जेएनएन, अमृतसर। पाकिस्तान के कराची शहर की लांडी जेल से रिहा किए गए 218 भारतीय मछुआरे शुक्रवार देर रात करीब दो बजे अटारी सीमा के रास्ते भारत पहुंचे। गुजरात के मत्स्य विभाग के अधिकारी राहुल लश्कर ने मछुआरों का स्वागत किया और इंडियन रेडक्रास सोसायटी रणजीत एवेन्यू कैंपस में ठहराया।

गीर सोमनाथ जिला के रहने वाले राकेश कुमार ने बताया कि दिनेश विजय, धीरू और भावेश के साथ 7 फरवरी, 2016 को किश्ती में समुद्र में मछली पकडऩे निकले। 9 फरवरी की सुबह पाक की नेवल फोर्स ने पकड़ लिया। उन्हें अदालत में पेश कर जेल भेजा और इस गलती के लिए 11 माह की कैद हुई।

गुजरात के बांदा जिला के गांव माटा निवासी जगमोहन ने बताया कि मार्च 2016 को अपने 59 साथियों के साथ पांच किश्तियों में समुद्र में मछली पकडऩे गए। समुद्र में लंगर डाल कर आराम कर रहे थे कि 30 मार्च की मध्यरात्रि पड़ोसी देश की नेवल फोर्स के जवानों ने पकड़ लिया। उन्हें 9 महीने की कैद हुई।

इसी तरह गोपाल नाथा ने बताया कि 1 अप्रैल 2016 को उन्हें पाक रेंजर्स ने उस वक्त काबू किया जब रास्ता भूल कर उनकी किश्तियां पाक की समुद्री सीमा में पहुंच गईं। गुजरात के अधिकारी राहुल लश्कर ने बताया कि वे पुलिस अधिकारी आरजे सोलंकी व टीम के साथ दो दिन पहले अमृतसर पहुंच गए थे। रिहा मछुआरों को रविवार को ट्रेन से गुजरात ले जाएंगे।

रिहाई तो मिली, वतन नसीब नहीं हुआ

कराची जेल से रिहाई मिलने के बाद भी गुजरात के एक मछुआरे को अपना वतन नसीब नहीं हो सका। मछुआरे जीना भगवान (37) को जैसे ही रिहा किए जाने की खबर मिली तो उसे हार्ट अटैक आ गया। उसे अस्पताल में दाखिल करवाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

पाकिस्तान के पास हैं 900 भारतीय किश्तियां

गलती से पाक की समुद्री सीमा में प्रवेश करने वाले मछुआरों को तो रिहाई मिल जाती है, मगर उन्हें उनकी किश्तियां नहीं लौटाई जातीं। रिहा होकर यहां पहुंचे मछुआरों ने बताया कि पाक सरकार के पास 900 भारतीय किश्तियां हैैं, जिन्हें वापस लेने के लिए भारत सरकार कोशिश कर रही है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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