Asian Games 2026: पिता ने लोन लेकर पूरा किया बेटी का सपना, गोल्ड मेडलिस्ट नंदिनी शर्मा से जानिए संघर्ष की कहानी
एशियाई खेलों में महिला क्रिकेट का स्वर्ण पदक जीतने वाली नंदिनी शर्मा को चंडीगढ़ में सम्मानित किया गया। उन्होंने कड़े संघर्ष, परिवार के त्याग और अपने लक्ष्यों को साझा किया।

दैनिक जागरा के संवाददाता डॉ. सुमित सिंह श्योराण से बातचीत करते हुए नंदिनी शर्मा।
HighLights
एशियन गेम्स 2026 में नंदिनी शर्मा ने जीता स्वर्ण पदक।
बापूधाम कॉलोनी से भारतीय टीम तक का संघर्षपूर्ण सफर।
चंडीगढ़ प्रशासन देगा तीन करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार।
डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़। चंडीगढ़ की बापूधाम कॉलोनी से निकलकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम तक का सफर तय करना और फिर Asian Games 2026 में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना नंदिनी शर्मा के लिए यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और परिवार के त्याग की कहानी है।
शनिवार को सेक्टर-16 क्रिकेट ग्राउंड में चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से नंदिनी को एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष सारांश टंडन, पूर्व अध्यक्ष संजय टंडन और चंडीगढ़ प्रशासन के डायरेक्टर स्पोर्ट्स सौरव अरोड़ा सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
सौरव अरोड़ा ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन की 2023 की नई खेल नीति के तहत नंदिनी शर्मा को तीन करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। सम्मान समारोह के बाद दैनिक जागरण के प्रमुख संवाददाता डॉ. सुमित सिंह श्योराण ने नंदिनी शर्मा से विशेष बातचीत की।

दैनिक जागरण के प्रमुख संवाददाता डॉ. सुमित सिंह श्योराण से बात करते हुए नंदिनी शर्मा।
यह भी पढ़ें- Asian Games 2026 Live: भारतीय महिला कबड्डी टीम ने जीता सोना, हॉकी में भारत-जापान का मैच शुरू
इस दौरान नंदिनी ने अपनी क्रिकेट यात्रा, परिवार की मुश्किलों, बापूधाम से टीम इंडिया तक के सफर और भविष्य के लक्ष्य पर खुलकर बात की:
प्रश्न: एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने के बाद आज सम्मान मिला। इस समय मन में सबसे पहली बात क्या चल रही है?
नंदिनी: यह मेरे लिए बहुत भावुक पल है। जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि इस एक मेडल के पीछे कई सालों की मेहनत है। मेरे परिवार, कोच और चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन ने मेरा लगातार साथ दिया। आज जब चंडीगढ़ में मेरा सम्मान हुआ तो लगा कि मेरी मेहनत सफल हुई।
सवाल: बापूधाम कॉलोनी से भारतीय टीम तक का सफर कितना मुश्किल रहा?
नंदिनी: बहुत मुश्किल रहा। मैं एक सामान्य परिवार से आती हूं। कई बार आर्थिक परिस्थितियां हमारे सामने बड़ी चुनौती बनकर आईं। मेरे परिवार को मेरे क्रिकेट के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। कई बार ऐसी स्थिति भी आई जब पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए परिवार को लोन तक लेना पड़ा। लेकिन मेरे पिता और भाइयों ने कभी मुझे यह महसूस नहीं होने दिया कि मुझे क्रिकेट छोड़ देना चाहिए। उन्होंने हमेशा कहा कि तुम खेलो, मेहनत करो और आगे बढ़ो।
प्रश्न: क्या कभी ऐसा लगा कि आर्थिक परेशानी के कारण क्रिकेट छोड़ना पड़ेगा?
नंदिनी: नहीं। मुश्किलें जरूर आईं, लेकिन मैंने कभी हार मानने के बारे में नहीं सोचा। मेरे लिए क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं था। मैं सुबह से लेकर शाम तक मेहनत करती थी। जब मुश्किल समय आता था तो मैं यही सोचती थी कि एक दिन इसी मेहनत का परिणाम मिलेगा।

क्रिकेट एसोसिएशन चंडीगढ़ की ओर से गोल्ड मेडल जीतने पर नंदिनी शर्मा को सम्मानित किया गया।
प्रश्न: आपकी क्रिकेट की असली शुरुआत कहां से हुई?
नंदिनी: मैंने चंडीगढ़ में करीब 10-12 साल पहले क्रिकेट शुरू किया था। सेक्टर-26 स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के क्रिकेट ग्राउंड पर मैंने काफी अभ्यास किया है। चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से अलग-अलग आयु वर्गों में खेलते हुए मुझे लगातार आगे बढ़ने का मौका मिला।
प्रश्न: फास्ट बॉलर के रूप में आपकी सबसे बड़ी ताकत क्या है?
नंदिनी: मेरी कोशिश रहती है कि मैं अपनी गति और लाइन-लेंथ पर लगातार काम करती रहूं। क्रिकेट में हर दिन कुछ नया सीखना पड़ता है। फिटनेस भी बहुत महत्वपूर्ण है। खासकर महिला क्रिकेट में अगर आपको लंबे समय तक खेलना है तो फिटनेस पर बहुत ध्यान देना जरूरी है।
यह भी पढ़ें- Asian Games 2026: जालंधर के गुरिंदरवीर का पदक का सपना टूटा, 100 मीटर हीट रेस में 5वें स्थान पर रहे
प्रश्न: चंडीगढ़ की लड़कियों के लिए आपका क्या संदेश है?
नंदिनी: चंडीगढ़ में लड़कियों के लिए आने वाले समय में खेल के बहुत अच्छे अवसर हैं। लेकिन सिर्फ अवसर मिलना काफी नहीं है। आपको लगातार मेहनत करनी होगी और अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाना होगा। फिटनेस को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
प्रश्न: चंडीगढ़ के लिए एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने वाली पहली लड़की बनने का अहसास कैसा है?
नंदिनी: यह मेरे लिए गर्व की बात है। मैं बहुत खुश हूं कि चंडीगढ़ के लिए यह उपलब्धि हासिल कर पाई। इससे मुझे और बेहतर करने की प्रेरणा मिलेगी। मैं चाहती हूं कि मेरे बाद चंडीगढ़ की और भी लड़कियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और शहर का नाम रोशन करें।
प्रश्न: अब अगला लक्ष्य क्या है? क्या ओलंपिक पर नजर है?
नंदिनी: अभी मेरा पूरा फोकस अपने खेल पर है। मैं भारतीय महिला वनडे क्रिकेट टीम में खुद को मजबूती से स्थापित करना चाहती हूं। ओलंपिक के बारे में अभी ज्यादा नहीं सोच रही। मेरा काम है कि जिस भी मैच में मौका मिले, वहां अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूं।
प्रश्न:क्रिकेट से बाहर आपकी सबसे पसंदीदा चीज क्या है?
नंदिनी: मुझे घर का बना कढ़ी-चावल बहुत पसंद है। (हंसते हुए) बाहर कितना भी अच्छा खाना मिल जाए, घर की कढ़ी-चावल की बात अलग है। मुझे परफ्यूम की कलेक्शन करना भी काफी पसंद है।
प्रश्न: आपकी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय किसे देंगी?
नंदिनी: सबसे पहले अपने पिता और भाइयों को। उन्होंने मेरे लिए बहुत कुछ किया है। मेरे परिवार ने आर्थिक और व्यक्तिगत दोनों तरह की मुश्किलों का सामना किया, लेकिन मेरा हौसला कभी टूटने नहीं दिया। इसके अलावा मेरे कोच और चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन का भी बहुत बड़ा योगदान है। आज मैं जिस मुकाम पर हूं, उसमें इन सभी लोगों की मेहनत शामिल है।
नंदिनी की कहानी यह बताती है कि बड़े सपने देखने के लिए परिस्थितियों का आसान होना जरूरी नहीं है। बापूधाम की गलियों से निकलकर भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंची नंदिनी अब चंडीगढ़ की उन बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेल के मैदान में देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना देख रही हैं।
