चंडीगढ़, [इन्‍द्रप्रीत सिंह]। पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआणा अब पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के लिए नई मुसीबत खड़ी कर सकता है। राजोआणा की फांसी की सजा को उम्र कैद में बदलने के केंद्र के फैसले के बाद कैप्टन अमरिंदर के लिए राजोआणा की पैरोल की मांग मुसीबत खड़ी कर सकती है। बेशक केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की ओर से भेजी गई सूची पर सहमति जताते हुए सजा में बदलाव कर दिया हो, लेकिन कांग्रेस में इसको लेकर आंतरिक लड़ाई छिड़ गई है।

फांसी की सजा को उम्र कैद में बदलने के केंद्र के फैसले के बाद राज्य सरकार की अनुमति पर ही मिलेगी पैरोल

बेअंत सिंह के परिवार के विरोध के बाद मुख्यमंत्री भी बैकफुट पर आ गए हैं। दो दिन पहले कैप्टन ने लुधियाना में यह कहकर बात टाल दी थी कि उन्होंने केवल सूची भेजी है, राजोआणा के नाम का चयन केंद्र सरकार ने किया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह निजी तौर पर फांसी की सजा के खिलाफ हैं।

समर्थक कर रहे पैरोल मिलने का दावा

सजा कम होने के बाद राजोआणा के समर्थकों का मानना है कि अब पैरोल मिलने का रास्ता खुल जाएगा और 24 साल से बंद राजोआणा अपने घर आ सकेगा। दूसरी ओर कांग्रेस सरकार के लिए यह फैसला लेना आसान नहीं होगा। इससे मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के लिए खासी मुश्किल खड़ी हाे सकती है।

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गुरमीत राम रहीम के पैरोल मांगने पर हरियाणा के सीएम के लिए खड़ी हो गई थी मुश्किल

हरियाणा में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीेम के मामले में ऐसा हो चुका है। गुरमीत राम रहीम की पैरोल की अर्जी के मामले में एक बार तो हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने कह दिया कि यह उनका कानूनी हक है, लेकिन जब यह खबरें प्रकाशित हुईं तो विवाद खड़ा हो गया। संबंधित आयुक्त ने अमन-कानून का मामला बताते हुए पैरोल देने में अभी फैसला लेना ही था कि डेरा प्रमुख की ओर से ही यह वापिस ले ली गई। लगभग ऐसे ही हालात पंजाब में भी पैदा हो सकते हैं। ऐसे में कैप्टन के लिए फैसला लेना मुश्किल हो जाएगा कि वह क्या करें।

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शिअद भी बना रहा दबाव

शिरोमणि अकाली दल ने कहा कि बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि राजोआणा, श्री अकाल तख्त साहिब व सिख संगत के प्रति हमदर्दी दिखाने की बजाय कुछ कांग्रेसी नेता अदालती फैसले का विरोध करके समाज में तनाव पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। अकाली नेता महेश इंद्र सिंह ग्रेवाल ने कहा कि अकाली दल तथा एसजीपीसी ने सैद्धांतिक तौर पर हमेशा ही मौत की सजा का विरोध किया है और करते रहेगी। आठ सिख कैदियों की रिहाई का फैसला राजोआणा की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का फैसला शिअद व एसजीपीसी की कोशिशों का परिणाम है।   

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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