नई दिल्ली, जेएनएन। सोमवार 5 अगस्त 2019 की तारीख में स्वतंत्र भारत का नया इतिहास लिख दिया गया। 17 अक्टूबर 1949 को संविधान में राष्ट्रपति के आदेश से जोड़े गये अनुच्छेद 370 को उसी तरीके से खत्म कर दिया गया। अपने विलक्षण फैसलों के लिए ख्यात हो चुकी केंद्र की नरेंद्र मोदी नीत राजग सरकार ने 70 साल बाद वह ऐतिहासिक फैसला ले लिया, जिसकी सुगबुगाहट पिछले एक हफ्ते से चरमोत्कर्ष पर थी।

केंद्र का यह असाधारण फैसला देश की एकता व अखंडता के लिए दूरगामी महत्व का है। हालांकि, कांग्रेस समेत कुछ दलों ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए लोकतंत्र का काला दिन बताया और भारी विरोध किया, लेकिन पूरे देश में सरकार के इस फैसले से जश्न का माहौल है।

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जम्मू-कश्मीर की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र की भाजपा सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया। यह करीब 70 साल से राज्य के साथ पूरे देश में विवाद का केंद्र बना हुआ था। कश्मीर भारत के साथ भी था और नहीं भी। भारत के कई कानून राज्य में लागू नहीं होते थे। अलग झंडा, अलग विधान, छह वर्षीय विधानसभा, अलग दंड संहिता जैसे तमाम प्रावधान उसे भारत के साथ आत्मसात नहीं होने दे रहे थे।

सोमवार सुबह 11:15 बजे गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में घोषणा की कि राष्ट्रपति कोविंद ने अनुच्छेद 370 की समाप्ति की अधिसूचना जारी कर दी है। इसी सिलसिले में वह एक संकल्प पारित करने के लिए और मौजूदा जम्मू-कश्मीर को दो भागों में बांटने के लिए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 पेश कर रहे हैं। इसके बाद विपक्ष के भारी हंगामे के बीच चर्चा शुरू हुई।

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आधी रात के कदमों से तय हो गई थी फैसले की घड़ी

पिछले करीब एक हफ्ते की कवायद को लेकर देश में चर्चाएं तेज थीं कि सरकार कश्मीर को लेकर कोई ब़़डा कदम उठा रही है। रविवार रात जैसे ही कश्मीरी नेताओं को नजरबंद कर घाटी में धारा 144 लागू की गई और सोमवार सुबह 9.30 बजे पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक बुलाई गई, यह तय हो गया था कि अब फैसले की घड़ी आ गई है। सुबह करीब एक घंटे कैबिनेट बैठक में सारी व्यूह रचना को मंजूरी दी गई और फिर संसद के मानसून सत्र में एलान का फैसला कर लिया गया।

शाह को आते देख राज्यसभा में खड़े हो गए भाजपा सदस्य

कैबिनेट के निर्णय के बाद सोमवार सुबह करीब 11 बजे गृह मंत्री अमित शाह जब राज्यसभा में पहुंचे तो सदन में मौजूदा भाजपा सदस्यों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। माहौल में पहले ही बेचैनी व खुशी नजर आ रही थी। विपक्षी नेता जहां बेचैन थे वहीं सत्तापक्ष के खुश।

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जम्मू-कश्मीर का देश के साथ एकीकरण नहीं हो रहा था : शाह

शाह ने अपना बयान शुरू करते हुए कहा-ऐतिहासिक! अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर का देश से एकीकरण नहीं होने दे रहा था, लेकिन अब यह लागू नहीं रहेगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अनुच्छेद 370 खत्म करने की अधिसूचना पर दस्तखत कर दिए हैं और अब चूंकि जम्मू-कश्मीर संविधान सभा अस्तित्व में नहीं रहेगी और राज्य विधानसभा भंग हो चुकी है, इसलिए उसकी सारी शक्तियां संसद के दोनों सदनों में निहित हैं। राष्ट्रपति के आदेश पर दोनों सदनों में बहस हो सकती है।

अनुच्छेद 370 (3) में ही थे इसे हटाने के प्रावधान

शाह के बयान के बीच सदस्यों को राष्ट्रपति के आदेश की प्रतियां भी वितरित की गई। शाह ने बयान जारी रखते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 को ऐसे आदेश से खत्म किया जा सकता है, ऐसे प्रावधान इसी अनुच्छेद के उपबंध 370 (3) में निहित हैं। इसके अनुसार, राष्ट्रपति के आदेश से इस अनुच्छेद में संशोधन किया जा सकते हैं या इसे समाप्त किया जा सकता है।

