नई दिल्ली, एएनआइ। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने हिंदी थोपने को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन को खत्म कर दिया है। स्टालिन ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मामले पर सफाई दे दी है। इसके साथ ही स्टालिन ने कहा कि हिंदी थोपने के खिलाफ डीएमके की लड़ाई जारी रहेगी।

दक्षिण भारत में हो रहे बवाल के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार शाम को कहा कि उन्होंने कभी भी हिंदी को क्षेत्रीय भाषाओं पर थोपने की बात नहीं कही है। हिंदी को केवल दूसरी भाषा के तौर पर सीखने की बात की थी। इसपर अगर किसी को राजनीति करनी है तो वह करता रहे।

हिंदी थोपे जाने वाले विवाद पर पूर्व वित्त मंत्री चिदंबम के बेटे ने भी विरोध जताया है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने हिंदी विवाद पर कहा कि हम तमिलनाडु में कभी भी हिंदी को जबरदस्ती थोपना स्वीकार नहीं करेंगे। हिंदी इस देश की एकजुट ताकत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम 20 सितंबर को डीएमके द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में हिंदी के मुखर रूप से लागू होने का विरोध करेंगे।

वहीं, इसके पहले INX Media मामले में तिहाड़ में बंद पी चिदंबरम ने भी ट्वीट कर हिंदी थोपे जाने का विरोध किया। चिदंबरम ने कहा कि यह विचार कि हिंदी भाषा देश के लोगों को एकजुट कर सकती है, यह बेहद खतरनाक है।

गौरतलब है कि हिंदी दिवस पर गृह मंत्री ने कहा था कि पूरे देश की एक भाषा होनी चाहिए। हिंदी का विस्तार होना चाहिए। हिंदी दिवस के मौके पर कहा था कि आज देश को एकता की डोर में बाँधने का काम अगर कोई एक भाषा कर सकती है तो वो सर्वाधिक बोले जाने वाली हिंदी भाषा ही है। 

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Posted By: Dhyanendra Singh

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