मुंबई, पीटीआइ। शिवसेना ने मंगलवार को दावा किया कि मुंबई और महाराष्ट्र को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्‍तेमाल किया जा रहा है। शिवसेना ने मुख पत्र सामना में छपे संपादकीय के माध्‍यम से कहा कि सोशल मीडिया पर गपशप के नाम पर अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं और इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है और यदि इस पर कार्रवाई करने की बात की जाती है तो कहा जाता है कि अभिव्‍यक्ति की आजादी को छीना जा रहा है। गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों से सुशांत सिंह राजपूत केस और अभिनेत्री कंगना रनोट को के खिलाफ बीएमसी की कार्रवाई के बाद महाराष्ट्र सरकार की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हो रही है।  

सामना में छपे संपादकीय के अनुसार, बीते कुछ दिनों से मुंबई और महाराष्ट्र को सोशल मीडिया पर सुनियोजित तरीके से बदनाम किया जा रहा है। संपादकीय में जस्टिस एन वी रमण का जिक्र करते हुए कहा गया है कि न्यायमूर्ति रमण ने एक समारोह में कहा था कि देश के न्यायाधीश सोशल साइट्स की जननिंदा और तथ्यहीन गॉसिप के शिकार हो रहे हैं। सामना के अनुसार, कानून ने ही न्यायाधीशों के मुंह बांध रखे हैं और ऐसे हालात पैदा किये हुए हैं। मुखपत्र सामना के अनुसार जस्टिस रमण का इशारा सोशल मीडिया की निरंकुश टीका-टिप्पणी की ओर है। इस मामले में कानूनन हाथ बंधे होने के कारण उसका प्रतिवाद करने में न्याय-व्यवस्था भी मजबूर है।अखबार का कहना है कि सवाल यह है कि सोशल मीडिया पर इस तरह के हरकत करने वाले बेलगाम लोग क्या कुछ समझदारी दिखाएंगे?

गौरतलब है कि कंगना के कार्यालय पर बीएमसी की कार्रवाई करने के बाद ही मुंबई में एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी द्वारा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कार्टून सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड करने को लेकर शिवसेना  कार्यकताओं ने सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी के साथ उनके निवास के बाहर मारपीट की थी। 

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