अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का इस्तीफा मंजूर! इंटरनेट मीडिया पर खुद को लिखा पूर्व अध्यक्ष, सियासी हलचल तेज
पंजाब कांग्रेस में जारी खींचतान के बीच अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का इस्तीफा मंजूर हो गया है, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर खुद को पूर्व अध्यक्ष लिख दिया है।

अमरिंदर सिंह राजा वडिंग।
HighLights
राजा वड़िंग का पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा मंजूर।
उन्होंने सोशल मीडिया बायो में खुद को 'पूर्व अध्यक्ष' बताया।
अगले 48 घंटों में नए अध्यक्ष की घोषणा की उम्मीद।
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से जारी अंदरूनी कलह और गुटबाजी के बीच सबसे बड़ी खबर सामने आई है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का इस्तीफा पार्टी हाईकमान द्वारा मंजूर कर लिया गया है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर मुहर तब लग गई जब खुद राजा वड़िंग ने अपने इंटरनेट मीडिया खातों के प्रोफाइल बायो में बदलाव करते हुए खुद को 'पूर्व अध्यक्ष, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी' लिख दिया है।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कवायद पंजाब मामलों के प्रभारी सचिन पायलट की अंतरिम रिपोर्ट और पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी के साथ हुई बातचीत के बाद अंजाम में आई है। पिछले कई महीनों से राज्य इकाई में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और राजा वड़िंग के समर्थकों के बीच तीखी खींचतान चल रही थी। विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को दूर करने के लिए हाईकमान ने यह कड़ा कदम उठाया है।
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अमरिंदर सिंह राजा वडिंग का इंटरनेट मीडिया अकाउंट:

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नए अध्यक्ष का नाम जल्द
अप्रैल 2022 से राज्य इकाई की कमान संभाल रहे लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद अब नए अध्यक्ष की तलाश तेज हो गई है। अनुमान है कि अगले 48 घंटे के अंदर-अंदर नए प्रधान का नाम घोषित कर दिया है।
राज्य में हिंदू और सिख समुदायों के बीच संतुलन साधने के लिए नए नाम पर मंथन जारी है। इस दौड़ में पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे आगे माना जा रहा है, जिन्हें एक तटस्थ और सर्वमान्य हिंदू चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।
इसके अलावा पूर्व हॉकी कप्तान परगट सिंह और सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम भी चर्चा में हैं। माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान अगले 24 से 48 घंटों के भीतर नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा कर सकता है।
एकजुटता ही सबसे बड़ी चुनौती
हाल के दिनों में 'हर बूथ, कांग्रेस मजबूत' जैसे सांगठनिक कार्यक्रमों के दौरान वड़िंग और चन्नी समर्थकों के बीच तीखी बयानबाजी और नारेबाजी देखने को मिली थी। भूपेश बघेल और सचिन पायलट के दौरों के बाद भी जब गुटबाजी पूरी तरह शांत नहीं हुई, तब हाईकमान ने नए सिरे से कमान सौंपने का फैसला लिया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकमान का नया नेतृत्व 2027 के रण से पहले पंजाब कांग्रेस को एकजुट रख पाने में कितना सफल होता है।
गुटबाजी से पहले भी नुकसान उठा चुकी कांग्रेस
पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी का इतिहास पुराना रहा है। 2022 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भी पार्टी में ऐसी ही भीषण खींचतान देखने को मिली थी। 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच लंबे समय तक चले सियासी टकराव के बाद पार्टी ने चुनाव से कुछ महीने पहले अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था।
इसके बाद पार्टी ने चरणजीत सिंह चन्नी को राज्य की कमान सौंपी। हालांकि, 2022 के चुनावों में चन्नी अपनी दोनों सीटों—चमकौर साहिब और भदौड़—से हार गए। इस अंदरूनी कलह का भारी नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा और कांग्रेस 2017 की 77 सीटों के मुकाबले सिमटकर महज 18 सीटों पर आ गई।
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