंने ऐसा किया भी । सिद्धू को स्थानीय निकाय से हटाकर बिजली विभाग दे दिया।
-जून 2019 में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने अपनी सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में तेजी लाने के लिए आठ सलाहकार समूहों का गठन किया, लेकिन उनमें नवजोत सिंह सिद्धू को शामिल नहीं किया गया है।
-सिद्धू का इस्तीफा भी विवादों में रहा। सिद्धू ने अपना इस्तीफा कैप्टन की बजाय पहले राहुल गांधी को भेजा। फिर 34 दिन बाद सार्वजनिक कर कैप्टन भी इस्तीफा भेजा, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया।

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Posted By: Sunil Kumar Jha