जेएनएन, अमृतसर। स्वास्थ्य मंत्री सुरजीत ज्याणी ने कहा कि पंजाब में 1.8 प्रतिशत लोग ही नशे की चपेट में हैं। एम्स द्वारा दस जिलों का सर्वेक्षण करने के बाद यह निष्कर्ष निकला है। 'उड़ता पंजाबÓ फिल्म पूरी तरह से काल्पनिक है, जिसका पंजाब के मौजूदा हालात से कोई संबंध नहीं। सुरजीत ज्याणी के इस दावे के बीच सीजेएम कम जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी की सचिव गिरीश बांसल ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें नशे की चपेट में आए लोगों के हैरानीजनक आंकड़े दर्शाए गए हैं।

दरअसल, रविवार को सरकारी मेडिकल कॉलेज में स्थित पुनर्वास केंद्र में आयोजित एक कार्यक्रम में नशेडिय़ों के अलग-अलग आंकड़े प्रस्तुत किए गए। स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग तथा प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में गिरीश बांसल ने कहा कि पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में 73 प्रतिशत लोग, जबकि सीमावर्ती क्षेत्रों में 75 प्रतिशत लोग नशे के शिकार हैं। पंजाब में तीन पुरुषों में से एक व दस महिलाओं में एक महिला नशे की शिकार है। यह रिपोर्ट डब्ल्यूएचओ की है।

इसी बीच, पत्रकारों से बातचीत करते हुए ज्याणी ने कहा कि यदि प्रदेश के 22 जिलों का सर्वे करवाया जाए तो नशेडिय़ों का आंकड़ा एक प्रतिशत रह जाएगा। एम्स के सर्वे में यह स्पष्ट हुआ है कि युवा वर्ग बुरी संगत में आकर नशे का आदी बनते हैं।

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ज्याणी ने कहा कि पंजाब को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। कांग्रेस नेता सरकार से दुश्मनी निभा रहे हैं। वे कहते हैं कि पंजाब में 70 प्रतिशत नशेड़ी हैं। कांग्रेस एक सोची समझी साजिश के अंतर्गत पंजाब को बदनाम करने पर आमादा है। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि पंजाब में नशा तैयार नहीं होता। दूसरे राज्यों से आता है। सरकार इसकी रोकथाम के लिए प्रयास कर रही है।

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