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बेटी के MBBS दाखिले के लिए खुद को मृत दिखाया, बर्खास्त AIG राजजीत ने बनवाया था डेथ सर्टिफिकेट

Published: Thu, 24 Sep 2026 03:04 PM (IST)

राजजीत सिंह ने 2013 में बेटी के एमबीबीएस दाखिले के लिए खुद को आतंकवादी कार्रवाई में मृत दिखाने वाला प्रमाणपत्र बनवाया था। बाद में ड्रग्स मामले में नाम सामने आया।

बर्खास्त AIG राजजीत सिंह।

बर्खास्त AIG राजजीत सिंह।

HighLights

  1. बेटी के एमबीबीएस दाखिले हेतु बनवाया था फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र।

  2. ड्रग्स तस्करी में इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह के साथ था शामिल।

  3. एसआईटी रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री मान द्वारा किया गया बर्खास्त।

रोहित कुमार, चंडीगढ। ड्रग्स मामले में पंजाब सरकार द्वारा बर्खास्त किए गए पीपीएस अधिकारी राजजीत सिंह हुंदल का विवादों से लंबे समय से नाता रहा है। राजजीत ने तो अपना डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र) भी बनवा लिया था। राजजीत अपनी सैटिंग के दम पर हमेशा ही महत्वपूर्ण पदों पर रहा और बर्खास्तगी से पहले तक एनआरआइ विंग का एआइजी हेडक्वार्टर के पद पर तैनात था।

राजनीतिक पहुंच के कारण राजजीत पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन एसआइटी की रिपोर्ट खुलने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बर्खास्त कर दिया था। राजजीत सिंह सबसे पहले 2013 में विवादों में आया था। जब उसने अपनी बेटी का मेडिकल कालेज में एमबीबीएस में दाखिला करवाने के लिए खुद का ही मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया था।

राजजीत ने खुद को आतंकियों द्वारा मारा गया दिखाया और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया। लेकिन मामला खुल गया, जिस कारण उसकी बेटी को सीट नहीं मिली। उस समय राजजीत ने माफी मांग कर अपनी नौकरी बचाई थी।

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नशा तस्कर बनते थे साफ्ट टारगेट

नशा तस्कर बर्खास्त एआइजी राजजीत सिंह हुंदल और बर्खास्त इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह के साफ्ट टारगेट बनते थे। ड्रग्स तस्करी में पकड़े जाने वालों को उनकी प्रापर्टी ड्रग्स मनी से खरीदे होने की धमकी देकर केस में नाम डालने का डर दिया जाता था। केस से नाम निकालने का वादा किया जाता था और उनसे उनकी संपत्ति ले ली जाती थी।

इसके लिए इंद्रजीत सिंह पहले नशा तस्करों की सूचना जुटाकर उन्हें हिरासत में लेता था और फिर तस्करों की जमीन और अन्य संपत्ति उन्हें डराकर हड़प लेता था कि यह ड्रग मनी से तैयार की गई है। संपत्ति को तस्करों के रिश्तेदारों के नाम पर ही ट्रांसफर करवाकर बाद में बेच देता था। इस काम में वह अकेला शामिल नहीं था।

 इंद्रजीत की गिरफ्तारी के बाद खुला राजजीत का नाम

जून 2017 में तत्कालीन एडीजीपी हरप्रीत सिद्धू के नेतृत्व में टीम ने कपूरथला के सीआइए प्रभारी इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह को चार किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया। उसके घर से पुलिस को एक एके-47, एक इटालियन पिस्टल और 16 लाख रुपये मूल्य की ब्रिटिश करेंसी भी मिली। आरोपित के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति होने की बात से भी पर्दा उठा। यही नहीं पूछताछ में उसने अपने आका राजजीत सिंह के नाम से पर्दा उठाया।

जांच में पता चला कि 2012 से लेकर 2017 तक जिस-जिस जिले में राजजीत सिंह हुंदल की पोस्टिंग हुई, उसके साथ ही इंद्रजीत सिंह की पोस्टिंग भी उसी जिले में हुई। राजजीत बाकायदा सिफारिशी पत्र लिखकर इंद्रजीत की पोस्टिंग अपने साथ करवाता था। दोनों गुरदासपुर, तरनतारन, मोगा और जालंधर में साथ-साथ पोस्टिंग पर रहे।

पीपीएस अधिकारी ने इंद्रजीत को तरनतारन में सीआइए प्रभारी लगा दिया, जबकि इंद्रजीत सिंह को आउट आफ प्रमोशन रैंक (ओआरपी) मिला हुआ था। जिस समय इंद्रजीत की तैनाती की गई उस समय तरनतारन के करीब 40 इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह से सीनियर थे।

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दो वर्ष पहले जारी हुआ था राजजीत का LOC

पुलिस ने दो वर्ष पहले राजजीत सिंह का लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) भी जारी किया था। इसके बाद राजजीत ने अपना एक वीडियो जारी करके कहा था कि वह कहीं नहीं भाग रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार राजजीत ने अपना पासपोर्ट तत्कालीन आइजी जसकरण सिंह को सौंप दिया था।

वर्ष 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का नया मुख्यमंत्री बनाया। पुलिस सूत्रों के अनुसार चन्नी सरकार से समय जब इकबाल प्रीत सिंह सहोता को पंजाब के कार्यकारी डीजीपी के रूप में नियुक्त किया गया तो उनके पदभार संभालने से एक दिन पहले 24 सितंबर, 2021 को राजजीत सिंह छुट्टी पर चला गया। सूत्र बताते हैं कि उसे डर था कि कहीं ड्रग्स मामले की बात उठी तो उस पर शिकंजा कसा जा सकता है।

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