नशा, बेअदबी और 1158 प्रोफेसर भर्ती... प्रगट सिंह के कांग्रेस प्रधान बनते ही AAP ने खोली पुरानी फाइल; उठाए कई गंभीर सवाल
पंजाब कांग्रेस की कमान संभालने के बाद आम आदमी पार्टी ने प्रगट सिंह के पुराने राजनीतिक सफर और मंत्री के तौर पर किए गए कामकाज पर सवाल उठाए हैं।
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प्रगट सिंह के कांग्रेस प्रधान बनते ही AAP ने खोली पुरानी फाइल। फाइल फोटो
HighLights
आप ने प्रगट सिंह के अकाली दल में रहते चुप्पी पर सवाल उठाए।
शिक्षा मंत्री रहते 1158 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती पर सवाल खड़े किए।
खेल मंत्री के रूप में कम खेल बजट पर भी प्रगट सिंह को घेरा।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस की कमान प्रगट सिंह को मिलते ही आम आदमी पार्टी (आप) ने उनके पुराने राजनीतिक सफर और मंत्री के तौर पर किए गए कामकाज को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आप के वरिष्ठ नेता एवं वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रगट सिंह को अकाली दल में रहते नशे और बेअदबी के मुद्दे पर कथित चुप्पी से लेकर शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में 1158 असिस्टेंट प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों की भर्ती तथा खेल मंत्री रहते खेल बजट तक पर घेरा।
चीमा ने कहा कि कांग्रेस प्रधान बनने के बाद प्रगट सिंह को अपने राजनीतिक और मंत्री के तौर पर लिए गए फैसलों पर जवाब देना होगा। चीमा ने कहा कि अकाली दल-भाजपा सरकार के दौरान नशा और बेअदबी पंजाब के सबसे बड़े राजनीतिक मुद्दों में शामिल थे।
इसके बावजूद अकाली दल का हिस्सा रहते प्रगट सिंह ने इन मुद्दों के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर आवाज क्यों नहीं उठाई, इसका जवाब पंजाब की जनता जानना चाहती है। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस प्रधान के तौर पर प्रगट सिंह को अपनी उस भूमिका को भी स्पष्ट करना चाहिए।
बेअदबी पर दो धड़ों का जिक्र, अब प्रगट से मांगा जवाब
चीमा ने प्रगट सिंह के उस बयान को भी मुद्दा बनाया, जिसमें उन्होंने बेअदबी के मामले में कांग्रेस के भीतर दो धड़ों की बात कही थी। चीमा ने कहा कि प्रगट सिंह के अनुसार एक धड़ा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई चाहता था, जबकि दूसरे पर बादलों को बचाने के आरोप लगते थे। ऐसे में अब कांग्रेस प्रधान के रूप में प्रगट सिंह को बताना चाहिए कि वह किस धड़े की अगुआई कर रहे हैं।
1158 भर्ती पर कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल
शिक्षा मंत्री के तौर पर प्रगट सिंह के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए चीमा ने 1158 असिस्टेंट प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों की भर्ती का मामला उठाया। उनका आरोप है कि कानूनी आपत्तियों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। चीमा ने कहा कि बाद में सुप्रीम कोर्ट से यह भर्ती रद हो गई, जिससे भर्ती प्रक्रिया में शामिल युवाओं के सामने गंभीर अनिश्चितता पैदा हुई। उन्होंने पूछा कि तय कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया।
खिलाड़ी प्रगट, लेकिन खेल बजट पर भी घेरा
खेल मंत्री के तौर पर प्रगट सिंह के कार्यकाल को लेकर भी चीमा ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि हॉकी खिलाड़ी के रूप में प्रगट सिंह की उपलब्धियों पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल का आकलन अलग आधार पर होना चाहिए।
चीमा के मुताबिक पिछली सरकार के दौरान खेल बजट करीब 147 करोड़ रुपये था, जबकि मौजूदा सरकार ने खेलों के लिए 1,746 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। चीमा ने कहा कि प्रगट सिंह खुद खिलाड़ी रहे हैं और वह जानते हैं कि खेलों और खिलाड़ियों को कितने निवेश की जरूरत है। ऐसे में उनके कार्यकाल में खेल बजट इतना कम क्यों रहा, इसका जवाब भी उन्हें देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अब पंजाब कांग्रेस की कमान संभालने के बाद प्रगट सिंह के सामने अपने पुराने राजनीतिक रिकार्ड और मंत्री पद के फैसलों से जुड़े सवालों का जवाब देने की चुनौती है।
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