6000 करोड़ का नेटवर्क, पूर्व DSP से AIG तक... पंजाब के कई बड़े अधिकारी शामिल; पढ़ें भोला ड्रग केस की Inside Story
पंजाब का 6000 करोड़ का भोला ड्रग रैकेट केवल तस्करों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पुलिस और जांच एजेंसियों के कामकाज पर भी सवाल उठाए।

भोला ड्रग केस में पंजाब के कई बड़े अधिकारी शामिल (जागरण फोटो)
HighLights
6000 करोड़ के भोला ड्रग रैकेट ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए
ईडी अधिकारी निरंजन सिंह ने ड्रग रैकेट की वित्तीय परतें खोलीं
पूर्व डीजीपी चट्टोपाध्याय और बर्खास्त पुलिसकर्मियों के कनेक्शन उजागर हुए
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब का ड्रग संकट केवल तस्करों, सप्लायरों और करोड़ों रुपये के नशे के कारोबार तक सीमित नहीं रहा। करीब छह हजार करोड़ रुपये के भोला ड्रग रैकेट से शुरू हुई जांच की कड़ियां आगे बढ़ीं तो पुलिस और जांच एजेंसियों के कामकाज पर भी सवाल उठने लगे।
एक तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी निरंजन सिंह ने इस मामले की वित्तीय परतें खोलीं, दूसरी तरफ बर्खास्त पुलिसकर्मी सरबजीत सिंह और तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की कथित ऑडियो बातचीत ने पुलिस की पोस्टिंग से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा और जेल में मोबाइल पहुंचाने तक के मुद्दों को चर्चा में ला दिया। बाद में राजजीत सिंह और इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह से जुड़े मामलों ने पुलिस-ड्रग कनेक्शन की जांच को और गंभीर बना दिया।
छह हजार करोड़ के मामले से खुला रास्ता
मार्च 2013 में कनाडाई एनआरआइ अनूप काहलों की गिरफ्तारी के बाद जिस ड्रग नेटवर्क की जांच आगे बढ़ी, उसमें नवंबर 2013 में बर्खास्त पुलिसकर्मी जगदीश भोला की गिरफ्तारी ने बड़ा मोड़ दिया।
इसके बाद बिट्टू औलख और जगजीत चहल समेत कई नाम जांच में आए। मामला केवल ड्रग बरामदगी तक नहीं रहा, बल्कि नशे के पैसे के नेटवर्क की जांच ईडी तक पहुंची।
निरंजन सिंह ने खोली वित्तीय कड़ी
ईडी के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह इस मामले की जांच करने वाले प्रमुख अधिकारियों में रहे। उन्होंने भोला मामले के साथ-साथ फेमा से जुड़े मामलों की भी जांच की। दिसंबर 2014 में उन्होंने पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से पूछताछ की।
इसके करीब एक महीने बाद 16 जनवरी 2015 को निरंजन सिंह का तबादला कोलकाता कर दिया गया। उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया और 21 जनवरी को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उनके तबादले पर रोक लगा दी।
अक्टूबर 2016 में उन्हें डिप्टी डायरेक्टर पद पर पदोन्नति मिली। पांच अक्टूबर 2018 को उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कर दिया। उस समय उनके समर्थकों ने जांच को प्रभावित किए जाने के आरोप लगाए थे, जबकि निरंजन सिंह ने व्यक्तिगत कारणों को आवेदन की वजह बताया था।
डीजीपी के घर पहुंचा बर्खास्त पुलिसकर्मी
इसी पूरी कहानी का दूसरा सिरा सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय से जुड़ी कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग से सामने आता है। रिपोर्ट के मुताबिक 27 दिसंबर को नयागांव स्थित तत्कालीन डीजीपी के घर पर सरबजीत सिंह और इंस्पेक्टर सतवंत सिंह की मौजूदगी में कथित बातचीत हुई।
सरबजीत सिंह उस समय बर्खास्त पुलिसकर्मी और भगोड़ा घोषित था। उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत सात एफआइआर दर्ज होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