1952 व 1962 में कांग्रेस ने किए संशोधन

गृह मंत्री शाह ने रास में कहा कि हम वही तरीका अपना रहे हैं जो 1952 व 1962 में कांग्रेस ने अपनाया था। तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने अधिसूचना के माध्यम से ही इस अनुच्छेद में संशोधन किए थे। सपा के प्रो. राम गोपाल यादव ने इस पर शाह से पूछा था कि क्या बगैर संविधान संशोधन विधेयक लाए संविधान में संशोधन हो सकता है? इस पर शाह ने उक्त स्पष्टीकरण दिया।

विपक्ष के विरोध में सिर्फ राजनीति

शाह के सरकार के कदम के विपक्ष द्वारा किए जा रहे विरोध को भी अनुचित ठहराया और कहा कि उनकी बातों में कोई दम नहीं हैं, वे सिर्फ राजनीति की खातिर विरोध कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह राजनीति ना करे।

इस अनुच्छेद ने भारत से एकीकरण नहीं होने दिया

शाह ने कहा कि विपक्ष के एक नेता ने कहा कि अनुच्छेद 370 ने कश्मीर में भारत से जोड़ा है। यह सत्य नहीं है। महाराजा हरिसिंह ने 27 अक्टूबर, 1947 को जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय की संधि पर दस्तखत किए थे जबकि अनुच्छेद 370 बाद में 1949 में आया। दरअसल इसी अनुच्छेद ने जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ एकजुट नहीं होने दिया।

पीडीपी के दो सदस्यों ने फाड़े कपड़े

शाह की घोषणा के बीच ही रास में मौजूद पीडीपी के दो सदस्यों ने हंगामा करते हुए अपने कपड़े फाड़ लिए। संविधान की प्रतियां भी फाड़ी गई। इससे नाराज सभापति एम. वेंकैया नायडू ने मार्शल के जरिए उन्हें सदन से बाहर निकलवा दिया।

ऐतिहासिक फैसलाः ऐसे समझे

-राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जारी किया आदेश, गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में पेश किया संकल्प।

-जम्मू-कश्मीर को दो अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने का राज्य पुनर्गठन विधेयक अलग से पेश। 

-जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के रूप में बढ़ गए दो केंद्र शासित प्रदेश, अब सात से नौ हो गए

- देश के 29 राज्यों में से एक कम हुआ एक, अब 28 राज्य

-फैसले से देशभर में जश्न का माहौल, कांग्रेस ने बताया काला दिन

..तीन ऐतिहासिक फैसले

1. अनुच्छेद 370 समाप्त परंतु इसका एक खंड लागू रहेगा

2. जम्मू-कश्मीर नया केंद्र शासित प्रदेश, विधानसभा रहेगी, पुडुचेरी व दिल्ली की तरह

3. लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश, मगर विधानसभा नहीं, चंडीगढ़ की तरह

..सात मायने

1. देश का कोई भी नागरिक अब जम्मू-कश्मीर में संपत्ति खरीद सकेगा, कारोबार, उद्योग स्थापित कर सकेगा।

2. देश के सारे कानून जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में लागू होंगे।

3. अनुच्छेद 356 लागू हो सकेगा, यानी सीधे राष्ट्रपति शासन लग सकेगा। 

4. पुलिस-प्रशासन केंद्र के अधीन हो जाएगा। कानून--व्यवस्था केंद्र के जिम्मे।

5. अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल भी लग सकेगा।

6. छह साल की विधानसभा नहीं रहेगी, अब पांच साल होगा कार्यकाल।

7. सूबे का मौजूदा सियासी गणित बदल जाएगा। जम्मू व कश्मीर की सीटों से बनेगी सरकार।

..ये प्रावधान हुए शून्य

-अलग संविधान

-विशेष राज्य का दर्जा 

-अलग झंडा, अलग निशान

-दोहरी नागरिकता

-रणबीर दंड संहिता

 कश्मीर के इतिहास की यादगार दो तारीखें

1. 17 अक्टूबर 1949 : राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदेश से इसे संविधान शामिल किया गया था। 

2. 5 अगस्त 2019 : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आदेश से संविधान से हटाया गया

नया जम्मू-कश्मीर ऐसा रहेगा

-केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में 20 जिले रह जाएंगे। जम्मू व कश्मीर में अब 10-10 जिले होंगे

-दो मौजूदा जिले लेह व लद्दाख नए केंद्र शासित प्रदेश में रहेंगे।

जम्मू-कश्मीर विस की मौजूदा सीटें

अभी कुल सीटें : 87

कश्मीर : 46

जम्मू : 37

लद्दाख : 04

(नए सिरे से परिसीमन व आबादी के मान से जम्मू-कश्मीर की नई विधानसभा बनेगी तो सीटों की संख्या भी घट-बढ़ जाएगी)

..इन दलों ने किया विरोध

कांग्रेस, तृणमूल, सपा, द्रमुक, राकांपा, वामपंथी दल व राजग की सहयोगी जदयू

..ये आए सरकार के साथ

बसपा, आप, टीडीपी, बीजद, टीआरएस, अन्नाद्रमुक

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Edited By: Sanjeev Tiwari

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