यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 17, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kamalnath: बचपन में कांग्रेस से जुड़ाव, दोस्ती के चलते गए थे तिहाड़, इंदिरा मानती थी अपना बेटा; ऐसा क्या हुआ कि बना रहे कांग्रेस छोड़ने का मन
कमलनाथ ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस में इंदिरा गांधी के समय की थी। वह 1968 में युवा कांग्रेस ...और पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को लेकर सियासी चर्चा तेज है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है। बता दें कि कांग्रेस के कद्दावर और दिग्गज नेताओं में कमलनाथ का नाम आता है।
संजय गांधी की वजह से कांग्रेस में आए कमलनाथ
कमलनाथ ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस में इंदिरा गांधी के समय की थी। उनका बचपन से ही कांग्रेस से जुड़ाव रहा है। वह बचपन में संजय गांधी के साथ पढ़ते थे और संजय गांधी की वजह से ही कांग्रेस में आए। कमलनाथ ने 1968 में युवा कांग्रेस से राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी।
दोस्त की खातिर तिहाड़ गए कमलनाथ
कहा जाता है कि कमलनाथ अपने दोस्त संजय गांधी की वजह से तिहाड़ जेल तक जा चुक हैं। पत्रकार विनोद मेहता की किताब 'संजय गांधी- अनटोल्ड स्टोरी' में जिक्र है, जब देश में आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार थी। तब एक मामले में संजय गांधी को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था, जिसके बाद कमलनाथ ने अपने दोस्त की वजह से एक जज से पंगा ले लिया और उस मामले में उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया, जहां संजय गांधी कैद थे।
इंदिरा गांधी ने कमलनाथ को बताया था तीसरा बेटा
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कमलनाथ को अपना तीसरा बेटा मानती थी। उन्हें अपने बेटे की तरह प्यार करती थी। इस बात का जिक्र खुद इंदिरा गांधी एक जनसभा में भी कर चुकी थीं। उन्होंने भरे सभा में कहा था कि मेरे तीसरे बेटे कमलनाथ को आपलोग वोट दें। इंदिरा गांधी ने 1980 में कमलनाथ को छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से टिकट दिया था।
छिंदवाड़ा से नौ बार सांसद बने कमलनाथ
कमलनाथ ने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र से नौ बार सांसदी का चुनाव जीता था। उन्होंने पहली बार 1980 में इस सीट पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद वह 1984, 1990, 1991, 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 के चुनावों में छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से जीत दर्ज की। वह 2019 में पहली बार छिंदवाड़ा से विधायक बने थे।
15 साल बाद एमपी में कांग्रेस की वापसी
कमलनाथ ने 2018 में मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की वापसी कराई थी। कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस ने 2018 में सरकार बनाई थी और 15 साल बाद सत्ता में आई थी। उस वक्त कमलनाथ ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री चुने गए थे। हालांकि, 15 महीने बाद ही उनकी सरकार गिर गई थी, क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बगावत कर दी थी।
केंद्र में कई अहम पदों पर रहे कमलनाथ
कमलनाथ ने केंद्र में कांग्रेस की सरकार के दौरान कई अहम पदों पर अपनी सेवा दी है। उन्होंने 1991 से 1994 तक केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्री, 1995 से 1996 केंद्रीय कपड़ा मंत्री, 2004 से 2008 तक केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री, 2009 से 2011 तक केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्री, 2012 से 2014 तक शहरी विकास व संसदीय कार्य मंत्री के रूप में काम किया है।
कमलनाथ ने कांग्रेस में निभाई अहम भूमिका
कमलनाथ को कांग्रेस में कई प्रभार दिए गए। उन्होंने 1976 में यूपी युवा कांग्रेस के प्रभारी के रूप में काम किया। इसके बाद 1970 से 1981 तक वह अखिल भारतीय युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य रहे। इसके बाद वह 2000 से 2018 तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव रहे। बाद में उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का दायित्व दिया गया। उन्होंने पिछले साल विधानसभा चुनाव में मिली हार की वजह से प्रदेशा अध्यक्ष का पद छोड़ दिया।