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कड़ी मेहनत और अनुशासन के दम पर सावन बरवाल ने रचा इतिहास, 44 साल का सूखा किया खत्म; कहा- रजत भी स्वर्ण से कम नहीं

By Ajay AttriEdited By: Abhishek Upadhyay
Published: Sun, 27 Sep 2026 09:54 AM (IST)

जापान के आइची नागोया में चल रहे एशियाई खेल 2026 में हिमाचल के सावन बरवाल ने पुरुषों की मैराथन स्पर्धा ...और पढ़ें

सावन बरवाल ने रचा इतिहास

सावन बरवाल ने रचा इतिहास

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अजय अत्री, जागरण, धर्मशालाः जापान के आइची नागोया में चल रहे एशियाई खेल 2026 में शुक्रवार को हिमाचल के जोगिंद्रनगर के रहने वाले सावन बरवाल ने पुरुषों की मैराथन स्पर्धा में रजत पदक जीत लिया। इसी रेस में उन्होंने 2:11:37 का समय निकालकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया। 44 साल के लंबे इंतजार के बाद हमने एशियाई खेलों की इस स्पर्धा में पदक जीता है।

प्रस्तुत हैं इंटरव्यू के प्रमुख अंश:

सवाल: पहले तो आपको बधाई, 44 साल बाद इन खेलों में देश के लिए पदक आया है। मैराथन की स्पर्धा बहुत कठिन मानी जाती है। खुद को कैसे फिट रखते हैं?

सावन बरवाल: खुश हूं कि देश के लिए कुछ कर सका। जहां तक तैयारी और फिटनेस की बात है तो कोच के कहे मुताबिक हर दिन कई किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ती है। हर चीज का बहुत ध्यान रखना होता है। अनुशासन बहुत जरूरी है तभी परिणाम निकलते हैं।

सवाल-आपके नाम कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां दर्ज हैं। एशियाई खेलों का रजत कितना महत्व रखता है?

सावन बरवाल: बहुत ज्यादा, पिछले कई महीनों से एशियाई खेलों की तैयारी कर रहा था। बहुत मेहनत की थी इस पल के लिए। लक्ष्य तो स्वर्ण ही था, लेकिन मेरे लिए रजत भी स्वर्ण से कम नहीं।-

सवाल: आप दौड़ में काफी समय आगे रहे, फिर मामला पलट गया?

सावन बरवाल: खेल में अक्सर ऐसा होता रहता है, खासकर मैराथन में, सेकेंड के सौवें हिस्से में भी परिणाम बदल जाते हैं। मुकाबला कड़ा था, लेकिन दिल में यह संतोष है कि भारत की पदक संख्या में इजाफा कर सका।

सवाल- एशियाई खेलों के बाद अब आने वाले लक्ष्य क्या हैं?

सावन बरवाल: विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप और ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण जीतना भावी लक्ष्य है। प्रदर्शन का स्तर बना रहे इसी कोशिश में हूं।

सवाल- इस कामयाबी का श्रेय किसे देंगे?

सावन बरवाल: पहले तो देशवासियों को जिन्होंने मेरी जीत की दुआएं कीं। मेरी सफलता के पीछे बहुत से लोगों का हाथ है। परिवार और प्रारंभिक कोच गोपाल ठाकुर ने भी मुझे यहां तक पहुंचाने में काफी मदद की और मौजूदा कोच स्काट सीमन को भी इस जीत का श्रेय दूंगा।

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