यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 24, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गुरदासपुर उपचुनाव में सुनील जाखड़ ने एक तीर से साधे दो निशाने
गुरदासपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सुनील जाखड़ ने विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना से मुलाकात कर एक तीर से दो निशाने लगाए हैं।

चंडीगढ़, [मनोज त्रिपाठी]। गुरदासपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सुनील जाखड़ और दिवंगत भाजपा सांसद विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना की मुलाकात से सियासी गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई है। हालांकि, कविता खन्ना ने कहा है कि जाखड़ सिर्फ अफसोस प्रकट करने आए थे, इसके सियासी मायने न निकाले जाएं। इसके बावजूद सियासी जानकार अलग-अलग मतलब निकाल रहे हैं। जाखड़ ने कविता खन्ना से मुलाकात कर एक तीर से दो निशाने साधे हैं। इस कूटनीति से जाखड़ के सियासी विरोधी भी उलझ कर रह गए हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों खेमों में इस मुलाकात को गंभीरता से लिया जा रहा है।
जाखड़ व दिवंगत भाजपा सांसद विनोद खन्ना की पत्नी की मुलाकात बनी चर्चा का केंद्र
गुरदासपुर लोकसभा सीट अभिनेता विनोद खन्ना के निधन के बाद खाली हुई है। खन्ना यहां से चार बार सांसद रहे। यही वजह थी कि उनकी पत्नी कविता खन्ना को सशक्त दावेदार माना जा रहा था। उन्होंने चुनाव लड़ने की इच्छा भी जताई थी और लंबे समय से हलके में लोगों के संपर्क में थीं। वह लोगों से जुड़ने की कोशिश कर रही थीं। भाजपा का एक खेमा उन्हें टिकट दिलाने के हक में था, लेकिन कारोबारी स्वर्ण सलारिया भी इस सीट पर दो बार दावा जता चुके थे। एक बागी पार्टी के फैसले का विरोध करने का फैसला कर लिया था, लेकिन विनोद खन्ना की मांग पर वह दावेदारी से पीछे हट गए थे।
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कविता खन्ना इस समय गुरदासपुर की चुनावी सियासत में सबसे सॉफ्ट टागरेट हैं। मौके की नजाकत भांपते हुए जाखड़ ने सियासी कूटनीति के तहत कविता से शनिवार को मुलाकात की और विनोद खन्ना के अधूरे प्रोजेक्टों को पूरा करवाने की घोषणा कर सूबे की सियासत में तड़का लगा दिया।
जाखड़ को इस सीट से कांग्रेसियों के ही विरोध का सामना करना पड़ सकता है। प्रताप सिंह बाजवा यहां से अपनी पत्नी को उम्मीदवार बनाना चाहते थे, लेकिन पार्टी हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद जाखड़ को मैदान में उतारा गया। जाखड़ इससे पहले एक विधानसभा चुनाव और दो लोकसभा चुनाव हार चुके हैं।
इस बार कैप्टन की इमेज के साथ-साथ जाखड़ का सियासी भविष्य भी दांव पर है। बाजवा ने अंदरखाते पार्टी में शर्त रखी है कि उनकी पत्नी को सरकार में कोई बड़ा ओहदा दिया जाए। अगर कैप्टन बाजवा की शर्त मान लेते हैं, तो वह कहीं न कहीं यह उनके नेचर के विपरीत फैसला होगा, जिसकी उम्मीद कम ही है।
सियासत में भावनाओं का तड़का
वर्तमान हालात में जाखड़ को पता है कि बाजवा अंदरखाते उनका विरोध करेंगे, नतीजतन उन्होंने मौके पर सियासी चौका मारकर कविता खन्ना से मुलाकात कर भावनाओं को सियासी तौर पर कैश करने की कवायद की है। इससे बाजवा के विरोध के नुकसान की भरपाई कविता खन्ना के खाते से हो जाए।
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यही वजह रही कि जाखड़ ने इस मुलाकात में कविता के जख्मों को भी धीरे से कुरेदा। यह उम्मीद की जा रही है कि कैप्टन मौके की नजाकत व पार्टी को मजबूत करने के लिए बाजवा की मांग को दरकिनार करके कविता खन्ना को किसी न किसी रूप में कांग्रेस के साथ जोड़ सकते हैं।
