यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 18, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
अपने गांव को मॉडल बनाना चाहते थे मार्शल अर्जन सिंह, गरीब बच्चों की भरते थे फीस
अर्जन सिंह का परिवार देश विभाजन के बाद अमृतसर की तहसील अजनाला के गांव कोहाली में बस गया था। यहां ...और पढ़ें

अमृतसर, [नितिन धीमान]। जांबाज योद्धा एयर मार्शल अर्जन सिंह को आज पूरा देश नम आंखों से श्रद्धा के पुष्प भेंट कर रहा है। अमृतसर के अजनाला तहसील में स्थित गांव कोहाली के लोग भी गहरे सदमे में हैं। उनके लिए अर्जन सिंह देश के रक्षक के साथ-साथ गांव की सुधारवादी शख्सियत भी थे। उनके फौलादी सीने में गरीब बच्चों के लिए असीम प्यार था। अर्जन इस गांव में रहते तो नहीं थे, लेकिन वे आते-जाते रहते थे।
दरअसल, पाकिस्तान के लायलपुर में जन्मे अर्जन सिंह का परिवार देश विभाजन के बाद अमृतसर की तहसील अजनाला के गांव कोहाली में बस गया था। गांव में आज भी वह मकान है जहां अर्जन सिंह का परिवार रहता था। अर्जन को गांव से खासा लगाव था। उनके निधन का समाचार मिलने के बाद पूरा गांव शोकाकुल है।
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अर्जन सिंह के दोस्त मनजीत सिंह बताते हैं कि वह बहुत ही नेकदिल इंसान थे। इतने बड़े पद पर रहने के बावजूद उनमें घमंड लेशमात्र भी नहीं था। मुझे याद है कि वे जब गांव में आते थे तो सभी बच्चों से पूछते थे कि क्यों वे पढ़ते हैं? असल में अर्जन चाहते थे कि हर बच्चा पढ़-लिख कर अच्छा नागरिक बने। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए बैंक में अपना अकाउंट खुलवाया था। इस अकाउंट में वह हर माह राशि भेजते थे। इन्हीं पैसों से उन बच्चों को शिक्षा दिलवाते थे जो आर्थिक अभाव के कारण इससे वंचित थे।
इतना ही नहीं, उन्होंने खालसा कॉलेज प्रशासन को कहा था कि गांव का कोई भी बच्चा कॉलेज में पढऩे आए तो उससे फीस न ली जाए। उसकी पढ़ाई का सारा खर्च वह खुद वहन करेंगे। गांव में स्कूल व खेल एकेडमी स्थापित करने के लिए अर्जन सिंह ने अपनी जमीन भी दे दी, लेकिन कुछ राजनीतिक कारणों के चलते उनकी यह आस पूरी न हो पाई। सच तो यह है कि अर्जन सिंह अपने गांव को मॉडल बनाना चाहते थे। देश सेवा के साथ वह गांव के विकास के लिए पूरी निष्ठा से जुटे थे।
जब भी गांव आते सभी से मिलते
गांववासी पूरण सिंह के अनुसार अर्जन सिंह असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी थे। वह जुनूनी थे और देश प्रेम के लिए प्रतिबद्ध भी। जब भी गांव आते सबसे मिलते। बड़ों का सम्मान करते और छोटों को दुलार देते। गांव के लिए यह सम्मान की बात है कि अर्जन सिंह एकमात्र ऐसे ऑफिसर थे जिन्हें फील्ड मार्शल के समान फाइव स्टार रैंक दिया गया था। दिल्ली के आर्मी अस्पताल से उनके निधन की खबर आई तो कलेजे में हूक सी उठी। वो आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन हमें फख्र है कि इस फाइव स्टार योद्धा ने ताउम्र देशसेवा की।
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गांव के बच्चों के लिए पापाजी थे
पूरण सिंह के अनुसार अर्जन सिंह ने अपना पैतृक आवास दूर के रिश्तेदारों के नाम कर दिया था। उनके देहांत से आसपास के गांवों के लोग भी सदमे में हैं। गांव के बच्चों के लिए वे पापाजी थे। आज ये बच्चे बड़े हो गए हैं और उनके देहांत के बाद गमगीन हैं। अर्जन एक ऐसा चमकता सितारा हैं जो अपनी रोशनी से गांव को प्रकाशमान करते रहेंगे।
