चंडीगढ़ की विरासत अब लक्जमबर्ग में होगी नीलाम, पंजाब किसान भवन की दो कुर्सियों की लगेगी बोली
चंडीगढ़ की विरासत से जुड़ी पियरे जेनरे की दो केन ऑफिस चेयर लक्जमबर्ग में नीलामी के लिए सूचीबद्ध की गई हैं। दोनों चेयर की शुरुआती कीमत 8,000 यूरो है।

दो केन ऑफिस चेयर लक्जमबर्ग के नीलामी घर में बिक्री के लिए सूचीबद्ध।
HighLights
नुमानित कीमत 8,000 से 10,000 यूरो बताई गई।
पियरे जेनरे की डिज़ाइन की गई दो केन ऑफिस चेयर।
अधिवक्ता अजय जग्गा ने नीलामी रोकने की मांग की।
राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। चंडीगढ़ की विरासत से जुड़े फर्नीचर की विदेशों में नीलामी का मामला एक बार फिर सामने आया है। पंजाब के किसान भवन से संबंधित होने का दावा की जा रही पियरे जेनरे की दो केन ऑफिस चेयर (बेंत वाली कुर्सियां) लक्जमबर्ग के एक नीलामी घर में बिक्री के लिए सूचीबद्ध की गई हैं।
दोनों कुर्सियों की शुरुआती कीमत 8,000 यूरो रखी गई है, जबकि अनुमानित कीमत 8,000 से 10,000 यूरो बताई गई है। यूटी एडमिनिस्ट्रेटर एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य और अधिवक्ता अजय पॉल जग्गा ने इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, विदेश मंत्रालय और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
उनका कहना है कि इन कुर्सियों पर पंजाबी भाषा में ‘कि भ: 6’ लिखा हुआ है, जिसे किसान भवन (KI BH 6) से संबंधित पहचान के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में इनकी वास्तविक पहचान और सरकारी संपत्ति होने की स्थिति की तत्काल जांच होनी चाहिए।
जग्गा ने पत्र में बताया कि लक्ज-ऑक्शन, लक्जमबर्ग ने इन कुर्सियों को लॉट नंबर 88 और संदर्भ संख्या LXA-ZB-7209 के तहत सूचीबद्ध किया है। नीलामी कैटलॉग के अनुसार ये कुर्सियां वर्ष 1955 के आसपास की हैं और प्रसिद्ध फ्रांसीसी वास्तुकार एवं फर्नीचर डिजाइनर पियरे जेनरे ने इन्हें डिजाइन किया था। कैटलॉग में इनके पुराने निजी संग्रह से संबंधित जानकारी भी दर्ज होने की बात कही गई है।
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नीलामी घर को कुर्सियां रोकने के लिए लिखा जाए
अजय जग्गा ने पंजाब सरकार से मांग की है कि सबसे पहले कुर्सियों की पहचान का किसान भवन के सरकारी रिकॉर्ड और इन्वेंटरी से मिलान करवाया जाए। यदि इनके सरकारी संपत्ति होने की पुष्टि होती है तो तत्काल एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच पंजाब पुलिस के महानिदेशक को सौंपी जाए।
साथ ही लक्ज-ऑक्शन को पत्र भेजकर नीलामी रोकने, कुर्सियों का स्वामित्व किसी खरीदार को हस्तांतरित नहीं करने और इनके पूरे इतिहास व दस्तावेज उपलब्ध करवाने को कहा जाए।
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