कथित ऑडियो में पुलिस पोस्टिंग और ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई पर चर्चा का दावा किया गया। सबसे अहम बात यह कि सतवंत सिंह को खरड़ सीआइए प्रभारी बनाने की चर्चा के अगले दिन, 28 दिसंबर को उनकी पोस्टिंग का आदेश जारी हुआ। बाद में सतवंत सिंह को चंडीगढ़ पुलिस ने फर्जी हस्ताक्षर मामले में गिरफ्तार किया।
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ड्रग कार्रवाई से राष्ट्रीय सुरक्षा तक
कथित ऑडियो के दूसरे हिस्से में पाकिस्तान से हथियार और आरडीएक्स आने की बात तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऑपरेशन की चर्चा होने का दावा है।
इसमें सरबजीत सिंह द्वारा डीएसपी स्तर के अधिकारी की पोस्टिंग और हथियारों की बरामदगी को लेकर निर्देश दिए जाने की बात कही गई।
एक अन्य कथित बातचीत में जगदीश भोला से जेल के भीतर मोबाइल के जरिए संपर्क रखने और उससे ड्रग बरामदगी के लिए सूचना हासिल करने की योजना की चर्चा बताई गई है।
फिर सामने आया राजजीत-इंदरजीत कनेक्शन
भोला प्रकरण के वर्षों बाद बर्खास्त एआइजी राजजीत सिंह और इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह से जुड़े मामले ने पंजाब पुलिस में ड्रग नेक्सस की बहस को फिर जिंदा किया।
इंदरजीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद जांच में राजजीत सिंह का नाम सामने आया और पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ी। राजजीत सिंह पर ड्रग तस्करी, उगाही और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े गंभीर आरोप लगे।
इस पूरे घटनाक्रम में अलग-अलग समय पर अलग-अलग अधिकारी और पुलिसकर्मी जांच के घेरे में आए। भोला मामले में निरंजन सिंह की जांच से लेकर चट्टोपाध्याय के घर की कथित बैठक, सरबजीत सिंह की भूमिका, सतवंत सिंह की पोस्टिंग और फिर राजजीत-इंदरजीत प्रकरण तक घटनाक्रम यह दिखाता है कि पंजाब में ड्रग की जांच का दायरा समय के साथ पुलिस तंत्र के भीतर संभावित मिलीभगत की जांच तक पहुंचता रहा है।
हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोपों और अदालत में साबित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। कथित ऑडियो की सत्यता पर तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की ओर से कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी। वहीं विभिन्न मामलों में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होंगे।
टाइमलाइन
- 3 मार्च 2013 — अनूप काहलों गिरफ्तार।
- 12 नवंबर 2013 — जगदीश भोला गिरफ्तार।
- 15 नवंबर 2013 — बित्तू औलख और जगजीत चहल गिरफ्तार।
- 2014 — ईडी ने ड्रग मनी और फेमा से जुड़ी जांच आगे बढ़ाई।
- 26 दिसंबर 2014 — बिक्रम सिंह मजीठिया ईडी के समक्ष पेश।
- 16 जनवरी 2015 — जांच अधिकारी निरंजन सिंह का कोलकाता तबादला।
- 21 जनवरी 2015 — हाई कोर्ट ने तबादले पर रोक लगाई।
- 6 अक्टूबर 2016 — निरंजन सिंह डिप्टी डायरेक्टर पद पर पदोन्नत।
- 5 अक्टूबर 2018 — निरंजन सिंह ने वीआरएस के लिए आवेदन किया।
- 27 दिसंबर — नयागांव में तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय के घर कथित बैठक।
- 28 दिसंबर — कथित बातचीत के अगले दिन सतवंत सिंह को खरड़ सीआइए प्रभारी बनाने का आदेश।
- बाद का घटनाक्रम — राजजीत सिंह और इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह से जुड़े ड्रग मामलों की जांच आगे बढ़ी।
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