जेएनएन, अमृतसर। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने जापान की इंटरनेशनल लेबोरटरी फॉर एडवांस बायो मेडिसन (एआइएसटी) के साथ मिलकर अश्वगंधा में ऐसे कंपोनेंट ढूंढ निकाले हैं, जो कैंसर जैसी नामुराद बीमारी को भी खत्म करने में सक्षम हैं। जापान की डाई लैब ने जीएनडीयू के साथ समझौता किया है, ताकि जीएनडीयू के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में अश्वगंधा के टिश्यू को तैयार किया जा सके, जिसमें कैंसर को खत्म करने के तत्व भरपूर मात्र में होते हैं।

जीएनडीयू में पहुंची जापान की वैज्ञानिक डॉ. रेणू वधवा और डॉ. सुनील कौल ने वीसी जसपाल सिंह संधू और विभाग हेड डॉ. प्रताप कुमार पत्ती के साथ मुलाकात की। डॉ. रेणू और डॉ. कौल ने बताया कि अश्वगंधा बहुत गुणकारी पौधा है, लेकिन इसमें कुछ ऐसे कंपोनेंट पाए जाते हैं, जो कि कैंसर के सेल को खत्म कर देते हैं।

2003 से की जा रही रिसर्च

डॉ. रेणू वधवा ने बताया कि उनकी यह रिसर्च 2003 से चल रही है। मानव शरीर में होने वाले हर तरह के कैंसर के सेल इकट्ठा किए गए। उसके बाद अश्वगंधा के अंदर भी पाए जाने वाले अलग-अलग तत्वों के साथ इनका मेल करवाया गया। इसमें पाया गया कि अश्वगंधा के अंदर पाए जाने वाला विदआफरिन -ए कैंसर के सेल खत्म कर रहा है, क्योंकि अश्वगंधा की खेती बहुत सारी जगहों पर की जाती है।

25 डिग्री तापमान में तैयार किया जाता है अश्वगंधा

बायोटेक्नोलॉजी विभाग के हेड डॉ. प्रताप कुमार पत्ती ने बताया कि लैब में तैयार किया जाने वाला टिश्यू 25 डिग्री तापमान में तैयार किया जाता है। आम खेतों में उगाए जाने वाला पौधा 45 डिग्री में भी तैयार हो जाता है। अश्वगंधा की खेती गर्मी में शुरू होती हैं। लैब में तापमान कंट्रोल कर इस पौधे का टिश्यू तैयार किया जाता है, ताकि इसमें पाया जाने वाला विदआफरिन-ए को नुकसान न हो।

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