पटियाला जेल में राजोआणा से मिले जथेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, बोले- 'सिखों ने कभी नहीं मांगी जान बख्शी की भीख'
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, ज्ञानी टेक सिंह और एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने पटियाला जेल में बलवंत सिंह ...और पढ़ें

राजोआण से मुलाकात के बाद मीडिया से बा
HighLights
जत्थेदार गड़गज्ज, ज्ञानी टेक सिंह, धामी ने राजोआणा से मुलाकात की।
राजोआणा ने दया की भीख मांगने से साफ इनकार किया।
बंदी सिखों की रिहाई के लिए चेतना मार्च को समर्थन।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के जथेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, तख्त श्री दमदमा साहिब के जथेदार ज्ञानी टेक सिंह और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने केंद्रीय जेल पटियाला पहुंचकर सजा-ए-मौत का सामना कर रहे भाई बलवंत सिंह राजोआणा से विशेष मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राजोआणा की सेहत और उनके मौजूदा हालातों के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की।
मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए जथेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने स्पष्ट किया कि सिख इतिहास में सिखों ने कभी भी हकीमों के आगे जान बख्शी के लिए घुटने नहीं टेके हैं, बल्कि शहादत का मार्ग चुना है। भाई बलवंत सिंह राजोआणा भी इसी गौरवशाली सिख परंपरा पर कड़ाई से पहरा दे रहे हैं और उन्होंने साफ कह दिया है कि उन्हें किसी से दया की भीख नहीं चाहिए।
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32 सालों से जेल में हैं राजोआणा
जथेदार ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश गुरपुरब के अवसर पर साल 2019 में केंद्र द्वारा राजोआणा की सजा से जुड़ा जो फैसला सुनाया गया था, उसे आज तक लागू नहीं किया गया है।
पिछले छह साल बीत जाने और सर्वोच्च न्यायालय में 41 तारीखें पड़ने के बावजूद अंतिम फैसला न लेना अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि बीते 32 वर्षों से नजरबंद राजोआणा के मामले में बिना किसी देरी के तुरंत न्यायसंगत निर्णय लिया जाना चाहिए।
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चेतना मार्च को समर्थन देने का एलान
वहीं शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि भाई राजोआणा 32 साल से जेल में बंद हैं और पिछले 19 वर्षों से फांसी की चक्की में सजा काट रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजोआणा ने अपनी कौमी सेवा के लिए कोई माफी न मांगने का दृढ़ संकल्प दोहराया है।
धामी ने कहा कि अगर सरकार ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाया तो पांच सिंह साहिबान की बैठक बुलाकर अगली सख्त रणनीति तय की जाएगी। इसके साथ ही शिरोमणि कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब ने 2 अक्टूबर को बंदी सिखों की रिहाई के लिए निकाले जाने वाले चेतना मार्च को अपना पूर्ण समर्थन देने का एलान किया है।
