विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

UFC का युवाओं में क्‍यों बढ़ रहा क्रेज? 30 फीट चौड़े पिंजरे के अंदर होती फाइट के नियम आसानी से समझें

Published: Fri, 09 Oct 2026 03:49 PM (IST)

UFC, जिसका मतलब है अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप। यह एक ऐसी संस्था है, जो मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) को प्रमोट करता है।

यूएफसी के नियम

यूएफसी के नियम

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। UFC, जिसका मतलब है अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप। यह एक ऐसी संस्था है, जो मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) को प्रमोट करता है। एमएमए में दो फाइटर्स केज के अंदर पूरी दम से जीतने के लिए एक-दूसरे का खून बहाने से भी पीछे नहीं हटते हैं।

एमएमए में एथलीट्स को स्ट्राइकिंग और ग्रैपलिंग का इस्तेमाल करने की अनुमति होती है। स्ट्राइकिंग का मतलब है कि फाइटर्स अपने हाथ और पैर का इस्तेमाल करते हुए पंचेस, किक्स, घुटने और कोहनी से एक-दूसरे को घायल करने की कोशिश करते हैं।

बात करें ग्रैपलिंग की तो, इसमें फाइटर्स एक-दूसरे को रेसलिंग,ज्यू-जित्सू जैसे स्किल्स का उपयोग करते हुए सबमिशन के तहत टैप आउट कराने की कोशिश करते हैं। अगर कोई फाइटर्स टैप आउट कर देता है तो,वो फाइट हार जाता है।

यूएफसी कैस काम करता है?

यूएफसी फाइट ऑक्टोगन के अंदर होता है। यह एक 30 फीट चौड़ा, आठ तरफ वाला जालीदार पिंजरा होता है। ऑक्टोगन शुरुआत से ही यूएफसी का हिस्सा रहा है। यूएफसी के ज्यादातर फाइट तीन राउंड के होते हैं। हर एक राउंड पांच मिनट का होता है। वहीं मेन इंवेंट्स और चैंपियनशिप फाइट्स पांच राउंड के होते हैं।

दो एथलीट्स के बीच फाइट, नॉकआउट, टेक्निकल नॉकआउट, सबमिशन या फिर जजेस के स्कोर के साथ खत्म होती है। अगर फाइट अंत तक जाता है यानी कोई भी फाइटर टैप आउट नहीं करता है या फिर नॉकआउट नहीं होता, तो ही जजेस के स्कोर के हिसाब से विजेता तय किया जाता है।

जजेस हर राउंड में 10 अंको का स्कोरिंग सिस्टम फॉलो करते हैं। उनका ध्यान मुख्यत: चार चीजों पर होती है, जिसमें असरदार स्ट्राइकिंग और ग्रैपलिंग, अग्रेसन और ऑक्टोगन कंट्रोल शामिल है। हर मैच में तीन जज होते हैं, सभी जज केज के नजदीक बैठ कर अपना फैसला तय करते हैं।

यूएफसी का नियम क्या है?

यूएफसी फाइट में एमएमए के ही नियम लागू होते हैं, हालांकि समय के साथ इसमें भी कई बदलाव आए हैं। यूएफसी में फाइटर्स को कमर के नीचे और ऊपर मारने की अनुमति होती है। मगर इसके लिए भी कुछ स्पेशल रूल्स होते हैं।

फाइटर्स सिर के पीछे वाले हिस्से और रीढ़ की हड्डी पर वार नहीं कर सकते। इसके अलावा, आंख में उंगली करना, काटना, अपने सिर से विरोधी पर हमला करना, ग्रोइन पर मारना या ऐसी किसी मूव का इस्तेमाल करना, जो खतरनाक और हानि पहुंचाने वाले हों, यूएफसी के नियमों के खिलाफ है। अगर कोई खिलाड़ी नियमों का उल्लंघन करता है तो, उसके अंक काटे जा सकते हैं या फिर उसे मैच से बाहर भी किया जा सकता है।

फाइट के दौरान अगर कोई फाइटर मुकाबला जारी रखने की हालत में न हो या वो अपने आप को सही से डिफेंड नहीं कर पा रहा हो तो, ऑक्टोगन के अंदर मौजूद रेफरी कभी भी फाइट को खत्म या रोक सकता है, क्योंकि फाइटर्स का सुरक्षित रहना यूएफसी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और संस्था हर इवेंट से पहले सख्त मेडिकल नियमों का पालन करती है।  

 

 

किसने किया भारत का प्रतिनिधित्व?

यूएफसी के अंदर अंशुल जुबली भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वो पहले भारतीय फाइटर हैं, जो यूएफसी में फाइट कर चुके हैं। हालांकि, वो अपने दोनों फाइट हार चुके हैं। उनकी अगली फाइट कब होगी, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।

अंशुल के अलावा, महिलाओं में पूजा तोमर भारत की तरफ से यूएफसी में फाइट कर चुकी हैं। उन्होंने अपनी पहली फाइट जीती थी। मगर दूसरे फाइट में हार का सामना करना पड़ा था। अंशुल और पूजा के नक्शेकदम पर चलकर भारत से और भी फाइटर यूएफसी की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं।

यह भी पढ़ें- साउथ अफ्रीकी हायपरमार्केट ने छिड़का ऑस्ट्रेलिया के जख्मों पर नमक, सैंडपेपर का नाम लेकर मारा ताना

यह भी पढ़ें- SA vs AUS: 10 साल बाद टीम में लौटा, कैंसर को मात देकर बनाई जगह; 33 गेंदों पर बिना खाता खोले आउट हुआ ये ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज